साद · 42/88
अनुवाद उच्चारण — साद
ارْكُضْ بِرِجْلِكَ ۖ هَٰذَا مُغْتَسَلٌ بَارِدٌ وَشَرَابٌ ۝٤٢
Urkud birijlika haaza mughtasalum baaridunw wa sharaab
📖 हिंदी अर्थ
तो हमने कहा कि अपने पाँव से (ज़मीन को) ठुकरा दो और चश्मा निकाला तो हमने कहा (ऐ अय्यूब) तुम्हारे नहाने और पीने के वास्ते ये ठन्डा पानी (हाज़िर) है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ارْكُضْ: अपने पैर से (ज़मीन) को ठोको / मारो।
  • مُغْتَسَلٌ: नहाने की जगह या नहाने का पानी।
  • شَرَابٌ: पीने की चीज़ (पेय)।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब अल्लाह ने अपने नबी अय्यूब (अलैहिस्सलाम) को उनकी बीमारी और कठिन परीक्षा से निजात देनी चाही, तो उन्हें आदेश दिया गया: "अपने पैर से ज़मीन को ठोको।" जैसे ही उन्होंने ऐसा किया, वहाँ से एक ठंडा पानी का सोता फूट पड़ा। अल्लाह ने फ़रमाया: "यह नहाने की जगह है और पीने का पानी है।" यानी इस पानी से नहाओ और पियो, ताकि तुम्हारा हर दर्द और तकलीफ़ दूर हो जाए। यह अल्लाह की रहमत का एक करिश्मा था कि उसी पानी के ज़रिए अय्यूब (अलैहिस्सलाम) को शिफ़ा (شفاء) अता हुई, उनकी बीमारी दूर हुई और वे पूरी तरह तंदुरुस्त हो गए।

दावती पहलू:

यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि अल्लाह की रहमत कभी भी और किसी भी तरह से आ सकती है। जब इंसान मुसीबत में होता है, तो उसे अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और उसकी हर आज्ञा का पालन करना चाहिए, चाहे वह आज्ञा कितनी भी अनोखी या साधारण क्यों न लगे। अय्यूब (अलैहिस्सलाम) ने जैसे ही अल्लाह का हुक्म माना, उनकी हर तकलीफ़ दूर हो गई। यह हमारे लिए एक सबक़ है कि अल्लाह की बताई हुई राह पर चलने में ही हमारी भलाई है। अल्लाह हर मुसीबत के साथ राहत भी रखता है, बशर्ते हम सब्र करें और उसकी ओर रुजू करें। यह क़िस्सा हमें यह भी बताता है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता, और हर परीक्षा के बाद वह उन्हें बेहतर इनाम देता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 40-44 — साद

40وَإِنَّ لَهُ عِندَنَا لَزُلْفَىٰ وَحُسْنَ مَآبٍ
और इसमें शक नहीं कि सुलेमान की हमारी बारगाह में कुर्ब व मज़ेलत और उमदा जगह है
41وَاذْكُرْ عَبْدَنَا أَيُّوبَ إِذْ نَادَىٰ رَبَّهُ أَنِّي مَسَّنِيَ الشَّيْطَانُ بِنُصْبٍ وَعَذَابٍ
और (ऐ रसूल) हमारे (ख़ास) बन्दे अय्यूब को याद करो जब उन्होंने अपने परवरगिार से फरियाद की कि मुझको शैतान ने बहुत अज़ीयत और तकलीफ पहुँचा रखी है
42ارْكُضْ بِرِجْلِكَ ۖ هَٰذَا مُغْتَسَلٌ بَارِدٌ وَشَرَابٌ
तो हमने कहा कि अपने पाँव से (ज़मीन को) ठुकरा दो और चश्मा निकाला तो हमने कहा (ऐ अय्यूब) तुम्हारे नहाने और पीने के वास्ते ये ठन्डा पानी (हाज़िर) है
43وَوَهَبْنَا لَهُ أَهْلَهُ وَمِثْلَهُم مَّعَهُمْ رَحْمَةً مِّنَّا وَذِكْرَىٰ لِأُولِي الْأَلْبَابِ
और हमने उनको और उनके लड़के वाले और उनके साथ उतने ही और अपनी ख़ास मेहरबानी से अता किए
44وَخُذْ بِيَدِكَ ضِغْثًا فَاضْرِب بِّهِ وَلَا تَحْنَثْ ۗ إِنَّا وَجَدْنَاهُ صَابِرًا ۚ نِّعْمَ الْعَبْدُ ۖ إِنَّهُ أَوَّابٌ
और अक्लमंदों के लिए इबरत व नसीहत (क़रार दी) और हमने कहा ऐ अय्यूब तुम अपने हाथ से सींको का मट्ठा लो (और उससे अपनी बीवी को) मारो अपनी क़सम में झूठे न बनो हमने कहा अय्यूब को यक़ीनन साबिर पाया वह क्या अच्छे बन्दे थे
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अनुवाद — साद 42

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Tuesday, August 18, 2026

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