यासीन · 27/83
अनुवाद उच्चारण — सूरा यासीन
بِمَا غَفَرَ لِي رَبِّي وَجَعَلَنِي مِنَ الْمُكْرَمِينَ ۝٢٧
Bimaa ghafara lee Rabbee wa ja`alanee minal mukrameen
📖 हिंदी अर्थ
मेरे परवरदिगार ने जो मुझे बख्श दिया और मुझे बुर्ज़ुग लोगों में शामिल कर दिया काश इसको मेरी क़ौम के लोग जान लेते और ईमान लाते

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • بِمَا غَفَرَ لِي رَبِّي: उस कारण से जो मेरे रब ने मुझे क्षमा किया (अर्थात मेरे गुनाहों की माफ़ी)।
  • وَجَعَلَنِي مِنَ الْمُكْرَمِينَ: और मुझे सम्मानित लोगों में से बना दिया (अर्थात मुझे अपनी करीबी और इज़्ज़त वालों में शामिल कर लिया)।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस मोमिन की ज़बानी है जिसे अल्लाह ने शहादत का शरफ़ अता किया और उसकी रूह को जन्नत की नेमतों से नवाज़ा। जब वह जन्नत में दाखिल हुआ और उसने वहाँ की वो नेमतें देखीं जो किसी आँख ने नहीं देखीं, किसी कान ने नहीं सुनीं और किसी दिल ने नहीं सोचीं, तो उसके दिल में अपनी क़ौम के लिए हसरत और मुहब्बत पैदा हुई। उसने कहा: "काश! मेरी क़ौम को यह बात पता चल जाती कि मेरे रब ने मुझे किस तरह माफ़ फ़रमाया और मुझे अपने मुकर्रमीन (सम्मानित बंदों) में शामिल कर लिया।"

यानी उसने यह दुआ और तमन्ना की कि उसकी क़ौम के लोगों को उसकी इस कामयाबी का इल्म हो जाए, ताकि वे भी ईमान लाएँ और उसी तरह अल्लाह की रहमत और मग़फ़िरत के हक़दार बनें। यह एक मोमिन की आख़िरी ख्वाहिश थी कि उसकी मौत भी उसकी क़ौम के लिए हिदायत का ज़रिया बन जाए।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान और सब्र की कितनी बड़ी अज़ीमुश्शान क़ीमत है। जो शख्स अल्लाह की राह में कुर्बानी देता है, अल्लाह उसे दुनिया में भी इज़्ज़त देता है और आख़िरत में भी। मोमिन की मौत भी उसकी क़ौम के लिए रहमत बन जाती है। हमें चाहिए कि हम अपने अमल को सिर्फ़ दुनिया की कामयाबी के लिए न बनाएँ, बल्कि उस आख़िरी मंज़िल को याद रखें जहाँ अल्लाह अपने नेक बंदों को माफ़ी और इज़्ज़त से नवाज़ेगा। यही असली कामयाबी है — जब अल्लाह हमें माफ़ कर दे और हमें अपने मुकर्रमीन में शामिल कर ले। यही वह लम्हा है जिसकी तमन्ना हर मोमिन को अपनी ज़िंदगी में करनी चाहिए और अपनी क़ौम को भी इसी राह पर चलने की दावत देनी चाहिए।



📜 आयत 25-29 — सूरा यासीन

25إِنِّي آمَنتُ بِرَبِّكُمْ فَاسْمَعُونِ
मैं तो तुम्हारे परवरदिगार पर ईमान ला चुका हूँ मेरी बात सुनो और मानो; मगर उन लोगों ने उसे संगसार कर डाला
26قِيلَ ادْخُلِ الْجَنَّةَ ۖ قَالَ يَا لَيْتَ قَوْمِي يَعْلَمُونَ
तब उसे खुदा का हुक्म हुआ कि बेहिश्त में जा (उस वक्त भी उसको क़ौम का ख्याल आया तो कहा)
27بِمَا غَفَرَ لِي رَبِّي وَجَعَلَنِي مِنَ الْمُكْرَمِينَ
मेरे परवरदिगार ने जो मुझे बख्श दिया और मुझे बुर्ज़ुग लोगों में शामिल कर दिया काश इसको मेरी क़ौम के लोग जान लेते और ईमान लाते
28۞ وَمَا أَنزَلْنَا عَلَىٰ قَوْمِهِ مِن بَعْدِهِ مِن جُندٍ مِّنَ السَّمَاءِ وَمَا كُنَّا مُنزِلِينَ
और हमने उसके मरने के बाद उसकी क़ौम पर उनकी तबाही के लिए न तो आसमान से कोई लशकर उतारा और न हम कभी इतनी सी बात के वास्ते लशकर उतारने वाले थे
29إِن كَانَتْ إِلَّا صَيْحَةً وَاحِدَةً فَإِذَا هُمْ خَامِدُونَ
वह तो सिर्फ एक चिंघाड थी (जो कर दी गयी बस) फिर तो वह फौरन चिराग़े सहरी की तरह बुझ के रह गए
यासीनकुरान सूची
83आयत
मक्कीअवतरण स्थान
27आयत

अनुवाद — यासीन 27

सूरा यासीन आयत 27 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मेरे परवरदिगार ने जो मुझे बख्श दिया और मुझे बुर्ज़ुग…

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Thursday, October 1, 2026

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