ग़ाफिर · 34/85
अनुवाद उच्चारण — सूरा ग़ाफिर
وَلَقَدْ جَاءَكُمْ يُوسُفُ مِن قَبْلُ بِالْبَيِّنَاتِ فَمَا زِلْتُمْ فِي شَكٍّ مِّمَّا جَاءَكُم بِهِ ۖ حَتَّىٰ إِذَا هَلَكَ قُلْتُمْ لَن يَبْعَثَ اللَّهُ مِن بَعْدِهِ رَسُولًا ۚ كَذَٰلِكَ يُضِلُّ اللَّهُ مَنْ هُوَ مُسْرِفٌ مُّرْتَابٌ ۝٣٤
Wa laqad jaaa`akum Yoosufu min qablu bil baiyinaati famaa ziltum fee shakkim mimaa jaaa`akum bihee hattaaa izaa halaka qultum lai yab asal laahu mim ba`dihee Rasoolaa; kazaalika yudillul laahu man huwa Musrifum murtaab
📖 हिंदी अर्थ
और (इससे) पहले यूसुफ़ भी तुम्हारे पास मौजिज़े लेकर आए थे तो जो जो लाए थे तुम लोग उसमें बराबर शक ही करते रहे यहाँ तक कि जब उन्होने वफात पायी तो तुम कहने लगे कि अब उनके बाद ख़ुदा हरगिज़ कोई रसूल नहीं भेजेगा जो हद से गुज़रने वाला और शक करने वाला है ख़ुदा उसे यू हीं गुमराही में छोड़ देता है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • बिल-बय्यिनात: स्पष्ट प्रमाण और चमत्कार।
  • हलक: मृत्यु, देहांत।
  • मुसरिफ: हद से गुज़रने वाला, सत्य को छोड़कर असत्य पर चलने वाला।
  • मुर्ताब: संदेह करने वाला, शक में पड़ने वाला।

तफसीर:

और अल्लाह ने आपसे पहले यूसुफ (अलैहिस्सलाम) को भी स्पष्ट प्रमाणों और चमत्कारों के साथ भेजा था। उन्होंने तुम्हें अल्लाह की एकता और उसकी इबादत की ओर बुलाया, और अपनी सच्चाई के खुले सबूत पेश किए। लेकिन तुम लोग उनके लाए हुए संदेश में हमेशा संदेह और शक में ही रहे। यहाँ तक कि जब यूसुफ (अलैहिस्सलाम) का देहांत हो गया, तो तुम्हारा संदेह और बढ़ गया और तुम कहने लगे कि अल्लाह उनके बाद कोई और रसूल नहीं भेजेगा। यह तुम्हारी ज़िद और सत्य से दूर भागने की आदत थी।

यही हाल उन लोगों का है जो हद से गुज़र जाते हैं और अल्लाह की निशानियों पर संदेह करते हैं। अल्लाह ऐसे लोगों को उनके अपने कर्मों और हठधर्मिता की वजह से गुमराही में छोड़ देता है। जो व्यक्ति सत्य को देखकर भी उसे नकारता है और अपनी ज़िद पर अड़ा रहता है, वह हिदायत से वंचित रहता है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के रसूलों को झुठलाने और उनकी शिक्षाओं में संदेह करने का अंजाम कितना बुरा होता है। जो लोग सत्य को स्वीकार करने से इनकार करते हैं और अपनी ज़िद पर अड़े रहते हैं, वे अल्लाह की रहमत से दूर हो जाते हैं। इसके विपरीत, जो लोग सत्य को खुले दिल से स्वीकार करते हैं और अल्लाह की ओर लौटते हैं, उनके लिए अल्लाह की ओर से मार्गदर्शन और क्षमा है। हमें चाहिए कि हम अपने दिलों को अल्लाह की याद और उसके रसूलों की शिक्षाओं के प्रति नर्म रखें, ताकि हम सीधे रास्ते पर चल सकें और अल्लाह की रहमत के हकदार बन सकें। याद रखें, अल्लाह उन्हीं को हिदायत देता है जो सच्चाई की तलाश में होते हैं और अपने दिल को साफ रखते हैं।



📜 आयत 32-36 — सूरा ग़ाफिर

32وَيَا قَوْمِ إِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُمْ يَوْمَ التَّنَادِ
और ऐ हमारी क़ौम मुझे तो तुम्हारी निस्बत कयामत के दिन का अन्देशा है
33يَوْمَ تُوَلُّونَ مُدْبِرِينَ مَا لَكُم مِّنَ اللَّهِ مِنْ عَاصِمٍ ۗ وَمَن يُضْلِلِ اللَّهُ فَمَا لَهُ مِنْ هَادٍ
जिस दिन तुम पीठ फेर कर (जहन्नुम) की तरफ चल खड़े होगे तो ख़ुदा के (अज़ाब) से तुम्हारा बचाने वाला न होगा, और जिसको ख़ुदा गुमराही में छोड़ दे तो उसका कोई रूबराह करने वाला नहीं
34وَلَقَدْ جَاءَكُمْ يُوسُفُ مِن قَبْلُ بِالْبَيِّنَاتِ فَمَا زِلْتُمْ فِي شَكٍّ مِّمَّا جَاءَكُم بِهِ ۖ حَتَّىٰ إِذَا هَلَكَ قُلْتُمْ لَن يَبْعَثَ اللَّهُ مِن بَعْدِهِ رَسُولًا ۚ كَذَٰلِكَ يُضِلُّ اللَّهُ مَنْ هُوَ مُسْرِفٌ مُّرْتَابٌ
और (इससे) पहले यूसुफ़ भी तुम्हारे पास मौजिज़े लेकर आए थे तो जो जो लाए थे तुम लोग उसमें बराबर शक ही करते रहे यहाँ तक कि जब उन्होने वफात पायी तो तुम कहने लगे कि अब उनके बाद ख़ुदा हरगिज़ कोई रसूल नहीं भेजेगा जो हद से गुज़रने वाला और शक करने वाला है ख़ुदा उसे यू हीं गुमराही में छोड़ देता है
35الَّذِينَ يُجَادِلُونَ فِي آيَاتِ اللَّهِ بِغَيْرِ سُلْطَانٍ أَتَاهُمْ ۖ كَبُرَ مَقْتًا عِندَ اللَّهِ وَعِندَ الَّذِينَ آمَنُوا ۚ كَذَٰلِكَ يَطْبَعُ اللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ قَلْبِ مُتَكَبِّرٍ جَبَّارٍ
जो लोग बगैर इसके कि उनके पास कोई दलील आई हो ख़ुदा की आयतों में (ख्वाह मा ख्वाह) झगड़े किया करते हैं वह ख़ुदा के नज़दीक और ईमानदारों के नज़दीक सख्त नफरत खेज़ हैं, यूँ ख़ुदा हर मुतकब्बिर सरकश के दिल पर अलामत मुक़र्रर कर देता है
36وَقَالَ فِرْعَوْنُ يَا هَامَانُ ابْنِ لِي صَرْحًا لَّعَلِّي أَبْلُغُ الْأَسْبَابَ
और फिरऔन ने कहा ऐ हामान हमारे लिए एक महल बनवा दे ताकि (उस पर चढ़ कर) रसतों पर पहुँच जाऊ
ग़ाफिरकुरान सूची
85आयत
मक्कीअवतरण स्थान
34आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 34

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Wednesday, September 30, 2026

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