ग़ाफिर · 55/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
فَاصْبِرْ إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ وَاسْتَغْفِرْ لِذَنبِكَ وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ بِالْعَشِيِّ وَالْإِبْكَارِ ۝٥٥
Fasbir inna wa`dal laahi haqqunw wastaghfir lizambika wa sabbih bihamdi Rabbika bil`ashiyyi wal ibkaar
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम (उनकी शरारत) पर सब्र करो बेशक ख़ुदा का वायदा सच्चा है, और अपने (उम्मत की) गुनाहों की माफी माँगो और सुबह व शाम अपने परवरदिगार की हम्द व सना के साथ तसबीह करते रहो
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَاصْبِرْ: धैर्य रखें, सब्र करें।
  • إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ: निस्संदेह अल्लाह का वादा सत्य है।
  • وَاسْتَغْفِرْ لِذَنبِكَ: अपने गुनाहों के लिए क्षमा माँगें।
  • وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ: अपने रब की प्रशंसा के साथ उसकी तस्बीह (पवित्रता का वर्णन) करें।
  • بِالْعَشِيِّ وَالْإِبْكَارِ: शाम और सुबह के समय।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप उन लोगों की ओर से मिलने वाली तकलीफों और झुठलाने पर धैर्य रखें। अल्लाह का वादा बिल्कुल सच्चा है—वह अपने नेक बंदों की मदद करता है और अपने दुश्मनों को ज़लील करता है। जैसे उसने मूसा (अलैहिस्सलाम) को फिरौन पर विजय दी और उनकी शरीयत को बाकी रखा, वैसे ही वह आपको भी विजय देगा और आपके दीन को हमेशा के लिए स्थापित करेगा। यह वादा कभी टलने वाला नहीं।

फिर अल्लाह तआला आपको निर्देश देता है कि आप अपने गुनाहों के लिए इस्तिग़फ़ार (क्षमा की प्रार्थना) करें—ताकि उम्मत के लिए यह एक सुन्नत और नमूना बने। और अपने रब की तस्बीह उसकी हम्द (प्रशंसा) के साथ करें, यानी नमाज़ अदा करें, सुबह और शाम के समय। यही वो समय हैं जब दिल ख़ास तौर पर अल्लाह की याद में लीन होता है और रूह को सुकून मिलता है।

यह आयत हर मुसलमान के लिए एक प्यारा पैगाम है—मुश्किलों में सब्र करो, अल्लाह से माफ़ी माँगो, और उसकी तस्बीह व नमाज़ को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाओ। यही वो रास्ता है जो आपको दुनिया में सुकून और आख़िरत में कामयाबी तक पहुँचाएगा। अल्लाह का वादा सच्चा है, उस पर भरोसा रखो और उसकी इबादत में मशगूल रहो—यही सच्ची कामयाबी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 53-57 — ग़ाफिर

53وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْهُدَىٰ وَأَوْرَثْنَا بَنِي إِسْرَائِيلَ الْكِتَابَ
और हम ही ने मूसा को हिदायत (की किताब तौरेत) दी और बनी इसराईल को (उस) किताब का वारिस बनाया
54هُدًى وَذِكْرَىٰ لِأُولِي الْأَلْبَابِ
जो अक्लमन्दों के लिए (सरतापा) हिदायत व नसीहत है
55فَاصْبِرْ إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ وَاسْتَغْفِرْ لِذَنبِكَ وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ بِالْعَشِيِّ وَالْإِبْكَارِ
(ऐ रसूल) तुम (उनकी शरारत) पर सब्र करो बेशक ख़ुदा का वायदा सच्चा है, और अपने (उम्मत की) गुनाहों की माफी माँगो और सुबह व शाम अपने परवरदिगार की हम्द व सना के साथ तसबीह करते रहो
56إِنَّ الَّذِينَ يُجَادِلُونَ فِي آيَاتِ اللَّهِ بِغَيْرِ سُلْطَانٍ أَتَاهُمْ ۙ إِن فِي صُدُورِهِمْ إِلَّا كِبْرٌ مَّا هُم بِبَالِغِيهِ ۚ فَاسْتَعِذْ بِاللَّهِ ۖ إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْبَصِيرُ
जिन लोगों के पास (ख़ुदा की तरफ से) कोई दलील तो आयी नहीं और (फिर) वह ख़ुदा की आयतों में (ख्वाह मा ख्वाह) झगड़े निकालते हैं, उनके दिल में बुराई (की बेजां हवस) के सिवा कुछ नहीं हालाँकि वह लोग उस तक कभी पहुँचने वाले नहीं तो तुम बस ख़ुदा की पनाह माँगते रहो बेशक वह बड़ा सुनने वाला (और) देखने वाला है
57لَخَلْقُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ أَكْبَرُ مِنْ خَلْقِ النَّاسِ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ
सारे आसमान और ज़मीन का पैदा करना लोगों के पैदा करने की ये निस्बत यक़ीनी बड़ा (काम) है मगर अक्सर लोग (इतना भी) नहीं जानते
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अनुवाद — ग़ाफिर 55

सूरा ग़ाफिर आयत 55 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम (उनकी शरारत) पर सब्र करो बेशक ख़ुदा…

सूरा आयत 55/85 — ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ग़ाफिर सुनें, ग़ाफिर अनुवाद, ग़ाफिर mp3, ग़ाफिर pdf. आयत 53–57. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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