अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَكَذَّبُوهُ: उन्होंने उसे (नबी एलियास को) झुठलाया।
- لَمُحْضَرُونَ: अवश्य ही उपस्थित किए जाने वाले हैं (यानी उन्हें अवश्य पकड़कर लाया जाएगा)।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला हमें नबी एलियास (अलैहिस्सलाम) की क़ौम की दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति से अवगत करा रहे हैं। उन्होंने अपनी क़ौम को अल्लाह की तौहीद (एकता) और सच्चे दीन की ओर बुलाया, उन्हें बुतों की पूजा से रोका, लेकिन उनकी क़ौम ने उनकी नबुव्वत को झुठला दिया और उनके साथ अत्यंत कठोरता और विद्वेष का व्यवहार किया। उन्होंने न केवल उनकी बात नहीं मानी, बल्कि उन्हें झुठलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
इस झुठलाने का परिणाम यह हुआ कि अल्लाह तआला ने उन्हें सज़ा का मुस्तहिक़ (हक़दार) बना दिया। "فَإِنَّهُمْ لَمُحْضَرُونَ" का अर्थ है कि वे सभी अवश्य ही उस दिन उपस्थित किए जाएंगे जब उन्हें हिसाब के लिए खड़ा किया जाएगा। वे अल्लाह की पकड़ से बच नहीं सकते, न कहीं भाग सकते हैं और न कोई उन्हें बचाने वाला होगा। यह उनके लिए चेतावनी है कि उनका अंत केवल इसी दुनिया तक सीमित नहीं है, बल्कि आख़िरत में उन्हें अपने किए का पूरा बदला भुगतना होगा।
हालाँकि, अल्लाह तआला की रहमत का दामन बहुत विस्तृत है। उन्हीं के साथ उन बंदों का ज़िक्र भी किया गया है जिन्होंने अल्लाह के दीन को अपनाया और अपने ईमान पर स्थिर रहे। वे अल्लाह के अज़ाब से महफ़ूज़ (सुरक्षित) रहेंगे और उन्हें नजात मिलेगी। यह हमारे लिए एक सबक़ है कि सच्चाई को झुठलाने वालों का अंजाम बहुत बुरा होता है, जबकि सच्चाई पर चलने वालों के लिए अल्लाह के पास बेहतरीन इनाम और सुरक्षा है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें गहरी सोच पर आमंत्रित करती है। जिस तरह एलियास (अलैहिस्सलाम) की क़ौम ने सच्चाई को झुठलाकर अपना अंजाम बिगाड़ लिया, उसी तरह आज भी जो लोग अल्लाह के रसूलों और उनके पैग़ाम को झुठलाते हैं, वे उसी रास्ते पर चल रहे हैं। लेकिन अल्लाह ने हम पर यह एहसान किया है कि हमें क़ुरआन और सुन्नत के ज़रिए सच्चाई मिली हुई है। हमें चाहिए कि हम इस नेमत की क़द्र करें, अपने ईमान को मज़बूत करें और उन लोगों की तरह न बनें जिन्होंने सच्चाई को सुनकर भी उसे झुठला दिया। याद रखें, अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन उसकी रहमत उनके लिए है जो उसकी ओर रुजू करें और अपने गुनाहों से तौबा करें। आइए, हम उन लोगों में से बनें जो अल्लाह के आगे सर झुकाते हैं, उसकी इबादत करते हैं और उसकी रहमत के उम्मीदवार होते हैं।
📜 आयत 125-129 — अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 127
सूरा अस-साफ्फात आयत 127 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो उसे लोगों ने झुठला दिया तो ये लोग यक़ीनन…सूरा आयत 127/182 — अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-साफ्फात सुनें, अस-साफ्फात अनुवाद, अस-साफ्फात mp3, अस-साफ्फात pdf. आयत 125–129. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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