Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- जिबिल्लन (جِبِلًّا): अर्थात सृष्टि, ख़िल्क़त, यानी बहुत सारे लोग।
- अज़ल्ल (أَضَلَّ): गुमराह किया, पथभ्रष्ट किया।
- अफ़लम तकूनू तअ़्क़िलून (أَفَلَمْ تَكُونُوا تَعْقِلُونَ): तो क्या तुम अक़्ल (बुद्धि) का इस्तेमाल नहीं करते?
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में उस दृश्य का वर्णन कर रहे हैं जो क़यामत के दिन होगा, जब नरक में डाले गए लोगों से पूछा जाएगा: "क्या मैंने तुम्हें आदेश नहीं दिया था कि शैतान की इबादत न करो, क्योंकि वह तुम्हारा खुला दुश्मन है?" फिर अल्लाह फ़रमाता है कि शैतान ने तुममें से बहुत सारे लोगों को गुमराह कर दिया। उसने तुम्हारी बड़ी तादाद को सीधे रास्ते से भटका दिया और अपने पीछे चलने पर मजबूर कर दिया।
अब अल्लाह उनसे फ़रमाता है: "क्या तुम अक़्ल नहीं रखते थे?" यानी क्या तुम्हारे पास वो बुद्धि और समझ नहीं थी जो तुम्हें शैतान की पैरवी से रोकती? क्या तुमने कभी सोचा कि जो रास्ता शैतान दिखा रहा है, उसका अंजाम क्या है? क्या तुमने अपने आस-पास की क़ौमों के हालात पर ग़ौर नहीं किया जो शैतान की पैरवी करके तबाह हो गईं?
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह ने इंसान को अक़्ल (बुद्धि) जैसी महान नेमत दी है, ताकि वह सही और ग़लत में फ़र्क कर सके। अक़्ल ही वो चीज़ है जो इंसान को शैतान के धोखे से बचाती है। जो लोग अपनी अक़्ल का इस्तेमाल नहीं करते, वही शैतान के जाल में फंसते हैं।
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी अक़्ल का इस्तेमाल किस तरह कर रहे हैं। क्या हम उन लोगों में से हैं जो अल्लाह की नेमतों पर ग़ौर करते हैं और सीधे रास्ते पर चलते हैं, या हम उन लोगों में से हैं जो शैतान के पीछे चलकर अपनी अक़्ल को बेकार कर देते हैं?
अल्लाह तआला हमें अक़्ल इसलिए दी है ताकि हम उसकी निशानियों पर ग़ौर करें, उसके दीन को समझें और उसकी इबादत करें। शैतान की पैरवी करना अक़्ल का दुश्मन है, क्योंकि अक़्ल हमेशा भलाई की तरफ बुलाती है और शैतान बुराई की तरफ।
आओ हम अपनी अक़्ल को जगाएं, क़ुरआन और सुन्नत पर ग़ौर करें, और उस रास्ते पर चलें जो अल्लाह ने हमारे लिए चुना है। यही हमारी कामयाबी है, दुनिया में भी और आख़िरत में भी। अल्लाह हम सबको सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 60-64 — सूरा यासीन
अनुवाद — यासीन 62
सूरा यासीन आयत 62 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (बावजूद इसके) उसने तुममें से बहुतेरों को गुमराह कर…सूरा आयत 62/83 — सूरा यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यासीन सुनें, सूरा यासीन अनुवाद, सूरा यासीन mp3, सूरा यासीन pdf. आयत 60–64. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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