अन-निसा · 121/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
أُولَٰئِكَ مَأْوَاهُمْ جَهَنَّمُ وَلَا يَجِدُونَ عَنْهَا مَحِيصًا ۝١٢١
Ulaaa`ika maawaahum Jahannamu wa laa yajidoona `anhaa maheesaa
📖 हिंदी अर्थ
यही तो वह लोग हैं जिनका ठिकाना बस जहन्नुम है और वहॉ से भागने की जगह भी न पाएंगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَأْوَاهُمْ: उनका ठिकाना, निवास स्थान
  • مَحِيصًا: भागने की जगह, बचने का रास्ता, पलायन का स्थान

तफ़सीर (व्याख्या):

ये वे लोग हैं जिन्होंने शैतान के क़दमों पर चलकर उसके बहकावे में आकर अल्लाह की अवज्ञा की और उसके आदेशों को ठुकराया। उनका अंतिम ठिकाना और स्थायी निवास जहन्नम (नरक) की आग है। वे उस आग से बचने के लिए कोई रास्ता नहीं पाएँगे, न कोई भागने का मार्ग होगा और न ही कोई शरण स्थल जहाँ वे छिप सकें। वे जहन्नम में हमेशा के लिए रहेंगे और उससे निकलने का कोई उपाय उनके पास नहीं होगा। यह उनके कर्मों का परिणाम है, क्योंकि उन्होंने दुनिया में अल्लाह के मार्गदर्शन को अस्वीकार किया और शैतान की सुन ली।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि हर व्यक्ति अपने कर्मों का फल पाएगा। जो लोग शैतान का अनुसरण करते हैं, उनका अंजाम नरक है, और इससे बचने का कोई रास्ता नहीं होगा।
  2. यह हमें सचेत करती है कि दुनिया में हमें अपने मार्ग का चुनाव बहुत सोच-समझकर करना चाहिए। शैतान के बहकावे में आकर अल्लाह के आदेशों की अवहेलना करना विनाश का कारण बनता है।
  3. यह आयत अल्लाह की रहमत की ओर भी इशारा करती है कि उसने हमें चेतावनी दी है ताकि हम सही रास्ता अपनाएँ और जहन्नम से बचें। अल्लाह अपने बंदों पर दयालु है, इसलिए उसने क़ुरआन में इन चेतावनियों को उतारा।
  4. यह हमें यह भी सिखाती है कि इस्लाम में आशा और भय का संतुलन है। जिस तरह अल्लाह की रहमत की ख़बर दी गई है, उसी तरह उसकी पकड़ से डराया भी गया है, ताकि इंसान दोनों के बीच संतुलन बनाए रखे।
🎧 सुनें

📜 आयत 119-123 — अन-निसा

119وَلَأُضِلَّنَّهُمْ وَلَأُمَنِّيَنَّهُمْ وَلَآمُرَنَّهُمْ فَلَيُبَتِّكُنَّ آذَانَ الْأَنْعَامِ وَلَآمُرَنَّهُمْ فَلَيُغَيِّرُنَّ خَلْقَ اللَّهِ ۚ وَمَن يَتَّخِذِ الشَّيْطَانَ وَلِيًّا مِّن دُونِ اللَّهِ فَقَدْ خَسِرَ خُسْرَانًا مُّبِينًا
और फिर उन्हें ज़रूर गुमराह करूंगा और उन्हें बड़ी बड़ी उम्मीदें भी ज़रूर दिलाऊंगा और यक़ीनन उन्हें सिखा दूंगा फिर वो (बुतों के वास्ते) जानवरों के काम ज़रूर चीर फाड़ करेंगे और अलबत्ता उनसे कह दूंगा बस फिर वो (मेरी तालीम के मुवाफ़िक़) ख़ुदा की बनाई हुई सूरत को ज़रूर बदल डालेंगे और (ये याद रहे कि) जिसने ख़ुदा को छोड़कर शैतान को अपना सरपरस्त बनाया तो उसने खुल्लम खुल्ला सख्त घाटा उठाया
120يَعِدُهُمْ وَيُمَنِّيهِمْ ۖ وَمَا يَعِدُهُمُ الشَّيْطَانُ إِلَّا غُرُورًا
शैतान उनसे अच्छे अच्छे वायदे भी करता है (और बड़ी बड़ी) उम्मीदें भी दिलाता है और शैतान उनसे जो कुछ वायदे भी करता है वह बस निरा धोखा (ही धोखा) है
121أُولَٰئِكَ مَأْوَاهُمْ جَهَنَّمُ وَلَا يَجِدُونَ عَنْهَا مَحِيصًا
यही तो वह लोग हैं जिनका ठिकाना बस जहन्नुम है और वहॉ से भागने की जगह भी न पाएंगे
122وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ سَنُدْخِلُهُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا أَبَدًا ۖ وَعْدَ اللَّهِ حَقًّا ۚ وَمَنْ أَصْدَقُ مِنَ اللَّهِ قِيلًا
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए उन्हें हम अनक़रीब ही (बेहिश्त के) उन (हरे भरे) बाग़ों में जा पहुंचाएगें जिनके (दरख्तों के) नीचे नहरें जारी होंगी और ये लोग उसमें हमेशा आबादुल आबाद तक रहेंगे (ये उनसे) ख़ुदा का पक्का वायदा है और ख़ुदा से ज्यादा (अपनी) बात में सच्चा कौन होगा
123لَّيْسَ بِأَمَانِيِّكُمْ وَلَا أَمَانِيِّ أَهْلِ الْكِتَابِ ۗ مَن يَعْمَلْ سُوءًا يُجْزَ بِهِ وَلَا يَجِدْ لَهُ مِن دُونِ اللَّهِ وَلِيًّا وَلَا نَصِيرًا
न तुम लोगों की आरज़ू से (कुछ काम चल सकता है) न अहले किताब की तमन्ना से कुछ हासिल हो सकता है बल्कि (जैसा काम वैसा दाम) जो बुरा काम करेगा उसे उसका बदला दिया जाएगा और फिर ख़ुदा के सिवा किसी को न तो अपना सरपरस्त पाएगा और न मददगार
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अनुवाद — अन-निसा 121

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Tuesday, August 18, 2026

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