यासीन · 62/83
अनुवाद उच्चारण — सूरा यासीन
وَلَقَدْ أَضَلَّ مِنكُمْ جِبِلًّا كَثِيرًا ۖ أَفَلَمْ تَكُونُوا تَعْقِلُونَ ۝٦٢
Wa laqad adalla minkum jibillan kaseeraa; afalam takoonoo ta`qiloon
📖 हिंदी अर्थ
और (बावजूद इसके) उसने तुममें से बहुतेरों को गुमराह कर छोड़ा तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • जिबिल्लन (جِبِلًّا): अर्थात सृष्टि, ख़िल्क़त, यानी बहुत सारे लोग।
  • अज़ल्ल (أَضَلَّ): गुमराह किया, पथभ्रष्ट किया।
  • अफ़लम तकूनू तअ़्क़िलून (أَفَلَمْ تَكُونُوا تَعْقِلُونَ): तो क्या तुम अक़्ल (बुद्धि) का इस्तेमाल नहीं करते?

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में उस दृश्य का वर्णन कर रहे हैं जो क़यामत के दिन होगा, जब नरक में डाले गए लोगों से पूछा जाएगा: "क्या मैंने तुम्हें आदेश नहीं दिया था कि शैतान की इबादत न करो, क्योंकि वह तुम्हारा खुला दुश्मन है?" फिर अल्लाह फ़रमाता है कि शैतान ने तुममें से बहुत सारे लोगों को गुमराह कर दिया। उसने तुम्हारी बड़ी तादाद को सीधे रास्ते से भटका दिया और अपने पीछे चलने पर मजबूर कर दिया।

अब अल्लाह उनसे फ़रमाता है: "क्या तुम अक़्ल नहीं रखते थे?" यानी क्या तुम्हारे पास वो बुद्धि और समझ नहीं थी जो तुम्हें शैतान की पैरवी से रोकती? क्या तुमने कभी सोचा कि जो रास्ता शैतान दिखा रहा है, उसका अंजाम क्या है? क्या तुमने अपने आस-पास की क़ौमों के हालात पर ग़ौर नहीं किया जो शैतान की पैरवी करके तबाह हो गईं?

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह ने इंसान को अक़्ल (बुद्धि) जैसी महान नेमत दी है, ताकि वह सही और ग़लत में फ़र्क कर सके। अक़्ल ही वो चीज़ है जो इंसान को शैतान के धोखे से बचाती है। जो लोग अपनी अक़्ल का इस्तेमाल नहीं करते, वही शैतान के जाल में फंसते हैं।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी अक़्ल का इस्तेमाल किस तरह कर रहे हैं। क्या हम उन लोगों में से हैं जो अल्लाह की नेमतों पर ग़ौर करते हैं और सीधे रास्ते पर चलते हैं, या हम उन लोगों में से हैं जो शैतान के पीछे चलकर अपनी अक़्ल को बेकार कर देते हैं?

अल्लाह तआला हमें अक़्ल इसलिए दी है ताकि हम उसकी निशानियों पर ग़ौर करें, उसके दीन को समझें और उसकी इबादत करें। शैतान की पैरवी करना अक़्ल का दुश्मन है, क्योंकि अक़्ल हमेशा भलाई की तरफ बुलाती है और शैतान बुराई की तरफ।

आओ हम अपनी अक़्ल को जगाएं, क़ुरआन और सुन्नत पर ग़ौर करें, और उस रास्ते पर चलें जो अल्लाह ने हमारे लिए चुना है। यही हमारी कामयाबी है, दुनिया में भी और आख़िरत में भी। अल्लाह हम सबको सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 60-64 — सूरा यासीन

60۞ أَلَمْ أَعْهَدْ إِلَيْكُمْ يَا بَنِي آدَمَ أَن لَّا تَعْبُدُوا الشَّيْطَانَ ۖ إِنَّهُ لَكُمْ عَدُوٌّ مُّبِينٌ
ऐ आदम की औलाद क्या मैंने तुम्हारे पास ये हुक्म नहीं भेजा था कि (ख़बरदार) शैतान की परसतिश न करना वह यक़ीनी तुम्हारा खुल्लम खुल्ला दुश्मन है
61وَأَنِ اعْبُدُونِي ۚ هَٰذَا صِرَاطٌ مُّسْتَقِيمٌ
और ये कि (देखो) सिर्फ मेरी इबादत करना यही (नजात की) सीधी राह है
62وَلَقَدْ أَضَلَّ مِنكُمْ جِبِلًّا كَثِيرًا ۖ أَفَلَمْ تَكُونُوا تَعْقِلُونَ
और (बावजूद इसके) उसने तुममें से बहुतेरों को गुमराह कर छोड़ा तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते थे
63هَٰذِهِ جَهَنَّمُ الَّتِي كُنتُمْ تُوعَدُونَ
ये वही जहन्नुम है जिसका तुमसे वायदा किया गया था
64اصْلَوْهَا الْيَوْمَ بِمَا كُنتُمْ تَكْفُرُونَ
तो अब चूँकि तुम कुफ्र करते थे इस वजह से आज इसमें (चुपके से) चले जाओ
यासीनकुरान सूची
83आयत
मक्कीअवतरण स्थान
62आयत

अनुवाद — यासीन 62

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Friday, October 2, 2026

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