अस-साफ्फात · 42/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
فَوَاكِهُ ۖ وَهُم مُّكْرَمُونَ ۝٤٢
Fa waakihu wa hum mukramoon
📖 हिंदी अर्थ
(और वह भी ऐसी वैसी नहीं) हर क़िस्म के मेवे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَوَاكِهُ: विभिन्न प्रकार के मीठे फल
  • مُكْرَمُونَ: सम्मानित किए गए, आदर-सम्मान से नवाज़े गए

तफ़सीर:

यह आयत उन मोमिनों के उस अद्भुत इनाम का वर्णन कर रही है जो अल्लाह तआला ने अपने नेक बंदों के लिए तैयार किया है। जन्नत में उनके लिए तरह-तरह के स्वादिष्ट फल होंगे — जैसे अंगूर, खजूर, अनार, केले और वे सारे फल जिन्हें वे चाहेंगे। ये फल इतने लज़ीज़ और बेहतरीन होंगे कि दुनिया के किसी भी फल से उनकी तुलना नहीं की जा सकती।

लेकिन इससे भी बढ़कर — और यही सबसे बड़ी नेमत है — वे मुकरमून होंगे, यानी अल्लाह की ओर से उन्हें विशेष सम्मान और इज़्ज़त प्राप्त होगी। उन्हें जन्नत के ऊँचे दर्जे दिए जाएँगे, और सबसे बड़ा सम्मान यह होगा कि वे अपने रब के दीदार (दर्शन) से नवाज़े जाएँगे। यह वह इज़्ज़त है जिसका कोई मुकाबला नहीं — यह अल्लाह की रहमत और करम का सर्वोच्च प्रकटीकरण है।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला अपने नेक बंदों को सिर्फ़ खाने-पीने की चीज़ें ही नहीं देगा, बल्कि उन्हें ऐसी इज़्ज़त और सम्मान से नवाज़ेगा जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। यह हमारे लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है कि हम अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढालें, उसकी इबादत करें और उसके रास्ते पर चलें — ताकि हम भी उन मुकरमीन में शामिल हो सकें जिन्हें अल्लाह की जन्नत और उसका दीदार नसीब होगा।

याद रखिए, यह दुनिया का जीवन बहुत छोटा है, लेकिन आख़िरत का जीवन हमेशा का है। जो लोग इस छोटी सी ज़िंदगी में अल्लाह की इबादत करते हैं और उसके हुक्मों का पालन करते हैं, उनके लिए वहाँ ऐसी नेमतें हैं जो कभी ख़त्म नहीं होंगी। अल्लाह हम सबको अपनी जन्नत और अपने दीदार से नवाज़े। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 40-44 — अस-साफ्फात

40إِلَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ
मगर खुदा के बरगुजीदा बन्दे
41أُولَٰئِكَ لَهُمْ رِزْقٌ مَّعْلُومٌ
उनके वास्ते (बेहिश्त में) एक मुक़र्रर रोज़ी होगी
42فَوَاكِهُ ۖ وَهُم مُّكْرَمُونَ
(और वह भी ऐसी वैसी नहीं) हर क़िस्म के मेवे
43فِي جَنَّاتِ النَّعِيمِ
और वह लोग बड़ी इज्ज़त से नेअमत के (लदे हुए)
44عَلَىٰ سُرُرٍ مُّتَقَابِلِينَ
बाग़ों में तख्तों पर (चैन से) आमने सामने बैठे होगे
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अनुवाद — अस-साफ्फात 42

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Tuesday, August 18, 2026

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