अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- مَنَافِعُ — अनेक प्रकार के लाभ और फ़ायदे।
- لِتَبْلُغُوا — ताकि तुम पहुँच सको।
- حَاجَةً فِي صُدُورِكُمْ — वह ज़रूरत जो तुम्हारे दिलों में हो (यानी अपने मक़सद और लक्ष्य)।
- الفُلْك — जहाज़ (समुद्र में चलने वाली नावें)।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला अपने बंदों पर अपनी असीम रहमत और एहसान का ज़िक्र करते हुए फ़रमाता है कि उसने चौपायों (जानवरों) को तुम्हारे लिए पैदा किया, और उनमें तुम्हारे लिए बेशुमार फ़ायदे रखे हैं। उनके ऊन, बाल, बकरी के बाल, दूध, खाल और मांस — सब कुछ तुम्हारे काम आता है। यही नहीं, बल्कि उन्हीं जानवरों पर सवार होकर तुम दूर-दराज़ के इलाक़ों तक पहुँचते हो, और उन्हीं पर अपना बोझ लादकर तुम अपनी उन ज़रूरतों को पूरा करते हो जो तुम्हारे दिलों में होती हैं — चाहे वह तिजारत (व्यापार) का सामान हो, या किसी मुसाफ़िर का सफ़र का सामान, या कोई और ज़रूरत।
यानी अल्लाह ने इन जानवरों को तुम्हारे लिए ऐसा ज़रिया बनाया है जिससे तुम अपने मक़सद तक पहुँचते हो। ज़मीन (खुश्की) पर तुम इन्हीं जानवरों (ऊँट, घोड़े, खच्चर, गधे) पर सवार होकर चलते हो, और समुद्र में जहाज़ों (कश्तियों) पर सवार होकर सफ़र करते हो। यानी अल्लाह ने तुम्हें ज़मीन और समुद्र दोनों में सफ़र करने की ताक़त दी है, ताकि तुम अपनी रोज़ी कमाओ, अपने काम पूरे करो और अल्लाह की बड़ी-बड़ी नेमतों से फ़ायदा उठाओ।
दावती पहलू:
प्यारे भाइयों और बहनों! ज़रा सोचिए — अल्लाह तआला ने इन जानवरों को कितनी आसानी से तुम्हारे क़ाबू में कर दिया है। तुम उन्हें हाँकते हो, वे तुम्हारी मानते हैं, तुम्हारा बोझ उठाते हैं, और तुम्हें मंज़िल तक पहुँचाते हैं। यह अल्लाह की कितनी बड़ी मेहरबानी है! अगर अल्लाह ने चाहा होता तो ये जानवर तुम्हारे क़ाबू में ही न आते, लेकिन उसने अपनी रहमत से उन्हें तुम्हारे लिए नरम और वश में कर दिया।
क्या यह अल्लाह का शुक्र अदा करने का मौक़ा नहीं है? जब तुम सुबह उठकर अपने काम पर जाते हो, किसी सवारी पर बैठते हो, या जहाज़ से सफ़र करते हो — तो एक पल के लिए रुककर अल्लाह का शुक्र अदा करो, और याद करो कि यह सब उसी की देन है। अल्लाह ने यह सब कुछ इसलिए किया है ताकि तुम उसकी इबादत करो, उसका हुक्म मानो और उसकी राह में चलो।
याद रखिए! जिस अल्लाह ने ज़मीन पर चलने वाले जानवरों और समुद्र में चलने वाले जहाज़ों को तुम्हारे लिए मुसख़्खर (वश में) कर दिया, वही अल्लाह तुम्हें आख़िरत की मंज़िल तक पहुँचाने की ताक़त रखता है। बस ज़रूरत है उस पर भरोसा करने और उसके दिए हुए रास्ते पर चलने की। अल्लाह हम सबको अपनी नेमतों का शुक्र अदा करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 78-82 — ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 80
सूरा ग़ाफिर आयत 80 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और तुम्हारे लिए उनमें (और भी) फायदे हैं और ताकि…सूरा आयत 80/85 — ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ग़ाफिर सुनें, ग़ाफिर अनुवाद, ग़ाफिर mp3, ग़ाफिर pdf. आयत 78–82. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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