ग़ाफिर · 36/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
وَقَالَ فِرْعَوْنُ يَا هَامَانُ ابْنِ لِي صَرْحًا لَّعَلِّي أَبْلُغُ الْأَسْبَابَ ۝٣٦
Wa qaala Fir`awnu yaa Haamaanub-ni lee sarhal la`alleee ablughul asbaab
📖 हिंदी अर्थ
और फिरऔन ने कहा ऐ हामान हमारे लिए एक महल बनवा दे ताकि (उस पर चढ़ कर) रसतों पर पहुँच जाऊ
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • صَرْحًا (सरहन): ऊँची और विशाल इमारत, महल या मीनार।
  • الْأَسْبَابَ (अल-अस्बाब): रास्ते, साधन या वे कारण जो किसी चीज़ तक पहुँचाएँ; यहाँ आकाश के दरवाज़ों तक पहुँचने के रास्ते मुराद हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

फ़िरऔन ने अपने वज़ीर हामान से कहा: "ऐ हामान! मेरे लिए एक ऊँची इमारत बनवा, ताकि मैं उन रास्तों तक पहुँच सकूँ जो आसमानों तक जाते हैं।" फ़िरऔन यह कहकर मूसा (अलैहिस्सलाम) की दावत का मज़ाक उड़ा रहा था, जो उसे अल्लाह की वहदानियत और उसके अर्श से ऊपर होने की बात बता रहे थे। फ़िरऔन ने सोचा कि वह ऊँची इमारत बनवाकर आसमान तक चढ़ जाएगा और ख़ुद देख लेगा कि मूसा का रब कौन है। उसने कहा: "मुझे यक़ीन है कि मूसा झूठा है, उसका कोई रब नहीं जो आसमान में हो।"

यह फ़िरऔन की अहमक़ी और ग़ुरूर की इंतिहा थी कि वह अपनी सीमित ताक़त से अल्लाह के राज्य तक पहुँचना चाहता था। उसका यह काम उसे बहुत ख़ूबसूरत लग रहा था, क्योंकि शैतान ने उसके बुरे कामों को उसकी नज़र में अच्छा बना दिया था। वह हक़ के रास्ते से भटक गया और अपनी ग़लतफ़हमी में ही मग़रूर रहा। उसकी यह सारी चालाकी और जुगत — जो वह लोगों को यह बताने के लिए कर रहा था कि वह सही है और मूसा ग़लत — आख़िरकार उसके लिए घाटे और तबाही के सिवा कुछ नहीं लाई। यह चाल उसे न दुनिया में काम आई और न आख़िरत में; बल्कि उसकी सज़ा दुनिया में डूबना और आख़िरत में जहन्नम की आग बनी।

दावती पहलू:

इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि इंसान चाहे कितनी ही ऊँची इमारतें बना ले, कितनी ही तरक़्क़ी कर ले, वह अल्लाह की क़ुदरत को नहीं पा सकता। अल्लाह की बड़ाई और उसकी हस्ती को देखने का ज़रिया आँखें नहीं, बल्कि दिल की आँखें हैं — यानी ईमान और यक़ीन। फ़िरऔन जैसे लोग जो अल्लाह की आयतों को झुठलाते हैं, वे अपनी ही चालों में फँस जाते हैं। हमें चाहिए कि हम अल्लाह की तरफ़ झुकें, उसकी क़ुदरत पर ग़ौर करें और मूसा (अलैहिस्सलाम) की तरह सब्र और हिम्मत से हक़ की दावत देते रहें। अल्लाह का वादा है कि हक़ बातिल पर ग़ालिब आकर रहेगा, चाहे बातिल वाले कितनी ही कोशिशें कर लें। याद रखिए, अल्लाह के दीन की मदद करने वालों को अल्लाह कभी अकेला नहीं छोड़ता।

🎧 सुनें

📜 आयत 34-38 — ग़ाफिर

34وَلَقَدْ جَاءَكُمْ يُوسُفُ مِن قَبْلُ بِالْبَيِّنَاتِ فَمَا زِلْتُمْ فِي شَكٍّ مِّمَّا جَاءَكُم بِهِ ۖ حَتَّىٰ إِذَا هَلَكَ قُلْتُمْ لَن يَبْعَثَ اللَّهُ مِن بَعْدِهِ رَسُولًا ۚ كَذَٰلِكَ يُضِلُّ اللَّهُ مَنْ هُوَ مُسْرِفٌ مُّرْتَابٌ
और (इससे) पहले यूसुफ़ भी तुम्हारे पास मौजिज़े लेकर आए थे तो जो जो लाए थे तुम लोग उसमें बराबर शक ही करते रहे यहाँ तक कि जब उन्होने वफात पायी तो तुम कहने लगे कि अब उनके बाद ख़ुदा हरगिज़ कोई रसूल नहीं भेजेगा जो हद से गुज़रने वाला और शक करने वाला है ख़ुदा उसे यू हीं गुमराही में छोड़ देता है
35الَّذِينَ يُجَادِلُونَ فِي آيَاتِ اللَّهِ بِغَيْرِ سُلْطَانٍ أَتَاهُمْ ۖ كَبُرَ مَقْتًا عِندَ اللَّهِ وَعِندَ الَّذِينَ آمَنُوا ۚ كَذَٰلِكَ يَطْبَعُ اللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ قَلْبِ مُتَكَبِّرٍ جَبَّارٍ
जो लोग बगैर इसके कि उनके पास कोई दलील आई हो ख़ुदा की आयतों में (ख्वाह मा ख्वाह) झगड़े किया करते हैं वह ख़ुदा के नज़दीक और ईमानदारों के नज़दीक सख्त नफरत खेज़ हैं, यूँ ख़ुदा हर मुतकब्बिर सरकश के दिल पर अलामत मुक़र्रर कर देता है
36وَقَالَ فِرْعَوْنُ يَا هَامَانُ ابْنِ لِي صَرْحًا لَّعَلِّي أَبْلُغُ الْأَسْبَابَ
और फिरऔन ने कहा ऐ हामान हमारे लिए एक महल बनवा दे ताकि (उस पर चढ़ कर) रसतों पर पहुँच जाऊ
37أَسْبَابَ السَّمَاوَاتِ فَأَطَّلِعَ إِلَىٰ إِلَٰهِ مُوسَىٰ وَإِنِّي لَأَظُنُّهُ كَاذِبًا ۚ وَكَذَٰلِكَ زُيِّنَ لِفِرْعَوْنَ سُوءُ عَمَلِهِ وَصُدَّ عَنِ السَّبِيلِ ۚ وَمَا كَيْدُ فِرْعَوْنَ إِلَّا فِي تَبَابٍ
(यानि) आसमानों के रसतों पर फिर मूसा के ख़ुदा को झांक कर (देख) लूँ और मैं तो उसे यक़ीनी झूठा समझता हूँ, और इसी तरह फिरऔन की बदकिरदारयाँ उसको भली करके दिखा दी गयीं थीं और वह राहे रास्ता से रोक दिया गया था, और फिरऔन की तद्बीर तो बस बिल्कुल ग़ारत गुल ही थीं
38وَقَالَ الَّذِي آمَنَ يَا قَوْمِ اتَّبِعُونِ أَهْدِكُمْ سَبِيلَ الرَّشَادِ
और जो शख्स (दर पर्दा) ईमानदार था कहने लगा भाईयों मेरा कहना मानों मैं तुम्हें हिदायत के रास्ते दिख दूंगा
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अनुवाद — ग़ाफिर 36

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Tuesday, August 18, 2026

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