Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تُبْدُوا: प्रकट करना, ज़ाहिर करना
- خَيْرًا: भलाई, अच्छा काम
- تُخْفُوهُ: उसे छिपाना, गुप्त रखना
- تَعْفُوا: क्षमा करना, दरगुज़र करना
- سُوءٍ: बुराई, किसी की तरफ से पहुँची हुई तकलीफ़ या ज़ुल्म
- عَفُوًّا: बहुत क्षमा करने वाला
- قَدِيرًا: पूर्ण शक्ति वाला
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में अपने बंदों को नेकी और भलाई के कामों की तरफ रहनुमाई करते हैं और उन्हें सिखाते हैं कि भलाई को चाहे तुम ज़ाहिर करो या छिपाकर करो, दोनों ही सूरतों में वह अल्लाह के यहाँ क़बूल है। अल्लाह तआला उस भलाई को देखता और जानता है, चाहे वह ज़ाहिर हो या पोशीदा। इसी तरह जब कोई व्यक्ति तुम्हारे साथ बुराई करे या तुम्हें तकलीफ़ पहुँचाए, तो तुम्हारे पास दो रास्ते हैं: या तो तुम उससे बदला लो (जो कि जायज़ है), या फिर उसे माफ़ कर दो और दरगुज़र करो। अल्लाह तआला ने यहाँ माफ़ी और दरगुज़र को बेहतर बताया है और इसी की तरफ रहनुमाई की है।
अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि जब तुम भलाई ज़ाहिर करते हो या उसे छिपाते हो, या फिर किसी की बुराई को माफ़ कर देते हो, तो याद रखो कि अल्लाह तआला ख़ुद "अफ़ुव्वुन क़दीर" है — यानी वह बहुत क्षमा करने वाला है और पूर्ण शक्ति रखता है। वह अपने बंदों के गुनाहों को माफ़ करता है, जबकि उसे उन्हें पकड़ने की पूरी ताक़त हासिल है। वह चाहे तो सज़ा दे, लेकिन अपनी रहमत और करम से माफ़ कर देता है।
इस आयत में अल्लाह तआला हमें सिखा रहे हैं कि जिस तरह अल्लाह अपने बंदों के साथ माफ़ी और दरगुज़र का मामला करता है, उसी तरह हमें भी अपने भाइयों के साथ माफ़ी और दरगुज़र का मामला करना चाहिए। यही अख़लाक़ (शिष्टाचार) की बुलंदी है और यही इस्लाम की तालीम है। जो व्यक्ति माफ़ करता है, अल्लाह उसे बेहतर बदला देता है और उसके दर्जे बुलंद करता है।
याद रखिए, माफ़ी कमज़ोरी की निशानी नहीं है, बल्कि यह दिल की सच्ची ताक़त और अल्लाह की रज़ा का ज़रिया है। अल्लाह तआला अपने बंदों से मुहब्बत करता है और उन्हें माफ़ी और दरगुज़र की तालीम देता है, ताकि उनके दिल साफ़ रहें और समाज में मुहब्बत और भाईचारा क़ायम रहे। जब हम माफ़ करते हैं, तो हम अल्लाह के करीब होते हैं और उसकी रहमत के हक़दार बनते हैं।
📜 आयत 147-151 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 149
सूरा अन-निसा आयत 149 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अगर खुल्लम खुल्ला नेकी करते हो या छिपा कर या…सूरा आयत 149/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 147–151. हिंदी अर्थ: اردو.
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Monday, September 28, 2026
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