अन-निसा · 122/176
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-निसा
وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ سَنُدْخِلُهُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا أَبَدًا ۖ وَعْدَ اللَّهِ حَقًّا ۚ وَمَنْ أَصْدَقُ مِنَ اللَّهِ قِيلًا ۝١٢٢
Wallazeena aamanoo wa `amilus saalihaati sanud khiluhum Jannaatin tajree min tahtihal anhaaru khaalideena feehaaa abadaa; wa`dal laahi haqqaa; wa man asdaqu minal laahi qeelaa
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए उन्हें हम अनक़रीब ही (बेहिश्त के) उन (हरे भरे) बाग़ों में जा पहुंचाएगें जिनके (दरख्तों के) नीचे नहरें जारी होंगी और ये लोग उसमें हमेशा आबादुल आबाद तक रहेंगे (ये उनसे) ख़ुदा का पक्का वायदा है और ख़ुदा से ज्यादा (अपनी) बात में सच्चा कौन होगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • آمَنُوا: ईमान लाए, सच्चे दिल से विश्वास किया।
  • الصَّالِحَاتِ: अच्छे और नेक कार्य, जो अल्लाह को पसंद हों।
  • جَنَّاتٍ: बाग़, स्वर्ग के उद्यान।
  • تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ: जिनके नीचे नहरें बहती हों।
  • خَالِدِينَ: हमेशा रहने वाले।
  • وَعْدَ اللَّهِ حَقًّا: अल्लाह का वादा, जो सत्य और अटल है।
  • أَصْدَقُ: सबसे अधिक सच्चा।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के लिए खुशखबरी लाती है जो सच्चे दिल से अल्लाह पर ईमान लाए और अपने ईमान के साथ अच्छे कर्म भी जोड़े। ऐसे लोगों के लिए अल्लाह ने वादा किया है कि वह उन्हें ऐसे बाग़ों में दाखिल करेगा जिनके नीचे नहरें बहती हैं। ये बाग़ इतने खूबसूरत और भव्य हैं कि उनकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। इन बाग़ों में वे हमेशा हमेशा के लिए रहेंगे — कोई अंत नहीं, कोई मृत्यु नहीं, कोई दर्द नहीं। यह कोई खोखला वादा नहीं, बल्कि अल्लाह का पक्का और सत्य वादा है, जो कभी टूटता नहीं। अल्लाह ने जो कहा, उसे पूरा करके ही रहेगा। और फिर अल्लाह खुद पूछता है: "अल्लाह से बढ़कर सच्ची बात कहने वाला और कौन हो सकता है?" यानी अल्लाह की बात से बढ़कर सच्ची और भरोसेमंद कोई बात नहीं। उसका वादा अटल है, और उस पर भरोसा करना ही सच्ची ईमानदारी है।


फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. ईमान और अमल का मिलन: यह आयत सिखाती है कि सिर्फ ज़ुबान से ईमान काफी नहीं, बल्कि ईमान के साथ अच्छे कर्म भी ज़रूरी हैं। दोनों मिलकर ही इंसान को जन्नत तक पहुँचाते हैं।
  2. अल्लाह का वादा अटल: जब अल्लाह किसी बात का वादा करता है, तो वह पूरी होकर रहती है। इससे मुसलमान के दिल में अल्लाह पर भरोसा और उम्मीद पैदा होती है।
  3. जन्नत की असली खुशी: जन्नत सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि हमेशा की खुशी और सुकून का ठिकाना है। यहाँ की कोई भी खुशी पल भर की है, लेकिन जन्नत की खुशी कभी खत्म नहीं होती।
  4. अल्लाह की सच्चाई: अल्लाह से बढ़कर सच्चा कोई नहीं। उसकी हर बात सच है, उसका हर वादा पक्का है। इसलिए हमें उसकी बातों पर पूरा यकीन करना चाहिए और उसके हुक्मों पर चलना चाहिए।
  5. अच्छे कर्मों की तरफ रग़बत: यह आयत इंसान को अच्छे काम करने की तरफ उत्साहित करती है, क्योंकि हर अच्छा काम उसे जन्नत के करीब ले जाता है।


📜 आयत 120-124 — सूरा अन-निसा

120يَعِدُهُمْ وَيُمَنِّيهِمْ ۖ وَمَا يَعِدُهُمُ الشَّيْطَانُ إِلَّا غُرُورًا
शैतान उनसे अच्छे अच्छे वायदे भी करता है (और बड़ी बड़ी) उम्मीदें भी दिलाता है और शैतान उनसे जो कुछ वायदे भी करता है वह बस निरा धोखा (ही धोखा) है
121أُولَٰئِكَ مَأْوَاهُمْ جَهَنَّمُ وَلَا يَجِدُونَ عَنْهَا مَحِيصًا
यही तो वह लोग हैं जिनका ठिकाना बस जहन्नुम है और वहॉ से भागने की जगह भी न पाएंगे
122وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ سَنُدْخِلُهُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا أَبَدًا ۖ وَعْدَ اللَّهِ حَقًّا ۚ وَمَنْ أَصْدَقُ مِنَ اللَّهِ قِيلًا
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए उन्हें हम अनक़रीब ही (बेहिश्त के) उन (हरे भरे) बाग़ों में जा पहुंचाएगें जिनके (दरख्तों के) नीचे नहरें जारी होंगी और ये लोग उसमें हमेशा आबादुल आबाद तक रहेंगे (ये उनसे) ख़ुदा का पक्का वायदा है और ख़ुदा से ज्यादा (अपनी) बात में सच्चा कौन होगा
123لَّيْسَ بِأَمَانِيِّكُمْ وَلَا أَمَانِيِّ أَهْلِ الْكِتَابِ ۗ مَن يَعْمَلْ سُوءًا يُجْزَ بِهِ وَلَا يَجِدْ لَهُ مِن دُونِ اللَّهِ وَلِيًّا وَلَا نَصِيرًا
न तुम लोगों की आरज़ू से (कुछ काम चल सकता है) न अहले किताब की तमन्ना से कुछ हासिल हो सकता है बल्कि (जैसा काम वैसा दाम) जो बुरा काम करेगा उसे उसका बदला दिया जाएगा और फिर ख़ुदा के सिवा किसी को न तो अपना सरपरस्त पाएगा और न मददगार
124وَمَن يَعْمَلْ مِنَ الصَّالِحَاتِ مِن ذَكَرٍ أَوْ أُنثَىٰ وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَأُولَٰئِكَ يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ وَلَا يُظْلَمُونَ نَقِيرًا
और जो शख्स अच्छे अच्छे काम करेगा (ख्वाह) मर्द हो या औरत और ईमानदार (भी) हो तो ऐसे लोग बेहिश्त में (बेखटके) जा पहुंचेंगे और उनपर तिल भी ज़ुल्म न किया जाएगा
अन-निसाकुरान सूची
176आयत
मदनीअवतरण स्थान
122आयत

अनुवाद — अन-निसा 122

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Thursday, October 1, 2026

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