अस-साफ्फात · 128/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
إِلَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ ۝١٢٨
Illaa `ibaadal laahil mukhlaseen
📖 हिंदी अर्थ
मगर खुदा के निरे खरे बन्दे महफूज़ रहेंगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • إِلَّا = सिवाय, के अलावा
  • عِبَادَ اللَّهِ = अल्लाह के बंदे
  • الْمُخْلَصِينَ = जिन्हें अल्लाह ने ख़ालिस (शुद्ध) कर दिया हो, यानी जिनका ईमान और अमल पूरी तरह से अल्लाह के लिए हो

तफ़सीर:

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि क़ौमे-इलियास (अलैहिस्सलाम) ने अपने नबी को झुठलाया और उनकी दावत को क़बूल नहीं किया, इसलिए उन सबको क़यामत के दिन हिसाब और अज़ाब के लिए ज़रूर जमा किया जाएगा। मगर अल्लाह की रहमत और कृपा से उसके वे बंदे इस अज़ाब से महफ़ूज़ (सुरक्षित) रहेंगे जिन्होंने अपने ईमान और इबादत को सिर्फ़ अल्लाह के लिए ख़ालिस कर लिया हो। यानी जिनका दिल, ज़ुबान और अमल सब कुछ अल्लाह की रज़ा के लिए हो, जो रिया (दिखावे) और शिर्क से पाक हो, वही लोग अल्लाह के अज़ाब से नजात पाने वाले हैं।

यह आयत हमें सिखाती है कि नजात (मुक्ति) का रास्ता सिर्फ़ इख़लास (शुद्ध नीयत) से होकर गुज़रता है। अल्लाह के करीब वे लोग होते हैं जो दिखावे से दूर रहकर सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा के लिए काम करते हैं। इसलिए हमें चाहिए कि अपनी नमाज़, रोज़ा, ज़कात और हर अच्छे काम को सिर्फ़ अल्लाह के लिए करें, ताकि हम भी उन मुख़लिस बंदों में शामिल हो सकें जिन्हें अल्लाह ने अपनी ख़ास रहमत के लिए चुन लिया है। याद रखें, अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए ख़ास है जो उसके सच्चे और मुख़लिस बंदे बन जाते हैं।



📜 आयत 126-130 — सूरा अस-साफ्फात

126اللَّهَ رَبَّكُمْ وَرَبَّ آبَائِكُمُ الْأَوَّلِينَ
और (जो) तुम्हारा परवरदिगार और तुम्हारे अगले बाप दादाओं का (भी) परवरदिगार है
127فَكَذَّبُوهُ فَإِنَّهُمْ لَمُحْضَرُونَ
तो उसे लोगों ने झुठला दिया तो ये लोग यक़ीनन (जहन्नुम) में गिरफ्तार किए जाएँगे
128إِلَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ
मगर खुदा के निरे खरे बन्दे महफूज़ रहेंगे
129وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِي الْآخِرِينَ
और हमने उनका ज़िक्र ख़ैर बाद को आने वालों में बाक़ी रखा
130سَلَامٌ عَلَىٰ إِلْ يَاسِينَ
कि (हर तरफ से) आले यासीन पर सलाम (ही सलाम) है
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
128आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 128

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Saturday, October 3, 2026

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