ग़ाफिर · 33/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
يَوْمَ تُوَلُّونَ مُدْبِرِينَ مَا لَكُم مِّنَ اللَّهِ مِنْ عَاصِمٍ ۗ وَمَن يُضْلِلِ اللَّهُ فَمَا لَهُ مِنْ هَادٍ ۝٣٣
Yawma tuwalloona mud bireena maa lakum minal laahi min `aasim; wa mai yudlilil laahu famaa lahoo min haad
📖 हिंदी अर्थ
जिस दिन तुम पीठ फेर कर (जहन्नुम) की तरफ चल खड़े होगे तो ख़ुदा के (अज़ाब) से तुम्हारा बचाने वाला न होगा, और जिसको ख़ुदा गुमराही में छोड़ दे तो उसका कोई रूबराह करने वाला नहीं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تُوَلُّونَ مُدْبِرِينَ: तुम पीठ फेरकर भागोगे, मुँह मोड़कर पलायन करोगे।
  • عَاصِمٍ: बचाने वाला, रक्षा करने वाला, रोकने वाला।
  • يُضْلِلِ اللَّهُ: जिसे अल्लाह गुमराह कर दे (यानी उसे हिदायत की तौफ़ीक़ न दे)।
  • هَادٍ: हिदायत देने वाला, सही रास्ता दिखाने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस भयानक दिन का वर्णन कर रही है जब सभी लोग हिसाब के लिए खड़े होंगे। उस दिन जब गुनाहगारों को आग की तरफ ले जाया जाएगा, तो वे डर के मारे इधर-उधर भागेंगे, पीठ फेरकर भागने की कोशिश करेंगे, लेकिन कहीं जाने की जगह नहीं होगी। उस वक्त उन्हें समझ आएगा कि कोई उन्हें अल्लाह के अज़ाब से बचाने वाला नहीं है। न कोई ढाल है, न कोई सहारा, न कोई मददगार। वे जितना भागेंगे, अज़ाब उन्हें घेर लेगा।

फिर अल्लाह तआला फरमाता है कि जिसे अल्लाह गुमराह कर दे, उसे कोई हिदायत देने वाला नहीं। यानी हिदायत और गुमराही सिर्फ अल्लाह के हाथ में है। जिसे अल्लाह ने उसकी सरकशी और अक़्ल के गलत इस्तेमाल की वजह से छोड़ दिया, उसे कोई रास्ते पर नहीं ला सकता। यह बात हमें यह सबक सिखाती है कि हमें अल्लाह की तरफ रुजू करना चाहिए, उसकी रहमत और हिदायत की दुआ माँगनी चाहिए, क्योंकि हिदायत का मालिक सिर्फ वही है।

दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें दो बातें सिखाती है। पहली यह कि हमें इस दुनिया में रहते हुए उस दिन की तैयारी करनी है जब कोई भागने की जगह नहीं होगी। आज हमारे पास मौका है कि हम तौबा करें, नेक अमल करें और अल्लाह की रहमत के साये में आ जाएँ। दूसरी यह कि हमें हर वक्त अल्लाह से हिदायत की दुआ माँगनी चाहिए, क्योंकि हिदायत उसी के हाथ में है। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान है, वह अपने बंदों को हिदायत देना चाहता है, बशर्ते वे सच्चे दिल से उसकी तरफ लौटें। आइए, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक ढालें, ताकि उस दिन हम भागने वालों में न हों, बल्कि जन्नत की तरफ चलने वालों में हों।



📜 आयत 31-35 — ग़ाफिर

31مِثْلَ دَأْبِ قَوْمِ نُوحٍ وَعَادٍ وَثَمُودَ وَالَّذِينَ مِن بَعْدِهِمْ ۚ وَمَا اللَّهُ يُرِيدُ ظُلْمًا لِّلْعِبَادِ
(कहीं तुम्हारा भी वही हाल न हो) जैसा कि नूह की क़ौम और आद समूद और उनके बाद वाले लोगों का हाल हुआ और ख़ुदा तो बन्दों पर ज़ुल्म करना चाहता ही नहीं
32وَيَا قَوْمِ إِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُمْ يَوْمَ التَّنَادِ
और ऐ हमारी क़ौम मुझे तो तुम्हारी निस्बत कयामत के दिन का अन्देशा है
33يَوْمَ تُوَلُّونَ مُدْبِرِينَ مَا لَكُم مِّنَ اللَّهِ مِنْ عَاصِمٍ ۗ وَمَن يُضْلِلِ اللَّهُ فَمَا لَهُ مِنْ هَادٍ
जिस दिन तुम पीठ फेर कर (जहन्नुम) की तरफ चल खड़े होगे तो ख़ुदा के (अज़ाब) से तुम्हारा बचाने वाला न होगा, और जिसको ख़ुदा गुमराही में छोड़ दे तो उसका कोई रूबराह करने वाला नहीं
34وَلَقَدْ جَاءَكُمْ يُوسُفُ مِن قَبْلُ بِالْبَيِّنَاتِ فَمَا زِلْتُمْ فِي شَكٍّ مِّمَّا جَاءَكُم بِهِ ۖ حَتَّىٰ إِذَا هَلَكَ قُلْتُمْ لَن يَبْعَثَ اللَّهُ مِن بَعْدِهِ رَسُولًا ۚ كَذَٰلِكَ يُضِلُّ اللَّهُ مَنْ هُوَ مُسْرِفٌ مُّرْتَابٌ
और (इससे) पहले यूसुफ़ भी तुम्हारे पास मौजिज़े लेकर आए थे तो जो जो लाए थे तुम लोग उसमें बराबर शक ही करते रहे यहाँ तक कि जब उन्होने वफात पायी तो तुम कहने लगे कि अब उनके बाद ख़ुदा हरगिज़ कोई रसूल नहीं भेजेगा जो हद से गुज़रने वाला और शक करने वाला है ख़ुदा उसे यू हीं गुमराही में छोड़ देता है
35الَّذِينَ يُجَادِلُونَ فِي آيَاتِ اللَّهِ بِغَيْرِ سُلْطَانٍ أَتَاهُمْ ۖ كَبُرَ مَقْتًا عِندَ اللَّهِ وَعِندَ الَّذِينَ آمَنُوا ۚ كَذَٰلِكَ يَطْبَعُ اللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ قَلْبِ مُتَكَبِّرٍ جَبَّارٍ
जो लोग बगैर इसके कि उनके पास कोई दलील आई हो ख़ुदा की आयतों में (ख्वाह मा ख्वाह) झगड़े किया करते हैं वह ख़ुदा के नज़दीक और ईमानदारों के नज़दीक सख्त नफरत खेज़ हैं, यूँ ख़ुदा हर मुतकब्बिर सरकश के दिल पर अलामत मुक़र्रर कर देता है
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अनुवाद — ग़ाफिर 33

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Tuesday, August 18, 2026

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