अस-साफ्फात · 180/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
سُبْحَانَ رَبِّكَ رَبِّ الْعِزَّةِ عَمَّا يَصِفُونَ ۝١٨٠
Subhaana Rabbika Rabbil `izzati `amma yasifoon
📖 हिंदी अर्थ
ये लोग जो बातें (खुदा के बारे में) बनाया करते हैं उनसे तुम्हारा परवरदिगार इज्ज़त का मालिक पाक साफ है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سُبْحَانَ: पाक-पवित्र है, हर दोष से मुक्त है।
  • رَبِّ الْعِزَّةِ: इज़्ज़त (प्रतिष्ठा, शक्ति और गौरव) का स्वामी।
  • عَمَّا يَصِفُونَ: उन बातों से जो (मुशरिकीन) गढ़ते और बयान करते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने पाक ज़ात की तारीफ़ और तंज़ीह (पवित्रता) बयान करते हुए फ़रमाता है कि तुम्हारा रब — जो इज़्ज़त और क़ुदरत का मालिक है — उन सब बातों से पाक और बरतर है जो मुशरिकीन उसके बारे में कहते हैं। वे लोग अल्लाह के लिए औलाद, साझीदार, और दूसरे झूठे गुणों का दावा करते हैं, जबकि अल्लाह इन सब से बिल्कुल पाक है।

यह आयत नबी करीम ﷺ को तसल्ली देती है कि जो लोग आपकी दावत का मज़ाक़ उड़ाते हैं और अल्लाह के बारे में बुरी बातें कहते हैं, उनकी बातों से अल्लाह की शान में कोई कमी नहीं आती। अल्लाह की इज़्ज़त और क़ुदरत उसकी ज़ात की सिफ़त है, और वह हर उस चीज़ से ऊपर है जो इंसान अपनी नाकिस (अधूरी) समझ से उसके बारे में सोचता है।

यहाँ "रब्बुल इज़्ज़त" का ज़िक्र इसलिए किया गया कि लोग समझ लें कि अल्लाह की इज़्ज़त को कोई चुनौती नहीं दे सकता। वह अपने दुश्मनों को ज़लील करने पर पूरी तरह क़ादिर है। मुशरिकीन की बातें सिर्फ़ उनकी अपनी जहालत हैं, अल्लाह की शान उन बातों से बहुत ऊपर है।

इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि जब हम अल्लाह के बारे में कोई बात करें, तो अदब और ताज़ीम (सम्मान) के साथ करें। अल्लाह की ज़ात, उसकी सिफ़ात और उसके कामों में कोई कमी या ऐब नहीं है। वह हर ऐब से पाक है। यही तौहीद का असल मफ़हूम है — अल्लाह को हर उस चीज़ से पाक मानना जो उसकी शान के लायक़ नहीं।

याद रखें, अल्लाह की इज़्ज़त और क़ुदरत का यह एलान हमारे दिलों में उसकी अज़मत का एहसास पैदा करता है और हमें उसकी इबादत में पूरा इख़लास (शुद्धता) लाने की तरग़ीब देता है। जो लोग अल्लाह के बारे में झूठी बातें कहते हैं, वे अल्लाह को कुछ नुक़सान नहीं पहुँचा सकते, बल्कि अपना ही नुक़सान करते हैं। अल्लाह हमें सच्ची समझ और सही अक़ीदा अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 178-182 — सूरा अस-साफ्फात

178وَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتَّىٰ حِينٍ
और उन लोगों से एक ख़ास वक्त तक मुँह फेरे रहो
179وَأَبْصِرْ فَسَوْفَ يُبْصِرُونَ
और देखते रहो ये लोग तो खुद अनक़रीब ही अपना अन्जाम देख लेगें
180سُبْحَانَ رَبِّكَ رَبِّ الْعِزَّةِ عَمَّا يَصِفُونَ
ये लोग जो बातें (खुदा के बारे में) बनाया करते हैं उनसे तुम्हारा परवरदिगार इज्ज़त का मालिक पाक साफ है
181وَسَلَامٌ عَلَى الْمُرْسَلِينَ
और पैग़म्बरों पर (दुरूद) सलाम हो
182وَالْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ
और कुल तारीफ खुदा ही के लिए सज़ावार हैं जो सारे जहाँन का पालने वाला है
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
180आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 180

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Saturday, October 3, 2026

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