अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لَا تُظْلَمُ: किसी पर ज़ुल्म नहीं किया जाएगा, अर्थात् उसके अधिकारों में कोई कमी नहीं की जाएगी।
- نَفْسٌ: कोई भी प्राणी (इंसान या जिन्न)।
- شَيْئًا: ज़रा सा भी, तनिक भी।
- تُجْزَوْنَ: तुम्हें बदला दिया जाएगा।
- إِلَّا مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ: सिवाय उसके जो तुम करते रहे, यानी तुम्हारे कर्मों का पूरा-पूरा बदला।
तफ़सीर (व्याख्या):
उस दिन अल्लाह तआला अपने बंदों के साथ पूर्ण न्याय करेगा। यह दिन इतना सटीक और निष्पक्ष होगा कि किसी भी आत्मा पर ज़रा भी ज़ुल्म नहीं होगा—न उसकी नेकियाँ घटाई जाएँगी, न उसकी बुराइयाँ बढ़ाई जाएँगी। हर इंसान को उसके किए हुए अमल का बिल्कुल सही और पूरा बदला मिलेगा। जिसने नेकी की होगी, उसे उसका पूरा इनाम मिलेगा, और जिसने गुनाह किया होगा, उसे उसकी सज़ा मिलेगी। यहाँ कोई सिफ़ारिश बेकार नहीं जाएगी, कोई रिश्तेदारी काम नहीं आएगी, और न ही कोई सांसारिक प्रभाव किसी के काम आएगा। केवल अल्लाह का न्याय होगा, जो बिल्कुल सटीक और अटल है।
यह आयत हमें बताती है कि दुनिया की ज़िंदगी एक इम्तिहान है। हम जो भी करते हैं, वह यहाँ दर्ज हो रहा है, और उस दिन हमें उसका सामना करना है। अल्लाह तआला किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि उसका न्याय पूर्ण और अद्भुत है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के अनुसार बनाएँ, नेक काम करें, बुराइयों से बचें, और याद रखें कि हमारा रब हमारे हर अमल को देख रहा है। यह आयत हमें उम्मीद भी देती है कि जो लोग नेकी करते हैं, उनकी मेहनत राई-राई बराबर भी ज़ाया नहीं होगी, और उन्हें उनका पूरा इनाम मिलेगा। साथ ही यह डर भी दिलाती है कि गुनाहगारों को उनके कर्मों का बुरा अंजाम भुगतना पड़ेगा। अतः हमें चाहिए कि हम अपने रब की रहमत और न्याय पर भरोसा रखें, और अपने कर्मों को सुधारें, क्योंकि आज का हर पल कल के हिसाब का सामान है।
📜 आयत 52-56 — सूरा यासीन
अनुवाद — यासीन 54
सूरा यासीन आयत 54 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर आज (क़यामत के दिन) किसी शख्स पर कुछ भी…सूरा आयत 54/83 — सूरा यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यासीन सुनें, सूरा यासीन अनुवाद, सूरा यासीन mp3, सूरा यासीन pdf. आयत 52–56. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 8, 2026
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