अन-निसा · 2/176
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-निसा
وَآتُوا الْيَتَامَىٰ أَمْوَالَهُمْ ۖ وَلَا تَتَبَدَّلُوا الْخَبِيثَ بِالطَّيِّبِ ۖ وَلَا تَأْكُلُوا أَمْوَالَهُمْ إِلَىٰ أَمْوَالِكُمْ ۚ إِنَّهُ كَانَ حُوبًا كَبِيرًا ۝٢
Wa aatul yataamaaa amwaalahum wa laa tatabad dalul khabeesa bittaiyibi wa laa taakulooo amwaalahum ilaaa amwaalikum; innahoo kaana hooban kabeeraa
📖 हिंदी अर्थ
और यतीमों को उनके माल दे दो और बुरी चीज़ (माले हराम) को भली चीज़ (माले हलाल) के बदले में न लो और उनके माल अपने मालों में मिलाकर न चख जाओ क्योंकि ये बहुत बड़ा गुनाह है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • यतामा: वे बच्चे जिनके पिता का देहांत हो चुका हो और जो अभी बालिग़ (वयस्क) न हुए हों।
  • ख़बीस: वह माल जो हराम हो, या निकृष्ट और घटिया चीज़।
  • तैय्यिब: हलाल और पाक-साफ़ माल, या उत्तम और अच्छी चीज़।
  • हूब: बड़ा गुनाह और भारी पाप।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में उन अभिभावकों और सरपरस्तों को निर्देश दे रहा है जो यतीम बच्चों के माल की देखभाल के ज़िम्मेदार हैं। फ़रमाया जा रहा है कि जब यतीम बच्चे बालिग़ हो जाएँ और उनमें अपने माल की हिफ़ाज़त की समझ और क्षमता पैदा हो जाए, तो उनका पूरा माल उन्हें सौंप दो। इसमें कोई कमी, देरी या बहानेबाज़ी नहीं होनी चाहिए।

इसके बाद अल्लाह तआला ने एक बहुत ही गंभीर ग़लती की ओर इशारा किया जो उस ज़माने में आम थी। कुछ लोग यतीमों के अच्छे और कीमती माल को अपने पास रख लेते थे और उसके बदले में अपना घटिया और निकृष्ट माल उन्हें दे देते थे। अल्लाह तआला फ़रमा रहा है कि ऐसा मत करो। यतीम का अच्छा माल तुम्हारे लिए हराम है, और तुम्हारा अपना माल तुम्हारे लिए हलाल है। इसलिए हलाल को छोड़कर हराम की तरफ़ मत जाओ। यह बड़ी नाइंसाफ़ी और धोखा है।

एक और बुराई जो लोग करते थे, वह यह थी कि वे यतीमों के माल को अपने माल में मिला लेते थे और फिर बहाना बनाते थे कि यह सब हमारा ही माल है। अल्लाह तआला ने इससे भी रोका और फ़रमाया कि यतीमों के माल को अपने माल के साथ मिलाकर मत खाओ। यह बहुत बड़ा गुनाह है।

इस आयत के अंत में अल्लाह तआला ने सख़्त तनबीह (चेतावनी) दी कि जो व्यक्ति यतीमों का माल नाहक़ खाता है, वह बहुत बड़ा पाप करता है। यह गुनाह अल्लाह के यहाँ बहुत भारी है।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि इस्लाम ने कितनी शिद्दत (सख़्ती) के साथ कमज़ोर और बेसहारा लोगों के हक़ की रक्षा की है। यतीम वह बच्चा होता है जिसके पिता का साया उसके सिर से उठ गया हो। अल्लाह तआला ने उसके माल को उसका हक़ क़रार दिया है और उसे छीनने वालों को सख़्त अज़ाब की धमकी दी है। यह इस्लाम की उस तस्वीर को दिखाता है जहाँ हर इंसान का हक़, चाहे वह कितना ही कमज़ोर क्यों न हो, पूरी तरह से सुरक्षित है। अगर हम सच्चे मुसलमान हैं, तो हमें यतीमों की देखभाल करनी चाहिए, उनके माल की हिफ़ाज़त करनी चाहिए और उन्हें पूरा-पूरा हक़ देना चाहिए। याद रखें, यतीम की परवरिश करने वाले का जन्नत में रसूलुल्लाह ﷺ के साथ होना वादा किया गया है। आइए, हम इस नेक काम को अपनाएँ और अल्लाह की नाराज़गी से बचें।



📜 आयत 1-4 — सूरा अन-निसा

1يَا أَيُّهَا النَّاسُ اتَّقُوا رَبَّكُمُ الَّذِي خَلَقَكُم مِّن نَّفْسٍ وَاحِدَةٍ وَخَلَقَ مِنْهَا زَوْجَهَا وَبَثَّ مِنْهُمَا رِجَالًا كَثِيرًا وَنِسَاءً ۚ وَاتَّقُوا اللَّهَ الَّذِي تَسَاءَلُونَ بِهِ وَالْأَرْحَامَ ۚ إِنَّ اللَّهَ كَانَ عَلَيْكُمْ رَقِيبًا
ऐ लोगों अपने पालने वाले से डरो जिसने तुम सबको (सिर्फ) एक शख्स से पैदा किया और (वह इस तरह कि पहले) उनकी बाकी मिट्टी से उनकी बीवी (हव्वा) को पैदा किया और (सिर्फ़) उन्हीं दो (मियॉ बीवी) से बहुत से मर्द और औरतें दुनिया में फैला दिये और उस ख़ुदा से डरो जिसके वसीले से आपस में एक दूसरे से सवाल करते हो और क़तए रहम से भी डरो बेशक ख़ुदा तुम्हारी देखभाल करने वाला है
2وَآتُوا الْيَتَامَىٰ أَمْوَالَهُمْ ۖ وَلَا تَتَبَدَّلُوا الْخَبِيثَ بِالطَّيِّبِ ۖ وَلَا تَأْكُلُوا أَمْوَالَهُمْ إِلَىٰ أَمْوَالِكُمْ ۚ إِنَّهُ كَانَ حُوبًا كَبِيرًا
और यतीमों को उनके माल दे दो और बुरी चीज़ (माले हराम) को भली चीज़ (माले हलाल) के बदले में न लो और उनके माल अपने मालों में मिलाकर न चख जाओ क्योंकि ये बहुत बड़ा गुनाह है
3وَإِنْ خِفْتُمْ أَلَّا تُقْسِطُوا فِي الْيَتَامَىٰ فَانكِحُوا مَا طَابَ لَكُم مِّنَ النِّسَاءِ مَثْنَىٰ وَثُلَاثَ وَرُبَاعَ ۖ فَإِنْ خِفْتُمْ أَلَّا تَعْدِلُوا فَوَاحِدَةً أَوْ مَا مَلَكَتْ أَيْمَانُكُمْ ۚ ذَٰلِكَ أَدْنَىٰ أَلَّا تَعُولُوا
और अगर तुमको अन्देशा हो कि (निकाह करके) तुम यतीम लड़कियों (की रखरखाव) में इन्साफ न कर सकोगे तो और औरतों में अपनी मर्ज़ी के मवाफ़िक दो दो और तीन तीन और चार चार निकाह करो (फिर अगर तुम्हें इसका) अन्देशा हो कि (मुततइद) बीवियों में (भी) इन्साफ न कर सकोगे तो एक ही पर इक्तेफ़ा करो या जो (लोंडी) तुम्हारी ज़र ख़रीद हो (उसी पर क़नाअत करो) ये तदबीर बेइन्साफ़ी न करने की बहुत क़रीने क़यास है
4وَآتُوا النِّسَاءَ صَدُقَاتِهِنَّ نِحْلَةً ۚ فَإِن طِبْنَ لَكُمْ عَن شَيْءٍ مِّنْهُ نَفْسًا فَكُلُوهُ هَنِيئًا مَّرِيئًا
और औरतों को उनके महर ख़ुशी ख़ुशी दे डालो फिर अगर वह ख़ुशी ख़ुशी तुम्हें कुछ छोड़ दे तो शौक़ से नौशे जान खाओ पियो
अन-निसाकुरान सूची
176आयत
मदनीअवतरण स्थान
2आयत

अनुवाद — अन-निसा 2

सूरा अन-निसा आयत 2 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और यतीमों को उनके माल दे दो और बुरी चीज़…

सूरा आयत 2/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 1–4. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Monday, September 28, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए