अन-निसा · 173/176
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-निसा
فَأَمَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ فَيُوَفِّيهِمْ أُجُورَهُمْ وَيَزِيدُهُم مِّن فَضْلِهِ ۖ وَأَمَّا الَّذِينَ اسْتَنكَفُوا وَاسْتَكْبَرُوا فَيُعَذِّبُهُمْ عَذَابًا أَلِيمًا وَلَا يَجِدُونَ لَهُم مِّن دُونِ اللَّهِ وَلِيًّا وَلَا نَصِيرًا ۝١٧٣
Fa ammal lazeena aamanoo wa `amilus saalihaati fa yuwaffeehim ujoorahum wa yazeeduhum min fadlihee wa ammal lazeenas tankafoo wastakbaroo fa yu`azzibuhum `azaaban aleemanw wa laa yajidoona lahum min doonil laahi waliyyanw wa laa naseeraa
📖 हिंदी अर्थ
पस जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया है और अच्छे (अच्छे) काम किए हैं उनका उन्हें सवाब पूरा पूरा भर देगा बल्कि अपने फ़ज़ल (व करम) से कुछ और ज्यादा ही देगा और लोग उसका बन्दा होने से इन्कार करते थे और शेख़ी करते थे उन्हें तो दर्दनाक अज़ाब में मुब्तिला करेगा और लुत्फ़ ये है कि वह लोग ख़ुदा के सिवा न अपना सरपरस्त ही पाएंगे और न मददगार

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اسْتَنكَفُوا – अभिमान के कारण इनकार किया, झिझकते हुए मना किया।
  • اسْتَكْبَرُوا – घमंड किया, खुद को बड़ा समझा और आज्ञा मानने से इनकार किया।
  • أَلِيمًا – दर्दनाक, बहुत तकलीफ़ देने वाला।
  • وَلِيًّا – मददगार, संरक्षक, जो भलाई पहुँचाए।
  • نَصِيرًا – सहायक, जो बुराई को टाल सके।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में दो समूहों का स्पष्ट और न्यायपूर्ण फैसला सुना रहा है, ताकि हर इंसान अपना रास्ता खुद चुन सके।

पहला समूह: वे लोग जो सच्चे दिल से अल्लाह पर ईमान लाए, उसके रसूलों की पुष्टि की, और अपने अमल को सिर्फ अल्लाह की रज़ा के लिए किया — उन्होंने अपने जीवन को अल्लाह की बताई हुई शरीयत के अनुसार ढाला। ऐसे लोगों के लिए अल्लाह का वादा है कि वह उन्हें उनके अमल का पूरा-पूरा बदला देगा, कोई कमी नहीं करेगा। और यही नहीं, बल्कि वह अपने फज़ल (कृपा) से उन्हें और अधिक देगा — ऐसा अतिरिक्त इनाम जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती; जो आँखों ने नहीं देखा, कानों ने नहीं सुना, और किसी इंसान के दिल में ख्याल भी नहीं आया। यह अल्लाह की असीम दया और उदारता है, जो वह अपने नेक बंदों पर करता है।

दूसरा समूह: वे लोग जिन्होंने अल्लाह की इबादत से इनकार किया, अभिमान और घमंड के कारण उसके आगे झुकना पसंद नहीं किया। उन्होंने अपने आपको बड़ा समझा और अल्लाह की आज्ञा मानने से मुँह मोड़ा। ऐसे लोगों के लिए अल्लाह ने दर्दनाक अज़ाब तैयार किया है। उस दिन उन्हें कोई मददगार नहीं मिलेगा, कोई संरक्षक नहीं होगा जो उन्हें अल्लाह की पकड़ से बचा सके, और न ही कोई सहायक होगा जो उनकी तरफ से सिफारिश कर सके या उन पर से अज़ाब टाल सके। अल्लाह के सिवा कोई भी उन्हें राहत नहीं दे सकता।

दृष्टिकोण (पाठ):

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का न्याय पूर्ण है — जो अच्छा करेगा उसे अच्छा मिलेगा, और जो बुराई करेगा उसे बुराई का सामना करना पड़ेगा। यह हमारे लिए एक बड़ा अवसर है कि हम अपने जीवन को ईमान और अच्छे कर्मों से सजाएँ। अल्लाह की रहमत इतनी विशाल है कि वह न केवल हमारे अमल का बदला देगा, बल्कि अपनी ओर से और भी अधिक देगा। आइए, हम अभिमान और घमंड से बचें, और अल्लाह के आगे झुककर उसकी रहमत के हकदार बनें। यही सफलता का रास्ता है — दुनिया में भी और आख़िरत में भी।



📜 आयत 171-175 — सूरा अन-निसा

171يَا أَهْلَ الْكِتَابِ لَا تَغْلُوا فِي دِينِكُمْ وَلَا تَقُولُوا عَلَى اللَّهِ إِلَّا الْحَقَّ ۚ إِنَّمَا الْمَسِيحُ عِيسَى ابْنُ مَرْيَمَ رَسُولُ اللَّهِ وَكَلِمَتُهُ أَلْقَاهَا إِلَىٰ مَرْيَمَ وَرُوحٌ مِّنْهُ ۖ فَآمِنُوا بِاللَّهِ وَرُسُلِهِ ۖ وَلَا تَقُولُوا ثَلَاثَةٌ ۚ انتَهُوا خَيْرًا لَّكُمْ ۚ إِنَّمَا اللَّهُ إِلَٰهٌ وَاحِدٌ ۖ سُبْحَانَهُ أَن يَكُونَ لَهُ وَلَدٌ ۘ لَّهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۗ وَكَفَىٰ بِاللَّهِ وَكِيلًا
ऐ अहले किताब अपने दीन में हद (एतदाल) से तजावुज़ न करो और ख़ुदा की शान में सच के सिवा (कोई दूसरी बात) न कहो मरियम के बेटे ईसा मसीह (न ख़ुदा थे न ख़ुदा के बेटे) पस ख़ुदा के एक रसूल और उसके कलमे (हुक्म) थे जिसे ख़ुदा ने मरियम के पास भेज दिया था (कि हामला हो जा) और ख़ुदा की तरफ़ से एक जान थे पस ख़ुदा और उसके रसूलों पर ईमान लाओ और तीन (ख़ुदा) के क़ायल न बनो (तसलीस से) बाज़ रहो (और) अपनी भलाई (तौहीद) का क़सद करो अल्लाह तो बस यकता माबूद है वह उस (नुक्स) से पाक व पाकीज़ा है उसका कोई लड़का हो (उसे लड़के की हाजत ही क्या है) जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सब तो उसी का है और ख़ुदा तो कारसाज़ी में काफ़ी है
172لَّن يَسْتَنكِفَ الْمَسِيحُ أَن يَكُونَ عَبْدًا لِّلَّهِ وَلَا الْمَلَائِكَةُ الْمُقَرَّبُونَ ۚ وَمَن يَسْتَنكِفْ عَنْ عِبَادَتِهِ وَيَسْتَكْبِرْ فَسَيَحْشُرُهُمْ إِلَيْهِ جَمِيعًا
न तो मसीह ही ख़ुदा का बन्दा होने से हरगिज़ इन्कार कर सकते हैं और न (ख़ुदा के) मुक़र्रर फ़रिश्ते और (याद रहे) जो शख्स उसके बन्दा होने से इन्कार करेगा और शेख़ी करेगा तो अनक़रीब ही ख़ुदा उन सबको अपनी तरफ़ उठा लेगा (और हर एक को उसके काम की सज़ा देगा)
173فَأَمَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ فَيُوَفِّيهِمْ أُجُورَهُمْ وَيَزِيدُهُم مِّن فَضْلِهِ ۖ وَأَمَّا الَّذِينَ اسْتَنكَفُوا وَاسْتَكْبَرُوا فَيُعَذِّبُهُمْ عَذَابًا أَلِيمًا وَلَا يَجِدُونَ لَهُم مِّن دُونِ اللَّهِ وَلِيًّا وَلَا نَصِيرًا
पस जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया है और अच्छे (अच्छे) काम किए हैं उनका उन्हें सवाब पूरा पूरा भर देगा बल्कि अपने फ़ज़ल (व करम) से कुछ और ज्यादा ही देगा और लोग उसका बन्दा होने से इन्कार करते थे और शेख़ी करते थे उन्हें तो दर्दनाक अज़ाब में मुब्तिला करेगा और लुत्फ़ ये है कि वह लोग ख़ुदा के सिवा न अपना सरपरस्त ही पाएंगे और न मददगार
174يَا أَيُّهَا النَّاسُ قَدْ جَاءَكُم بُرْهَانٌ مِّن رَّبِّكُمْ وَأَنزَلْنَا إِلَيْكُمْ نُورًا مُّبِينًا
ऐ लोगों इसमें तो शक ही नहीं कि तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से (दीने हक़ की) दलील आ चुकी और हम तुम्हारे पास एक चमकता हुआ नूर नाज़िल कर चुके हैं
175فَأَمَّا الَّذِينَ آمَنُوا بِاللَّهِ وَاعْتَصَمُوا بِهِ فَسَيُدْخِلُهُمْ فِي رَحْمَةٍ مِّنْهُ وَفَضْلٍ وَيَهْدِيهِمْ إِلَيْهِ صِرَاطًا مُّسْتَقِيمًا
पस जो लोग ख़ुदा पर ईमान लाए और उसी से लगे लिपटे रहे तो ख़ुदा भी उन्हें अनक़रीब ही अपनी रहमत व फ़ज़ल के सादाब बाग़ो में पहुंचा देगा और उन्हे अपने हुज़ूरी का सीधा रास्ता दिखा देगा 175
अन-निसाकुरान सूची
176आयत
मदनीअवतरण स्थान
173आयत

अनुवाद — अन-निसा 173

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Thursday, October 1, 2026

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