अन-निसा · 33/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
وَلِكُلٍّ جَعَلْنَا مَوَالِيَ مِمَّا تَرَكَ الْوَالِدَانِ وَالْأَقْرَبُونَ ۚ وَالَّذِينَ عَقَدَتْ أَيْمَانُكُمْ فَآتُوهُمْ نَصِيبَهُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ كَانَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدًا ۝٣٣
Wa likullin ja`alnaa ma waaliya mimmaa tarakal waalidaani wal aqraboon; wallazeena `aqadat aimaanukum fa aatoohum naseebahum; innal laaha kaana `alaa kulli shai`in Shaheedaa
📖 हिंदी अर्थ
और मां बाप (या) और क़राबतदार (ग़रज़) तो शख्स जो तरका छोड़ जाए हमने हर एक का (वाली) वारिस मुक़र्रर कर दिया है और जिन लोगों से तुमने मुस्तहकम (पक्का) एहद किया है उनका मुक़र्रर हिस्सा भी तुम दे दो बेशक ख़ुदा तो हर चीज़ पर गवाह है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَوَالِيَ: वारिस, उत्तराधिकारी (जो मृतक की संपत्ति का हकदार हो)।
  • عَقَدَتْ أَيْمَانُكُمْ: जिनसे तुमने पक्की क़समें खाकर मित्रता और सहायता का अनुबंध किया हो।
  • نَصِيبَهُمْ: उनका हिस्सा, उनका भाग।
  • شَهِيدًا: सब कुछ देखने वाला, साक्षी, जानने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने हर व्यक्ति के लिए वारिस निर्धारित कर दिए हैं, जो माता-पिता और निकट संबंधियों द्वारा छोड़ी गई संपत्ति में से अपना हिस्सा पाते हैं। यह अल्लाह की ओर से एक नियम है जो न्याय और व्यवस्था पर आधारित है। इसके अलावा, उन लोगों का भी उल्लेख है जिनसे तुमने क़समें खाकर मित्रता और सहायता का अनुबंध किया था—इस्लाम के शुरुआती दौर में ऐसे अनुबंधों के आधार पर लोगों को मृतक की संपत्ति में से हिस्सा दिया जाता था। अल्लाह ने हुक्म दिया कि उन्हें उनका निर्धारित हिस्सा दो। लेकिन बाद में जब विरासत के पूर्ण नियम (आयात-ए-मवारीस) उतरे, तो यह प्रथा समाप्त कर दी गई और विरासत केवल रिश्तेदारों और क़ानूनी वारिसों तक सीमित कर दी गई। अल्लाह हर चीज़ पर गवाह है—वह तुम्हारे सभी कार्यों, अनुबंधों और नियतों को देखता और जानता है, और वही तुम्हें उनका बदला देगा। यह एक चेतावनी भी है कि जो लोग दूसरों का हक़ दबाएँगे या उन्हें उनका हिस्सा नहीं देंगे, वे अल्लाह की पकड़ से बच नहीं सकते।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. अल्लाह ने हर व्यक्ति के लिए वारिस निर्धारित करके यह सिखाया कि संपत्ति का वितरण उसकी इच्छा और न्याय के अनुसार होना चाहिए, न कि मनमाने ढंग से। यह समाज में व्यवस्था और न्याय स्थापित करता है।
  2. इस आयत से पता चलता है कि इस्लाम में वादों और अनुबंधों की पूर्ति का कितना महत्व है—जब तक वे शरई नियमों के अनुसार वैध थे, उन्हें निभाने का हुक्म दिया गया।
  3. अल्लाह का हर चीज़ पर गवाह होना हमें सिखाता है कि हमारे हर काम पर निगरानी है, इसलिए हमें ईमानदारी और न्याय से काम लेना चाहिए, क्योंकि हम अल्लाह से कुछ भी छिपा नहीं सकते।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में क्रमिक सुधार की प्रणाली है—समय के साथ बेहतर और पूर्ण नियम लागू किए गए, जो दीन की समझदारी और रहमत को दर्शाता है।


📜 आयत 31-35 — अन-निसा

31إِن تَجْتَنِبُوا كَبَائِرَ مَا تُنْهَوْنَ عَنْهُ نُكَفِّرْ عَنكُمْ سَيِّئَاتِكُمْ وَنُدْخِلْكُم مُّدْخَلًا كَرِيمًا
जिन कामों की तुम्हें मनाही की जाती है अगर उनमें से तुम गुनाहे कबीरा से बचते रहे तो हम तुम्हारे (सग़ीरा) गुनाहों से भी दरगुज़र करेंगे और तुमको बहुत अच्छी इज्ज़त की जगह पहुंचा देंगे
32وَلَا تَتَمَنَّوْا مَا فَضَّلَ اللَّهُ بِهِ بَعْضَكُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ ۚ لِّلرِّجَالِ نَصِيبٌ مِّمَّا اكْتَسَبُوا ۖ وَلِلنِّسَاءِ نَصِيبٌ مِّمَّا اكْتَسَبْنَ ۚ وَاسْأَلُوا اللَّهَ مِن فَضْلِهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ كَانَ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمًا
और ख़ुदा ने जो तुममें से एक दूसरे पर तरजीह दी है उसकी हवस न करो (क्योंकि फ़ज़ीलत तो आमाल से है) मर्दो को अपने किए का हिस्सा है और औरतों को अपने किए का हिस्सा और ये और बात है कि तुम ख़ुदा से उसके फज़ल व करम की ख्वाहिश करो ख़ुदा तो हर चीज़े से वाक़िफ़ है
33وَلِكُلٍّ جَعَلْنَا مَوَالِيَ مِمَّا تَرَكَ الْوَالِدَانِ وَالْأَقْرَبُونَ ۚ وَالَّذِينَ عَقَدَتْ أَيْمَانُكُمْ فَآتُوهُمْ نَصِيبَهُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ كَانَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدًا
और मां बाप (या) और क़राबतदार (ग़रज़) तो शख्स जो तरका छोड़ जाए हमने हर एक का (वाली) वारिस मुक़र्रर कर दिया है और जिन लोगों से तुमने मुस्तहकम (पक्का) एहद किया है उनका मुक़र्रर हिस्सा भी तुम दे दो बेशक ख़ुदा तो हर चीज़ पर गवाह है
34الرِّجَالُ قَوَّامُونَ عَلَى النِّسَاءِ بِمَا فَضَّلَ اللَّهُ بَعْضَهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ وَبِمَا أَنفَقُوا مِنْ أَمْوَالِهِمْ ۚ فَالصَّالِحَاتُ قَانِتَاتٌ حَافِظَاتٌ لِّلْغَيْبِ بِمَا حَفِظَ اللَّهُ ۚ وَاللَّاتِي تَخَافُونَ نُشُوزَهُنَّ فَعِظُوهُنَّ وَاهْجُرُوهُنَّ فِي الْمَضَاجِعِ وَاضْرِبُوهُنَّ ۖ فَإِنْ أَطَعْنَكُمْ فَلَا تَبْغُوا عَلَيْهِنَّ سَبِيلًا ۗ إِنَّ اللَّهَ كَانَ عَلِيًّا كَبِيرًا
मर्दो का औरतों पर क़ाबू है क्योंकि (एक तो) ख़ुदा ने बाज़ आदमियों (मर्द) को बाज़ अदमियों (औरत) पर फ़ज़ीलत दी है और (इसके अलावा) चूंकि मर्दो ने औरतों पर अपना माल ख़र्च किया है पस नेक बख्त बीवियॉ तो शौहरों की ताबेदारी करती हैं (और) उनके पीठ पीछे जिस तरह ख़ुदा ने हिफ़ाज़त की वह भी (हर चीज़ की) हिफ़ाज़त करती है और वह औरतें जिनके नाफरमान सरकश होने का तुम्हें अन्देशा हो तो पहले उन्हें समझाओ और (उसपर न माने तो) तुम उनके साथ सोना छोड़ दो और (इससे भी न माने तो) मारो मगर इतना कि खून न निकले और कोई अज़ो न (टूटे) पस अगर वह तुम्हारी मुतीइ हो जाएं तो तुम भी उनके नुक़सान की राह न ढूंढो ख़ुदा तो ज़रूर सबसे बरतर बुजुर्ग़ है
35وَإِنْ خِفْتُمْ شِقَاقَ بَيْنِهِمَا فَابْعَثُوا حَكَمًا مِّنْ أَهْلِهِ وَحَكَمًا مِّنْ أَهْلِهَا إِن يُرِيدَا إِصْلَاحًا يُوَفِّقِ اللَّهُ بَيْنَهُمَا ۗ إِنَّ اللَّهَ كَانَ عَلِيمًا خَبِيرًا
और ऐ हुक्काम (वक्त) अगर तुम्हें मियॉ बीवी की पूरी नाइत्तेफ़ाक़ी का तरफैन से अन्देशा हो तो एक सालिस (पन्च) मर्द के कुनबे में से एक और सालिस औरत के कुनबे में मुक़र्रर करो अगर ये दोनों सालिस दोनों में मेल करा देना चाहें तो ख़ुदा उन दोनों के दरमियान उसका अच्छा बन्दोबस्त कर देगा ख़ुदा तो बेशक वाक़िफ व ख़बरदार है
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अनुवाद — अन-निसा 33

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Tuesday, August 18, 2026

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