यासीन · 53/83
अनुवाद उच्चारण — सूरा यासीन
إِن كَانَتْ إِلَّا صَيْحَةً وَاحِدَةً فَإِذَا هُمْ جَمِيعٌ لَّدَيْنَا مُحْضَرُونَ ۝٥٣
In kaanat illaa saihatanw waahidatan fa-izaa hum jamee`ul ladainaa muhdaroon
📖 हिंदी अर्थ
और पैग़म्बरों ने भी सच कहा था (क़यामत तो) बस एक सख्त चिंघाड़ होगी फिर एका एकी ये लोग सब के सब हमारे हुजूर में हाज़िर किए जाएँगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • صَيْحَةً – (एक) चीख, यहाँ इसका अर्थ है सूर (नरसिंगा) में फूँका जाने वाला दूसरा नफ़ख़ा (फूँक)।
  • لَدَيْنَا – हमारे पास।
  • مُحْضَرُونَ – उपस्थित किए गए, हाज़िर किए गए।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में क़यामत के दिन के मंज़र को बयान किया है कि लोगों का दोबारा उठाया जाना और उनका हमारे सामने हाज़िर होना कोई मुश्किल या लंबा काम नहीं है। यह सिर्फ़ एक ही चीख़ (सूर में दूसरी फूँक) का नतीजा होगा। जैसे ही इसराफ़ील अलैहिस्सलाम सूर में फूँक मारेंगे, बस उसी पल सभी लोग अपनी-अपनी क़ब्रों से निकलकर अल्लाह के सामने हाज़िर हो जाएँगे। यह इतना आसान और तेज़ होगा कि उसमें कोई देरी या रुकावट नहीं होगी। अल्लाह के लिए यह काम उतना ही आसान है जितना किसी को एक बार पुकारना। यह अल्लाह की क़ुदरत का बयान है कि वह सब कुछ करने पर पूरी तरह क़ादिर है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि मौत के बाद की ज़िंदगी बिल्कुल सच है और उसका आना निश्चित है। जिस तरह अल्लाह ने पहली बार हमें पैदा किया, उसी तरह वह हमें दोबारा ज़िंदा करेगा। यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम इस दुनिया में ऐसे काम करें जो उस दिन हमारे काम आएँ। जो लोग अल्लाह पर ईमान रखते हैं और नेक अमल करते हैं, उनके लिए यह दिन रहमत और ख़ुशी का दिन होगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ गुज़ारें, ताकि उस दिन हमारा हाज़िर होना शर्मिंदगी और डर का नहीं, बल्कि इज़्ज़त और सुकून का हो। यही असली कामयाबी है।



📜 आयत 51-55 — सूरा यासीन

51وَنُفِخَ فِي الصُّورِ فَإِذَا هُم مِّنَ الْأَجْدَاثِ إِلَىٰ رَبِّهِمْ يَنسِلُونَ
और फिर (जब दोबारा) सूर फूँका जाएगा तो उसी दम ये सब लोग (अपनी-अपनी) क़ब्रों से (निकल-निकल के) अपने परवरदिगार की बारगाह की तरफ चल खड़े होगे
52قَالُوا يَا وَيْلَنَا مَن بَعَثَنَا مِن مَّرْقَدِنَا ۜ ۗ هَٰذَا مَا وَعَدَ الرَّحْمَٰنُ وَصَدَقَ الْمُرْسَلُونَ
और (हैरान होकर) कहेगें हाए अफसोस हम तो पहले सो रहे थे हमें ख्वाबगाह से किसने उठाया (जवाब आएगा) कि ये वही (क़यामत का) दिन है जिसका खुदा ने (भी) वायदा किया था
53إِن كَانَتْ إِلَّا صَيْحَةً وَاحِدَةً فَإِذَا هُمْ جَمِيعٌ لَّدَيْنَا مُحْضَرُونَ
और पैग़म्बरों ने भी सच कहा था (क़यामत तो) बस एक सख्त चिंघाड़ होगी फिर एका एकी ये लोग सब के सब हमारे हुजूर में हाज़िर किए जाएँगे
54فَالْيَوْمَ لَا تُظْلَمُ نَفْسٌ شَيْئًا وَلَا تُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
फिर आज (क़यामत के दिन) किसी शख्स पर कुछ भी ज़ुल्म न होगा और तुम लोगों को तो उसी का बदला दिया जाएगा जो तुम लोग (दुनिया में) किया करते थे
55إِنَّ أَصْحَابَ الْجَنَّةِ الْيَوْمَ فِي شُغُلٍ فَاكِهُونَ
बेहश्त के रहने वाले आज (रोजे क़यामत) एक न एक मशग़ले में जी बहला रहे हैं
यासीनकुरान सूची
83आयत
मक्कीअवतरण स्थान
53आयत

अनुवाद — यासीन 53

सूरा यासीन आयत 53 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और पैग़म्बरों ने भी सच कहा था (क़यामत तो) बस…

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Monday, September 28, 2026

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