अस-साफ्फात · 108/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِي الْآخِرِينَ ۝١٠٨
Wa taraknaa `alaihi fil aakhireen
📖 हिंदी अर्थ
और हमने उनका अच्छा चर्चा बाद को आने वालों में बाक़ी रखा है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَتَرَكْنَا: हमने छोड़ा / बाक़ी रखा
  • عَلَيْهِ: उन (इब्राहीम अलैहिस्सलाम) पर
  • فِي الْآخِرِينَ: पिछली उम्मतों में / बाद की पीढ़ियों में

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला अपने ख़लील (दोस्त) हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के उस अज़ीम इनाम का ज़िक्र फ़रमा रहे हैं, जो उन्होंने उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में अता किया। अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि हमने इब्राहीम अलैहिस्सलाम के लिए बाद की उम्मतों में एक अच्छा नाम, सच्ची तारीफ़ और पाकीज़ा ज़िक्र बाक़ी रखा। यानी जब भी उनका नाम लिया जाता है, तो उन्हें सलाम और दुआओं से याद किया जाता है। हर नमाज़ में, हर दुआ में, हर ज़िक्र में उनका नाम इज़्ज़त और अज़मत के साथ लिया जाता है। यह अल्लाह की तरफ़ से उनके लिए एक ऐसा सदक़ा-ए-जारिया है, जो क़यामत तक जारी रहेगा। यह उन लोगों के लिए बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी है, जो अल्लाह की राह में अपनी जान, माल और औलाद क़ुर्बान कर देते हैं — अल्लाह उनका नाम और ज़िक्र दुनिया में हमेशा के लिए रौशन कर देता है।

यह आयत हमें सिखाती है कि अच्छे अमल और अल्लाह की राह में क़ुर्बानी का नतीजा सिर्फ़ आख़िरत की कामयाबी ही नहीं, बल्कि दुनिया में भी अच्छा नाम और लोगों के दिलों में मुहब्बत है। जो लोग अल्लाह के लिए जीते हैं, अल्लाह उनके ज़िक्र को ज़िंदा रखता है। हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपने बाप, अपनी क़ौम और अपने बेटे तक को अल्लाह की राह में क़ुर्बान करने का हौसला दिखाया, तो अल्लाह ने उन्हें ऐसा मर्तबा दिया कि हर मुसलमान की ज़ुबान पर उनका नाम और दुरूद है। यही अल्लाह का क़ानून है — जो अल्लाह के लिए अपनी चीज़ें छोड़ देता है, अल्लाह उसे उससे बेहतर अता करता है। इस आयत से हमें सबक़ लेना चाहिए कि हम भी अपने अमल से, अपनी अच्छाई से और अपनी नेकियों से लोगों के दिलों में अच्छा नाम छोड़ने की कोशिश करें, ताकि हमारा ज़िक्र भी अच्छाई के साथ बाक़ी रहे।



📜 आयत 106-110 — सूरा अस-साफ्फात

106إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ الْبَلَاءُ الْمُبِينُ
इसमें शक नहीं कि ये यक़ीनी बड़ा सख्त और सरीही इम्तिहान था
107وَفَدَيْنَاهُ بِذِبْحٍ عَظِيمٍ
और हमने इस्माईल का फ़िदया एक ज़िबाहे अज़ीम (बड़ी कुर्बानी) क़रार दिया
108وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِي الْآخِرِينَ
और हमने उनका अच्छा चर्चा बाद को आने वालों में बाक़ी रखा है
109سَلَامٌ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ
कि (सारी खुदायी में) इबराहीम पर सलाम (ही सलाम) हैं
110كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ
हम यूँ नेकी करने वालों को जज़ाए ख़ैर देते हैं
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
108आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 108

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Saturday, October 3, 2026

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