यासीन · 52/83
अनुवाद उच्चारण — यासीन
قَالُوا يَا وَيْلَنَا مَن بَعَثَنَا مِن مَّرْقَدِنَا ۜ ۗ هَٰذَا مَا وَعَدَ الرَّحْمَٰنُ وَصَدَقَ الْمُرْسَلُونَ ۝٥٢
Qaaloo yaa wailanaa mam ba`asanaa mim marqadinaa; haaza maa wa`adar Rahmanu wa sadaqal mursaloon
📖 हिंदी अर्थ
और (हैरान होकर) कहेगें हाए अफसोस हम तो पहले सो रहे थे हमें ख्वाबगाह से किसने उठाया (जवाब आएगा) कि ये वही (क़यामत का) दिन है जिसका खुदा ने (भी) वायदा किया था

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • मरक़दिना: हमारी क़ब्रें (सोने की जगह)।
  • या वैलना: हमारी हलाकत (विनाश) हो! (अफ़सोस और पछतावे का कल्मा)।
  • बअसना: हमें उठाया / जगाया।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब क़यामत आएगी और लोग अपनी क़ब्रों से उठाए जाएँगे, तो वे लोग जिन्होंने दुनिया में पुनर्जीवन (आख़िरत) को झुठलाया था, अत्यधिक पछतावे और हैरानी के साथ कहेंगे: "हाय हमारी बर्बादी! किसने हमें हमारी क़ब्रों से उठा दिया?" यह उनका पहला अहसास होगा जब वे सोचेंगे कि यह क्या हो रहा है।

इस पर उन्हें जवाब दिया जाएगा — या कुछ मुफ़स्सिरीन के अनुसार वे खुद ही समझ जाएँगे — कि "यह वही चीज़ है जिसका वादा रहमान (अल्लाह) ने किया था और रसूलों ने सच कहा था।" यानी, यह वह दिन है जिसका ऐलान सभी नबियों ने किया था, लेकिन उन्होंने नहीं माना। अब जब सच्चाई सामने आ गई, तो वे अपनी ग़लती पर पछताएँगे, मगर यह पछतावा उन्हें कोई फ़ायदा नहीं देगा।

कुछ सलफ़ (पूर्ववर्ती विद्वानों) का कहना है कि "यह वही है जिसका वादा रहमान ने किया" — यह जुमला मोमिनीन (ईमानवालों) की तरफ़ से होगा, जो उन काफ़िरों को जवाब देंगे। मोमिनीन कहेंगे: "यह वही दिन है जिसका अल्लाह ने वादा किया था और रसूलों ने सच कहा था।" यानी, ईमानवाले इस दिन को देखकर खुश होंगे और काफ़िरों को याद दिलाएँगे कि आख़िर वह सच्चाई सामने आ ही गई जिसे वे झुठलाते थे।

इस आयत में उन लोगों की हालत बयान की गई है जिन्होंने आख़िरत का इनकार किया। वे उस वक़्त अपनी ग़लती को समझेंगे, लेकिन यह समझना बेकार होगा। यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम आज ही अपने रब के वादों पर ईमान लाएँ, अपने नबी ﷺ की बताई हुई बातों को सच मानें और उस दिन के लिए तैयारी करें जब कोई माफ़ी नहीं माँगी जा सकेगी।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का वादा सच्चा है और उसका फैसला अटल है। जो लोग आज उसके रसूलों को झुठलाते हैं, वे कल पछताएँगे, लेकिन पछतावे का वक़्त निकल चुका होगा। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को इस तरह गुज़ारें कि उस दिन हम उन लोगों में से न हों जो हैरानी और अफ़सोस में कहेंगे: "किसने हमें उठाया?" बल्कि हम उन लोगों में से हों जो खुशी से कहेंगे: "यह वही है जिसका हमसे वादा किया गया था!" अल्लाह हमें सच्ची ईमान वाली ज़िंदगी दे और आख़िरत की तैयारी की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 50-54 — यासीन

50فَلَا يَسْتَطِيعُونَ تَوْصِيَةً وَلَا إِلَىٰ أَهْلِهِمْ يَرْجِعُونَ
जब ये लोग बाहम झगड़ रहे होगें फिर न तो ये लोग वसीयत ही करने पायेंगे और न अपने लड़के बालों ही की तरफ लौट कर जा सकेगें
51وَنُفِخَ فِي الصُّورِ فَإِذَا هُم مِّنَ الْأَجْدَاثِ إِلَىٰ رَبِّهِمْ يَنسِلُونَ
और फिर (जब दोबारा) सूर फूँका जाएगा तो उसी दम ये सब लोग (अपनी-अपनी) क़ब्रों से (निकल-निकल के) अपने परवरदिगार की बारगाह की तरफ चल खड़े होगे
52قَالُوا يَا وَيْلَنَا مَن بَعَثَنَا مِن مَّرْقَدِنَا ۜ ۗ هَٰذَا مَا وَعَدَ الرَّحْمَٰنُ وَصَدَقَ الْمُرْسَلُونَ
और (हैरान होकर) कहेगें हाए अफसोस हम तो पहले सो रहे थे हमें ख्वाबगाह से किसने उठाया (जवाब आएगा) कि ये वही (क़यामत का) दिन है जिसका खुदा ने (भी) वायदा किया था
53إِن كَانَتْ إِلَّا صَيْحَةً وَاحِدَةً فَإِذَا هُمْ جَمِيعٌ لَّدَيْنَا مُحْضَرُونَ
और पैग़म्बरों ने भी सच कहा था (क़यामत तो) बस एक सख्त चिंघाड़ होगी फिर एका एकी ये लोग सब के सब हमारे हुजूर में हाज़िर किए जाएँगे
54فَالْيَوْمَ لَا تُظْلَمُ نَفْسٌ شَيْئًا وَلَا تُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
फिर आज (क़यामत के दिन) किसी शख्स पर कुछ भी ज़ुल्म न होगा और तुम लोगों को तो उसी का बदला दिया जाएगा जो तुम लोग (दुनिया में) किया करते थे
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अनुवाद — यासीन 52

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सूरा आयत 52/83 — यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यासीन सुनें, यासीन अनुवाद, यासीन mp3, यासीन pdf. आयत 50–54. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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