ग़ाफिर · 35/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
الَّذِينَ يُجَادِلُونَ فِي آيَاتِ اللَّهِ بِغَيْرِ سُلْطَانٍ أَتَاهُمْ ۖ كَبُرَ مَقْتًا عِندَ اللَّهِ وَعِندَ الَّذِينَ آمَنُوا ۚ كَذَٰلِكَ يَطْبَعُ اللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ قَلْبِ مُتَكَبِّرٍ جَبَّارٍ ۝٣٥
Allazeena yujaadiloona feee Aaayaatil laahi bighairi sultaanin ataahum kabura maqtan `indal laahi wa `indal lazeena aamanoo; kazaalika yatha`ul laahu `alaa kulli qalbi mutakabbirin jabbaar
📖 हिंदी अर्थ
जो लोग बगैर इसके कि उनके पास कोई दलील आई हो ख़ुदा की आयतों में (ख्वाह मा ख्वाह) झगड़े किया करते हैं वह ख़ुदा के नज़दीक और ईमानदारों के नज़दीक सख्त नफरत खेज़ हैं, यूँ ख़ुदा हर मुतकब्बिर सरकश के दिल पर अलामत मुक़र्रर कर देता है

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُجَادِلُونَ – वे लोग जो झगड़ा करते हैं, तर्क-वितर्क करते हैं।
  • آيَاتِ اللهِ – अल्लाह की आयतें, उसके प्रमाण और निशानियाँ।
  • بِغَيْرِ سُلْطَانٍ – बिना किसी दलील, प्रमाण या स्पष्ट आधार के।
  • كَبُرَ مَقْتًا – बहुत बड़ा क्रोध और घृणा है, अत्यंत अपमानजनक है।
  • يَطْبَعُ – मुहर लगा देता है, सील कर देता है (अर्थात हृदय को हिदायत से बंद कर देता है)।
  • مُتَكَبِّرٍ – घमंडी, जो सत्य को स्वीकार करने से इनकार करे।
  • جَبَّارٍ – ज़ालिम, सरकश, जो अपनी ज़िद और ज़ुल्म में हद से गुज़र जाए।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में बताती है जो अल्लाह की आयतों और उसके स्पष्ट प्रमाणों के खिलाफ झगड़ा करते हैं, बिना किसी दलील और सबूत के जो उनके पास आया हो। वे सिर्फ हठधर्मिता और ज़िद की वजह से सत्य का विरोध करते हैं, न कि किसी ज्ञान या तर्क के आधार पर। ऐसा झगड़ा अल्लाह के यहाँ और ईमानवालों के बीच अत्यंत घृणित और क्रोध का कारण बनता है, क्योंकि यह अल्लाह की शान में बेअदबी है और उसके दीन को झुठलाने की कोशिश है।

अल्लाह तआला फरमाता है कि जिस तरह इन झगड़ालू लोगों के दिलों पर हिदायत का दरवाजा बंद कर दिया गया, उसी तरह अल्लाह हर उस घमंडी और सरकश इंसान के दिल पर मुहर लगा देता है जो सत्य से मुँह मोड़ता है और अपने ज़ुल्म व सरकशी में हद से आगे बढ़ जाता है। ऐसे लोग कभी हिदायत नहीं पाते, क्योंकि उनका घमंड और अत्याचार उनके दिलों को अंधा कर देता है।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य को स्वीकार करने के लिए नम्रता और खुला दिल चाहिए। जो इंसान अपने ज्ञान और समझ पर घमंड करता है और अल्लाह की आयतों के सामने झुकने से इनकार करता है, वह अपने ही हाथों अपने दिल को हिदायत से महरूम कर लेता है। अल्लाह तआला ने हमें अक्ल और समझ दी है ताकि हम उसकी निशानियों पर गौर करें और सत्य को पहचानें। जब सत्य सामने आ जाए, तो उसे कबूल करना ही बंदगी और ईमान की निशानी है।

याद रखिए! अल्लाह के दीन के खिलाफ बिना ज्ञान के झगड़ा करना न केवल बेकार है, बल्कि अल्लाह की नाराज़गी का कारण बनता है। इसके विपरीत, जो लोग अपने दिलों को सत्य के लिए खुला रखते हैं, अल्लाह उन्हें हिदायत की रोशनी से नवाज़ता है और उनके दिलों को सुकून व ईमान से भर देता है। आइए, हम अपने दिलों को घमंड और ज़िद से पाक करें और अल्लाह की आयतों के आगे सर झुकाएँ, ताकि हम उन लोगों में से हों जिन्हें अल्लाह की रहमत और मग़फिरत हासिल हो।



📜 आयत 33-37 — ग़ाफिर

33يَوْمَ تُوَلُّونَ مُدْبِرِينَ مَا لَكُم مِّنَ اللَّهِ مِنْ عَاصِمٍ ۗ وَمَن يُضْلِلِ اللَّهُ فَمَا لَهُ مِنْ هَادٍ
जिस दिन तुम पीठ फेर कर (जहन्नुम) की तरफ चल खड़े होगे तो ख़ुदा के (अज़ाब) से तुम्हारा बचाने वाला न होगा, और जिसको ख़ुदा गुमराही में छोड़ दे तो उसका कोई रूबराह करने वाला नहीं
34وَلَقَدْ جَاءَكُمْ يُوسُفُ مِن قَبْلُ بِالْبَيِّنَاتِ فَمَا زِلْتُمْ فِي شَكٍّ مِّمَّا جَاءَكُم بِهِ ۖ حَتَّىٰ إِذَا هَلَكَ قُلْتُمْ لَن يَبْعَثَ اللَّهُ مِن بَعْدِهِ رَسُولًا ۚ كَذَٰلِكَ يُضِلُّ اللَّهُ مَنْ هُوَ مُسْرِفٌ مُّرْتَابٌ
और (इससे) पहले यूसुफ़ भी तुम्हारे पास मौजिज़े लेकर आए थे तो जो जो लाए थे तुम लोग उसमें बराबर शक ही करते रहे यहाँ तक कि जब उन्होने वफात पायी तो तुम कहने लगे कि अब उनके बाद ख़ुदा हरगिज़ कोई रसूल नहीं भेजेगा जो हद से गुज़रने वाला और शक करने वाला है ख़ुदा उसे यू हीं गुमराही में छोड़ देता है
35الَّذِينَ يُجَادِلُونَ فِي آيَاتِ اللَّهِ بِغَيْرِ سُلْطَانٍ أَتَاهُمْ ۖ كَبُرَ مَقْتًا عِندَ اللَّهِ وَعِندَ الَّذِينَ آمَنُوا ۚ كَذَٰلِكَ يَطْبَعُ اللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ قَلْبِ مُتَكَبِّرٍ جَبَّارٍ
जो लोग बगैर इसके कि उनके पास कोई दलील आई हो ख़ुदा की आयतों में (ख्वाह मा ख्वाह) झगड़े किया करते हैं वह ख़ुदा के नज़दीक और ईमानदारों के नज़दीक सख्त नफरत खेज़ हैं, यूँ ख़ुदा हर मुतकब्बिर सरकश के दिल पर अलामत मुक़र्रर कर देता है
36وَقَالَ فِرْعَوْنُ يَا هَامَانُ ابْنِ لِي صَرْحًا لَّعَلِّي أَبْلُغُ الْأَسْبَابَ
और फिरऔन ने कहा ऐ हामान हमारे लिए एक महल बनवा दे ताकि (उस पर चढ़ कर) रसतों पर पहुँच जाऊ
37أَسْبَابَ السَّمَاوَاتِ فَأَطَّلِعَ إِلَىٰ إِلَٰهِ مُوسَىٰ وَإِنِّي لَأَظُنُّهُ كَاذِبًا ۚ وَكَذَٰلِكَ زُيِّنَ لِفِرْعَوْنَ سُوءُ عَمَلِهِ وَصُدَّ عَنِ السَّبِيلِ ۚ وَمَا كَيْدُ فِرْعَوْنَ إِلَّا فِي تَبَابٍ
(यानि) आसमानों के रसतों पर फिर मूसा के ख़ुदा को झांक कर (देख) लूँ और मैं तो उसे यक़ीनी झूठा समझता हूँ, और इसी तरह फिरऔन की बदकिरदारयाँ उसको भली करके दिखा दी गयीं थीं और वह राहे रास्ता से रोक दिया गया था, और फिरऔन की तद्बीर तो बस बिल्कुल ग़ारत गुल ही थीं
ग़ाफिरकुरान सूची
85आयत
मक्कीRevelation
35आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 35

सूरा ग़ाफिर आयत 35 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो लोग बगैर इसके कि उनके पास कोई दलील आई…

सूरा आयत 35/85 — ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ग़ाफिर सुनें, ग़ाफिर अनुवाद, ग़ाफिर mp3, ग़ाफिर pdf. आयत 33–37. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए