अस-साफ्फात · 44/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
عَلَىٰ سُرُرٍ مُّتَقَابِلِينَ ۝٤٤
Alaa sururim mutaqaa bileen
📖 हिंदी अर्थ
बाग़ों में तख्तों पर (चैन से) आमने सामने बैठे होगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سُرُرٍ (सुरुरिन): शानदार तख्त (सिंहासन), जिन पर बैठना और लेटना आरामदायक हो।
  • مُتَقَابِلِينَ (मुतक़ाबिलीन): एक-दूसरे के सामने (आमने-सामने)।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत जन्नत के उन लोगों की शान और इज़्ज़त का वर्णन कर रही है जिन्हें अल्लाह तआला ने अपनी रहमत से नवाज़ा है। वे लोग जन्नत में शानदार तख्तों (सुनहरे और जवाहरात से सजे हुए सिंहासनों) पर इस तरह बैठे होंगे कि एक-दूसरे के आमने-सामने होंगे। यह उनके आपसी प्रेम, भाईचारे और सम्मान की निशानी है कि वे एक-दूसरे के चेहरे देख सकेंगे, एक-दूसरे से बातें कर सकेंगे, और उनके दिलों में कोई कड़वाहट या ईर्ष्या नहीं होगी।

यहाँ "मुतक़ाबिलीन" (आमने-सामने) होने का जो वर्णन है, उसका एक और पहलू यह भी है कि उनके तख्त इस तरह घूमने वाले होंगे कि वे कभी एक-दूसरे की पीठ की तरफ नहीं होंगे, बल्कि हमेशा एक-दूसरे के सामने ही रहेंगे। यह उनके आपसी मुहब्बत और इज़्ज़त की सबसे बड़ी दलील है।

यह दृश्य हमें बताता है कि जन्नत में सिर्फ़ आराम और ऐशो-आराम ही नहीं, बल्कि अच्छे लोगों की संगत और उनके साथ बैठने की खुशी भी है। जब एक मोमिन अपने भाई मोमिन के चेहरे को देखेगा, तो उसे ऐसी खुशी होगी जो दुनिया की किसी भी खुशी से बढ़कर होगी।

दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें जन्नत की उस ज़िंदगी की तरफ रग़बत दिलाती है जहाँ दिल साफ़ होंगे, नफ़रतें नहीं होंगी, और लोग एक-दूसरे से मुहब्बत और इज़्ज़त के साथ मिलेंगे। अगर हम चाहते हैं कि हमें भी यह नेमत मिले, तो हमें दुनिया में भी अपने दिलों को साफ़ रखना होगा, लोगों से मुहब्बत करनी होगी, और अल्लाह की इबादत पर क़ायम रहना होगा। याद रखिए, जन्नत की यह खुशी उन्हीं के लिए है जो दुनिया में अल्लाह के हुक्मों पर चले और लोगों के साथ भलाई की। आइए, हम अपने अमल को सुधारें ताकि अल्लाह हमें भी उन मुक़र्रबीन बंदों में शामिल करे जो इन सुरुरों (तख्तों) पर आमने-सामने बैठकर एक-दूसरे से मुहब्बत भरी बातें करेंगे।



📜 आयत 42-46 — सूरा अस-साफ्फात

42فَوَاكِهُ ۖ وَهُم مُّكْرَمُونَ
(और वह भी ऐसी वैसी नहीं) हर क़िस्म के मेवे
43فِي جَنَّاتِ النَّعِيمِ
और वह लोग बड़ी इज्ज़त से नेअमत के (लदे हुए)
44عَلَىٰ سُرُرٍ مُّتَقَابِلِينَ
बाग़ों में तख्तों पर (चैन से) आमने सामने बैठे होगे
45يُطَافُ عَلَيْهِم بِكَأْسٍ مِّن مَّعِينٍ
उनमें साफ सफेद बुर्राक़ शराब के जाम का दौर चल रहा होगा
46بَيْضَاءَ لَذَّةٍ لِّلشَّارِبِينَ
जो पीने वालों को बड़ा मज़ा देगी
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
44आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 44

सूरा अस-साफ्फात आयत 44 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बाग़ों में तख्तों पर (चैन से) आमने सामने बैठे होगे

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Friday, October 2, 2026

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