Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- मरक़दिना: हमारी क़ब्रें (सोने की जगह)।
- या वैलना: हमारी हलाकत (विनाश) हो! (अफ़सोस और पछतावे का कल्मा)।
- बअसना: हमें उठाया / जगाया।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब क़यामत आएगी और लोग अपनी क़ब्रों से उठाए जाएँगे, तो वे लोग जिन्होंने दुनिया में पुनर्जीवन (आख़िरत) को झुठलाया था, अत्यधिक पछतावे और हैरानी के साथ कहेंगे: "हाय हमारी बर्बादी! किसने हमें हमारी क़ब्रों से उठा दिया?" यह उनका पहला अहसास होगा जब वे सोचेंगे कि यह क्या हो रहा है।
इस पर उन्हें जवाब दिया जाएगा — या कुछ मुफ़स्सिरीन के अनुसार वे खुद ही समझ जाएँगे — कि "यह वही चीज़ है जिसका वादा रहमान (अल्लाह) ने किया था और रसूलों ने सच कहा था।" यानी, यह वह दिन है जिसका ऐलान सभी नबियों ने किया था, लेकिन उन्होंने नहीं माना। अब जब सच्चाई सामने आ गई, तो वे अपनी ग़लती पर पछताएँगे, मगर यह पछतावा उन्हें कोई फ़ायदा नहीं देगा।
कुछ सलफ़ (पूर्ववर्ती विद्वानों) का कहना है कि "यह वही है जिसका वादा रहमान ने किया" — यह जुमला मोमिनीन (ईमानवालों) की तरफ़ से होगा, जो उन काफ़िरों को जवाब देंगे। मोमिनीन कहेंगे: "यह वही दिन है जिसका अल्लाह ने वादा किया था और रसूलों ने सच कहा था।" यानी, ईमानवाले इस दिन को देखकर खुश होंगे और काफ़िरों को याद दिलाएँगे कि आख़िर वह सच्चाई सामने आ ही गई जिसे वे झुठलाते थे।
इस आयत में उन लोगों की हालत बयान की गई है जिन्होंने आख़िरत का इनकार किया। वे उस वक़्त अपनी ग़लती को समझेंगे, लेकिन यह समझना बेकार होगा। यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम आज ही अपने रब के वादों पर ईमान लाएँ, अपने नबी ﷺ की बताई हुई बातों को सच मानें और उस दिन के लिए तैयारी करें जब कोई माफ़ी नहीं माँगी जा सकेगी।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का वादा सच्चा है और उसका फैसला अटल है। जो लोग आज उसके रसूलों को झुठलाते हैं, वे कल पछताएँगे, लेकिन पछतावे का वक़्त निकल चुका होगा। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को इस तरह गुज़ारें कि उस दिन हम उन लोगों में से न हों जो हैरानी और अफ़सोस में कहेंगे: "किसने हमें उठाया?" बल्कि हम उन लोगों में से हों जो खुशी से कहेंगे: "यह वही है जिसका हमसे वादा किया गया था!" अल्लाह हमें सच्ची ईमान वाली ज़िंदगी दे और आख़िरत की तैयारी की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 50-54 — सूरा यासीन
अनुवाद — यासीन 52
सूरा यासीन आयत 52 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (हैरान होकर) कहेगें हाए अफसोस हम तो पहले सो…सूरा आयत 52/83 — सूरा यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यासीन सुनें, सूरा यासीन अनुवाद, सूरा यासीन mp3, सूरा यासीन pdf. आयत 50–54. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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