अज़-ज़ुमर · 56/75
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुमर
أَن تَقُولَ نَفْسٌ يَا حَسْرَتَا عَلَىٰ مَا فَرَّطتُ فِي جَنبِ اللَّهِ وَإِن كُنتُ لَمِنَ السَّاخِرِينَ ۝٥٦
An taqoola nafsuny yaahasrataa `alaa maa farrattu fee jambil laahi wa in kuntu laminas saakhireen
📖 हिंदी अर्थ
(कहीं ऐसा न हो कि) (तुममें से) कोई शख्स कहने लगे कि हाए अफ़सोस मेरी इस कोताही पर जो मैने ख़ुदा (की बारगाह) का तक़र्रुब हासिल करने में की और मैं तो बस उन बातों पर हँसता ही रहा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَا حَسْرَتَا: अफसोस! पछतावा! (विलाप और दुःख का उद्गार)
  • فَرَّطْتُ: मैंने कसर छोड़ी, कोताही की, उपेक्षा की
  • فِي جَنبِ اللَّهِ: अल्लाह के मामले में, अल्लाह की आज्ञा और उसके हक़ में
  • السَّاخِرِينَ: मज़ाक उड़ाने वाले, उपहास करने वाले

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने बंदों को नसीहत करता है कि वे उसकी ओर रुजू करें, उसकी आज्ञा का पालन करें और उसकी ओर तौबा करें, ताकि क़यामत के दिन कोई नफ़्स (आत्मा) यह कहने की स्थिति में न पहुँचे कि: "हाय मेरा अफसोस! हाय मेरी हानि!" उस चीज़ पर जो उसने अल्लाह के हक़ में कोताही की — यानी उसने दुनिया में अल्लाह की इबादत और उसकी आज्ञा का पालन करने में जो कसर छोड़ी, उस पर पछतावा करते हुए वह कहेगी: "मैं तो उन लोगों में से थी जो अल्लाह के दीन, उसकी किताब, उसके रसूल और ईमानवालों का मज़ाक उड़ाते थे।"

यह आयत उस हालत का वर्णन है जो क़यामत के दिन पछतावे और नदामत की सख्त घड़ी में होगी। उस दिन हर इंसान अपनी उन कमियों और गुनाहों को याद करेगा जो उसने दुनिया में किए होंगे, और वह अफसोस करेगा कि काश उसने अल्लाह की इबादत की होती, उसके हुक्म को माना होता और उसके दीन का मज़ाक न उड़ाया होता।

लेकिन याद रखिए — यह पछतावा उस दिन किसी काम नहीं आएगा। आज दुनिया में हमारे पास मौका है कि हम अल्लाह की ओर लौटें, अपने गुनाहों से तौबा करें और अपने रब की इबादत में अपनी ज़िंदगी बिताएँ। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान और क्षमाशील है — वह अपने बंदों की तौबा कबूल करता है और उनके गुनाह माफ कर देता है।

प्यारे भाइयो और बहनो! आज ही का दिन है तौबा करने का, आज ही का दिन है अल्लाह की ओर रुजू करने का। कल जब पछतावे का दिन आएगा, तो माफी का दरवाज़ा बंद हो चुका होगा। अल्लाह हम सबको अपनी इबादत की तौफ़ीक़ दे और हमें उन लोगों में से न बनाए जो उसके दीन का मज़ाक उड़ाते हैं। आमीन।



📜 आयत 54-58 — अज़-ज़ुमर

54وَأَنِيبُوا إِلَىٰ رَبِّكُمْ وَأَسْلِمُوا لَهُ مِن قَبْلِ أَن يَأْتِيَكُمُ الْعَذَابُ ثُمَّ لَا تُنصَرُونَ
और अपने परवरदिगार की तरफ रूजू करो और उसी के फरमाबरदार बन जाओ (मगर) उस वक्त क़े क़ब्ल ही कि तुम पर जब अज़ाब आ नाज़िल हो (और) फिर तुम्हारी मदद न की जा सके
55وَاتَّبِعُوا أَحْسَنَ مَا أُنزِلَ إِلَيْكُم مِّن رَّبِّكُم مِّن قَبْلِ أَن يَأْتِيَكُمُ الْعَذَابُ بَغْتَةً وَأَنتُمْ لَا تَشْعُرُونَ
और जो जो अच्छी बातें तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम पर नाज़िल हई हैं उन पर चलो (मगर) उसके क़ब्ल कि तुम पर एक बारगी अज़ाब नाज़िल हो और तुमको उसकी ख़बर भी न हो
56أَن تَقُولَ نَفْسٌ يَا حَسْرَتَا عَلَىٰ مَا فَرَّطتُ فِي جَنبِ اللَّهِ وَإِن كُنتُ لَمِنَ السَّاخِرِينَ
(कहीं ऐसा न हो कि) (तुममें से) कोई शख्स कहने लगे कि हाए अफ़सोस मेरी इस कोताही पर जो मैने ख़ुदा (की बारगाह) का तक़र्रुब हासिल करने में की और मैं तो बस उन बातों पर हँसता ही रहा
57أَوْ تَقُولَ لَوْ أَنَّ اللَّهَ هَدَانِي لَكُنتُ مِنَ الْمُتَّقِينَ
या ये कहने लगे कि अगर ख़ुदा मेरी हिदायत करता तो मैं ज़रूर परहेज़गारों में से होता
58أَوْ تَقُولَ حِينَ تَرَى الْعَذَابَ لَوْ أَنَّ لِي كَرَّةً فَأَكُونَ مِنَ الْمُحْسِنِينَ
या जब अज़ाब को (आते) देखें तो कहने लगे कि काश मुझे (दुनिया में) फिर दोबारा जाना मिले तो मैं नेकी कारों में हो जाऊँ
अज़-ज़ुमरकुरान सूची
75आयत
मक्कीRevelation
56आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुमर 56

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सूरा आयत 56/75 — अज़-ज़ुमर الزمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुमर सुनें, अज़-ज़ुमर अनुवाद, अज़-ज़ुमर mp3, अज़-ज़ुमर pdf. आयत 54–58. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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