अस-साफ्फात · 109/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
سَلَامٌ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ ۝١٠٩
Salaamun `alaaa Ibraaheem
📖 हिंदी अर्थ
कि (सारी खुदायी में) इबराहीम पर सलाम (ही सलाम) हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • سَلَامٌ: शांति, सुरक्षा, और हर प्रकार की बुराई से सलामती।
  • عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ: पैगंबर इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) पर।

तफसीर:

अल्लाह तआला ने अपने प्यारे नबी हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के सम्मान में यह घोषणा की कि उन पर सलाम हो, यानी उनके लिए हर प्रकार की शांति, सुरक्षा और बरकत हो। यह सलाम अल्लाह की ओर से उन्हें एक विशेष सम्मान और दर्जा प्रदान करता है। यहाँ "सलाम" का अर्थ है कि अल्लाह ने उन्हें हर आफत, हर नुकसान और हर बुराई से महफूज़ रखा, और उन्हें दुनिया और आखिरत दोनों में सलामती अता की।

हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) वह महान पैगंबर थे जिन्होंने अकेले तौहीद (एकेश्वरवाद) का झंडा बुलंद किया, बुतों को तोड़ा, और अल्लाह की राह में हर कुर्बानी दी। उनकी आज्ञाकारिता और समर्पण की वजह से अल्लाह ने उन्हें यह सम्मान दिया कि उनका जिक्र क़यामत तक के लिए सलामती के साथ जोड़ दिया गया।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की राह में सब्र, इखलास और कुर्बानी का नतीजा हमेशा बेहतरीन होता है। जो लोग अल्लाह के लिए अपनी जान, माल और वक़्त कुर्बान करते हैं, अल्लाह उन्हें दुनिया में भी इज्जत देता है और आखिरत में भी। हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की तरह हमें भी चाहिए कि अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत और उसके दीन की खिदमत में लगाएं, ताकि हम भी अल्लाह की रहमत और सलामती के हक़दार बनें।

यह सलाम सिर्फ एक दुआ नहीं, बल्कि अल्लाह की ओर से एक एलान है कि इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) हर उस इंसान के लिए एक आदर्श हैं जो अल्लाह की राह में चलना चाहता है। उनकी सीरत से हमें यह सबक मिलता है कि सच्चाई, ईमान और अल्लाह पर भरोसा ही असली कामयाबी की कुंजी है। आज भी दुनिया भर के मुसलमान उन्हें अपना पैगंबर मानते हैं और उनके नाम पर सलाम भेजते हैं, यह उनकी महानता की निशानी है।



📜 आयत 107-111 — सूरा अस-साफ्फात

107وَفَدَيْنَاهُ بِذِبْحٍ عَظِيمٍ
और हमने इस्माईल का फ़िदया एक ज़िबाहे अज़ीम (बड़ी कुर्बानी) क़रार दिया
108وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِي الْآخِرِينَ
और हमने उनका अच्छा चर्चा बाद को आने वालों में बाक़ी रखा है
109سَلَامٌ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ
कि (सारी खुदायी में) इबराहीम पर सलाम (ही सलाम) हैं
110كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ
हम यूँ नेकी करने वालों को जज़ाए ख़ैर देते हैं
111إِنَّهُ مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِينَ
बेशक इबराहीम हमारे (ख़ास) ईमानदार बन्दों में थे
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
109आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 109

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Saturday, October 3, 2026

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