साद · 21/88
अनुवाद उच्चारण — साद
۞ وَهَلْ أَتَاكَ نَبَأُ الْخَصْمِ إِذْ تَسَوَّرُوا الْمِحْرَابَ ۝٢١
Wa hal ataaka naba`ul khasm; iz tasawwarul mihraab
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) क्या तुम तक उन दावेदारों की भी ख़बर पहुँची है कि जब वह हुजरे (इबादत) की दीवार फाँद पडे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْخَصْمِ: झगड़ा करने वाले, विवादी।
  • تَسَوَّرُوا: दीवार फांद कर चढ़ गए, ऊपर चढ़ गए।
  • الْمِحْرَابَ: इबादत की जगह, वह कक्ष या स्थान जहाँ दाऊद (अलैहिस्सलाम) इबादत करते थे।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! क्या तुम्हें उन झगड़ा करने वालों की खबर पहुँची है, जो दाऊद (अलैहिस्सलाम) की इबादतगाह में दीवार फांद कर उनके पास आए थे? ये दो फ़रिश्ते थे जो एक झगड़े के सिलसिले में इंसानी शक्ल में आए थे। उन्होंने अचानक इस तरह प्रवेश किया कि दाऊद (अलैहिस्सलाम) उन्हें देख कर घबरा गए। यह एक अज़ीम परीक्षा का दृश्य था, जिसमें अल्लाह ने अपने नबी को एक ऐसी स्थिति में डाला जिससे उनके धैर्य, न्याय और अल्लाह के प्रति समर्पण का इम्तिहान हुआ।

यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि अल्लाह के नबी भी इंसान थे और उन पर भी मुश्किल हालात आते थे, लेकिन उन्होंने हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखा और न्याय व सच्चाई का रास्ता अपनाया। जब दाऊद (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें देखा तो डर गए, लेकिन उन्होंने तुरंत अल्लाह की तरफ रुजू किया और मामले को सुलझाने का इरादा किया। यह हमारे लिए सबक है कि मुश्किल घड़ी में अल्लाह की याद और उसकी मदद ही असली सहारा है।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह अपने बंदों की परीक्षा लेता है, चाहे वो नबी हों या आम इंसान। परीक्षा में सब्र, न्याय और अल्लाह की रहमत का सहारा लेना चाहिए। यह क़िस्सा हमारे दिलों में यह उम्मीद पैदा करता है कि अगर हम अल्लाह पर भरोसा करें और सच्चाई पर क़ायम रहें, तो अल्लाह हमें हर मुश्किल से निकालने का रास्ता दिखाता है। इसलिए हमें चाहिए कि अपनी ज़िंदगी के हर मामले में अल्लाह की इबादत और उसके दीन की पैरवी को सबसे आगे रखें, क्योंकि यही कामयाबी की कुंजी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 19-23 — साद

19وَالطَّيْرَ مَحْشُورَةً ۖ كُلٌّ لَّهُ أَوَّابٌ
और परिन्दे भी (यादे खुदा के वक्त सिमट) आते और उनके फरमाबरदार थे
20وَشَدَدْنَا مُلْكَهُ وَآتَيْنَاهُ الْحِكْمَةَ وَفَصْلَ الْخِطَابِ
और हमने उनकी सल्तनत को मज़बूत कर दिया और हमने उनको हिकमत और बहस के फैसले की कूवत अता फरमायी थी
21۞ وَهَلْ أَتَاكَ نَبَأُ الْخَصْمِ إِذْ تَسَوَّرُوا الْمِحْرَابَ
(ऐ रसूल) क्या तुम तक उन दावेदारों की भी ख़बर पहुँची है कि जब वह हुजरे (इबादत) की दीवार फाँद पडे
22إِذْ دَخَلُوا عَلَىٰ دَاوُودَ فَفَزِعَ مِنْهُمْ ۖ قَالُوا لَا تَخَفْ ۖ خَصْمَانِ بَغَىٰ بَعْضُنَا عَلَىٰ بَعْضٍ فَاحْكُم بَيْنَنَا بِالْحَقِّ وَلَا تُشْطِطْ وَاهْدِنَا إِلَىٰ سَوَاءِ الصِّرَاطِ
(और) जब दाऊद के पास आ खड़े हुए तो वह उनसे डर गए उन लोगों ने कहा कि आप डरें नहीं (हम दोनों) एक मुक़द्दमें के फ़रीकैन हैं कि हम में से एक ने दूसरे पर ज्यादती की है तो आप हमारे दरमियान ठीक-ठीक फैसला कर दीजिए और इन्साफ से ने गुज़रिये और हमें सीधी राह दिखा दीजिए
23إِنَّ هَٰذَا أَخِي لَهُ تِسْعٌ وَتِسْعُونَ نَعْجَةً وَلِيَ نَعْجَةٌ وَاحِدَةٌ فَقَالَ أَكْفِلْنِيهَا وَعَزَّنِي فِي الْخِطَابِ
(मुराद ये हैं कि) ये (शख्स) मेरा भाई है और उसके पास निनान्नवे दुम्बियाँ हैं और मेरे पास सिर्फ एक दुम्बी है उस पर भी ये मुझसे कहता है कि ये दुम्बी भी मुझी को दे दें और बातचीत में मुझ पर सख्ती करता है
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अनुवाद — साद 21

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Tuesday, August 18, 2026

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