अस-साफ्फात · 25/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
مَا لَكُمْ لَا تَنَاصَرُونَ ۝٢٥
Maa lakum laa tanaasaroon
📖 हिंदी अर्थ
(अरे कमबख्तों) अब तुम्हें क्या होगा कि एक दूसरे की मदद नहीं करते

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تَنَاصَرُونَ – एक-दूसरे की सहायता करना, परस्पर मदद करना।

तफ़सीर:

जब क़ियामत का दिन आएगा और सभी लोग अपने-अपने कर्मों के हिसाब के लिए खड़े होंगे, तो उन अत्याचारियों और काफ़िरों से डांट-फटकार के साथ कहा जाएगा: "तुम्हें क्या हो गया है कि तुम एक-दूसरे की मदद नहीं कर रहे हो?" यानी, आज तुम अपने उन साथियों, रिश्तेदारों, सरदारों और पूज्यों को क्यों नहीं पुकारते जिन पर तुम दुनिया में भरोसा करते थे? जब तुम दुनिया में थे, तो एक-दूसरे की सहायता करते थे, एक-दूसरे के काम आते थे, और अपने झूठे देवताओं (बुतों) से मदद की उम्मीद रखते थे। तुम कहते थे कि ये हमारे सिफ़ारिशी हैं और हमारी मदद करेंगे। आज वह दिन आ गया है जब सारे रिश्ते टूट चुके हैं, सारे सहारे नाकाम हो चुके हैं, और कोई किसी की मदद नहीं कर सकता।

यह पूछना वास्तव में उन्हें उनकी नाकामी और बेबसी का एहसास कराने के लिए है। आज न कोई दोस्त किसी दोस्त के काम आएगा, न कोई रिश्तेदार किसी रिश्तेदार को बचा सकेगा, न वे बुत और मूर्तियाँ जिन्हें वे दुनिया में पुकारते थे, उनके किसी काम आएँगी। यह उनके लिए सबसे बड़ी रुसवाई और शर्मिंदगी का क्षण होगा, जब वे देखेंगे कि जिन पर उन्होंने भरोसा किया था, वे सब आज उन्हें अकेला छोड़ चुके हैं।

यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी सीख है। यह हमें बताती है कि दुनिया में हम जिन चीज़ों और लोगों पर भरोसा करते हैं, वे सब आख़िरकार बेबस और नाकाम हैं। केवल अल्लाह ही है जो सच्चा मददगार है और जिसकी पकड़ से कोई बच नहीं सकता। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपना भरोसा केवल अल्लाह पर रखें, उसकी इबादत करें, उसके बताए रास्ते पर चलें, और उन चीज़ों से बचें जो हमें अल्लाह से दूर करती हैं। याद रखें, जो लोग दुनिया में अल्लाह की नाफ़रमानी करते हैं और उसके साथ किसी को शरीक करते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा होगा। लेकिन जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और नेक काम करते रहे, उनके लिए जन्नत की खुशियाँ हैं, जहाँ कोई ग़म, कोई डर और कोई अफ़सोस नहीं होगा। अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 23-27 — सूरा अस-साफ्फात

23مِن دُونِ اللَّهِ فَاهْدُوهُمْ إِلَىٰ صِرَاطِ الْجَحِيمِ
उनको (सबको) इकट्ठा करो फिर उन्हें जहन्नुम की राह दिखाओ
24وَقِفُوهُمْ ۖ إِنَّهُم مَّسْئُولُونَ
और (हाँ ज़रा) उन्हें ठहराओ तो उनसे कुछ पूछना है
25مَا لَكُمْ لَا تَنَاصَرُونَ
(अरे कमबख्तों) अब तुम्हें क्या होगा कि एक दूसरे की मदद नहीं करते
26بَلْ هُمُ الْيَوْمَ مُسْتَسْلِمُونَ
(जवाब क्या देंगे) बल्कि वह तो आज गर्दन झुकाए हुए हैं
27وَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ يَتَسَاءَلُونَ
और एक दूसरे की तरफ मुतावज्जे होकर बाहम पूछताछ करेंगे
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
25आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 25

सूरा अस-साफ्फात आयत 25 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (अरे कमबख्तों) अब तुम्हें क्या होगा कि एक दूसरे की…

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Saturday, October 3, 2026

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