यासीन · 54/83
अनुवाद उच्चारण — यासीन
فَالْيَوْمَ لَا تُظْلَمُ نَفْسٌ شَيْئًا وَلَا تُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ۝٥٤
Fal-Yawma laa tuzlamu nafsun shai`anw-wa laa tujzawna illaa maa kuntum ta`maloon
📖 हिंदी अर्थ
फिर आज (क़यामत के दिन) किसी शख्स पर कुछ भी ज़ुल्म न होगा और तुम लोगों को तो उसी का बदला दिया जाएगा जो तुम लोग (दुनिया में) किया करते थे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لَا تُظْلَمُ: किसी पर ज़ुल्म नहीं किया जाएगा, अर्थात् उसके अधिकारों में कोई कमी नहीं की जाएगी।
  • نَفْسٌ: कोई भी प्राणी (इंसान या जिन्न)।
  • شَيْئًا: ज़रा सा भी, तनिक भी।
  • تُجْزَوْنَ: तुम्हें बदला दिया जाएगा।
  • إِلَّا مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ: सिवाय उसके जो तुम करते रहे, यानी तुम्हारे कर्मों का पूरा-पूरा बदला।

तफ़सीर (व्याख्या):

उस दिन अल्लाह तआला अपने बंदों के साथ पूर्ण न्याय करेगा। यह दिन इतना सटीक और निष्पक्ष होगा कि किसी भी आत्मा पर ज़रा भी ज़ुल्म नहीं होगा—न उसकी नेकियाँ घटाई जाएँगी, न उसकी बुराइयाँ बढ़ाई जाएँगी। हर इंसान को उसके किए हुए अमल का बिल्कुल सही और पूरा बदला मिलेगा। जिसने नेकी की होगी, उसे उसका पूरा इनाम मिलेगा, और जिसने गुनाह किया होगा, उसे उसकी सज़ा मिलेगी। यहाँ कोई सिफ़ारिश बेकार नहीं जाएगी, कोई रिश्तेदारी काम नहीं आएगी, और न ही कोई सांसारिक प्रभाव किसी के काम आएगा। केवल अल्लाह का न्याय होगा, जो बिल्कुल सटीक और अटल है।

यह आयत हमें बताती है कि दुनिया की ज़िंदगी एक इम्तिहान है। हम जो भी करते हैं, वह यहाँ दर्ज हो रहा है, और उस दिन हमें उसका सामना करना है। अल्लाह तआला किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि उसका न्याय पूर्ण और अद्भुत है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के अनुसार बनाएँ, नेक काम करें, बुराइयों से बचें, और याद रखें कि हमारा रब हमारे हर अमल को देख रहा है। यह आयत हमें उम्मीद भी देती है कि जो लोग नेकी करते हैं, उनकी मेहनत राई-राई बराबर भी ज़ाया नहीं होगी, और उन्हें उनका पूरा इनाम मिलेगा। साथ ही यह डर भी दिलाती है कि गुनाहगारों को उनके कर्मों का बुरा अंजाम भुगतना पड़ेगा। अतः हमें चाहिए कि हम अपने रब की रहमत और न्याय पर भरोसा रखें, और अपने कर्मों को सुधारें, क्योंकि आज का हर पल कल के हिसाब का सामान है।

🎧 सुनें

📜 आयत 52-56 — यासीन

52قَالُوا يَا وَيْلَنَا مَن بَعَثَنَا مِن مَّرْقَدِنَا ۜ ۗ هَٰذَا مَا وَعَدَ الرَّحْمَٰنُ وَصَدَقَ الْمُرْسَلُونَ
और (हैरान होकर) कहेगें हाए अफसोस हम तो पहले सो रहे थे हमें ख्वाबगाह से किसने उठाया (जवाब आएगा) कि ये वही (क़यामत का) दिन है जिसका खुदा ने (भी) वायदा किया था
53إِن كَانَتْ إِلَّا صَيْحَةً وَاحِدَةً فَإِذَا هُمْ جَمِيعٌ لَّدَيْنَا مُحْضَرُونَ
और पैग़म्बरों ने भी सच कहा था (क़यामत तो) बस एक सख्त चिंघाड़ होगी फिर एका एकी ये लोग सब के सब हमारे हुजूर में हाज़िर किए जाएँगे
54فَالْيَوْمَ لَا تُظْلَمُ نَفْسٌ شَيْئًا وَلَا تُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
फिर आज (क़यामत के दिन) किसी शख्स पर कुछ भी ज़ुल्म न होगा और तुम लोगों को तो उसी का बदला दिया जाएगा जो तुम लोग (दुनिया में) किया करते थे
55إِنَّ أَصْحَابَ الْجَنَّةِ الْيَوْمَ فِي شُغُلٍ فَاكِهُونَ
बेहश्त के रहने वाले आज (रोजे क़यामत) एक न एक मशग़ले में जी बहला रहे हैं
56هُمْ وَأَزْوَاجُهُمْ فِي ظِلَالٍ عَلَى الْأَرَائِكِ مُتَّكِئُونَ
वह अपनी बीवियों के साथ (ठन्डी) छाँव में तकिया लगाए तख्तों पर (चैन से) बैठे हुए हैं
यासीनकुरान सूची
83आयत
मक्कीRevelation
54आयत

अनुवाद — यासीन 54

सूरा यासीन आयत 54 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर आज (क़यामत के दिन) किसी शख्स पर कुछ भी…

सूरा आयत 54/83 — यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यासीन सुनें, यासीन अनुवाद, यासीन mp3, यासीन pdf. आयत 52–56. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए