अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَا حَسْرَتَا: अफसोस! पछतावा! (विलाप और दुःख का उद्गार)
- فَرَّطْتُ: मैंने कसर छोड़ी, कोताही की, उपेक्षा की
- فِي جَنبِ اللَّهِ: अल्लाह के मामले में, अल्लाह की आज्ञा और उसके हक़ में
- السَّاخِرِينَ: मज़ाक उड़ाने वाले, उपहास करने वाले
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने बंदों को नसीहत करता है कि वे उसकी ओर रुजू करें, उसकी आज्ञा का पालन करें और उसकी ओर तौबा करें, ताकि क़यामत के दिन कोई नफ़्स (आत्मा) यह कहने की स्थिति में न पहुँचे कि: "हाय मेरा अफसोस! हाय मेरी हानि!" उस चीज़ पर जो उसने अल्लाह के हक़ में कोताही की — यानी उसने दुनिया में अल्लाह की इबादत और उसकी आज्ञा का पालन करने में जो कसर छोड़ी, उस पर पछतावा करते हुए वह कहेगी: "मैं तो उन लोगों में से थी जो अल्लाह के दीन, उसकी किताब, उसके रसूल और ईमानवालों का मज़ाक उड़ाते थे।"
यह आयत उस हालत का वर्णन है जो क़यामत के दिन पछतावे और नदामत की सख्त घड़ी में होगी। उस दिन हर इंसान अपनी उन कमियों और गुनाहों को याद करेगा जो उसने दुनिया में किए होंगे, और वह अफसोस करेगा कि काश उसने अल्लाह की इबादत की होती, उसके हुक्म को माना होता और उसके दीन का मज़ाक न उड़ाया होता।
लेकिन याद रखिए — यह पछतावा उस दिन किसी काम नहीं आएगा। आज दुनिया में हमारे पास मौका है कि हम अल्लाह की ओर लौटें, अपने गुनाहों से तौबा करें और अपने रब की इबादत में अपनी ज़िंदगी बिताएँ। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान और क्षमाशील है — वह अपने बंदों की तौबा कबूल करता है और उनके गुनाह माफ कर देता है।
प्यारे भाइयो और बहनो! आज ही का दिन है तौबा करने का, आज ही का दिन है अल्लाह की ओर रुजू करने का। कल जब पछतावे का दिन आएगा, तो माफी का दरवाज़ा बंद हो चुका होगा। अल्लाह हम सबको अपनी इबादत की तौफ़ीक़ दे और हमें उन लोगों में से न बनाए जो उसके दीन का मज़ाक उड़ाते हैं। आमीन।
📜 आयत 54-58 — अज़-ज़ुमर
अनुवाद — अज़-ज़ुमर 56
सूरा अज़-ज़ुमर आयत 56 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (कहीं ऐसा न हो कि) (तुममें से) कोई शख्स कहने…सूरा आयत 56/75 — अज़-ज़ुमर الزمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुमर सुनें, अज़-ज़ुमर अनुवाद, अज़-ज़ुमर mp3, अज़-ज़ुमर pdf. आयत 54–58. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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