अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَعْرَضُوا – मुँह मोड़ लिया, इनकार कर दिया।
- أَنذَرْتُكُمْ – मैंने तुम्हें डरा दिया, सचेत कर दिया।
- صَاعِقَةً – विनाशकारी आज़ाब, हलाक करने वाली आफत, जो किसी क़ौम को जड़ से उखाड़ दे।
- عَادٍ وَثَمُودَ – आद और समूद की क़ौमें, जो अल्लाह के रसूलों को झुठलाने के कारण हलाक हुईं।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को हिदायत देता है कि अगर ये काफ़िर, जिन्हें क़ुरआन की अज़मत और अल्लाह की बुज़ुर्गी के निशान दिखाए जा चुके हैं, फिर भी सच्चाई से मुँह मोड़ें और ईमान लाने से इनकार करें, तो आप उनसे कह दें: "मैंने तुम्हें उसी तरह के विनाशकारी आज़ाब से डरा दिया है, जैसा आज़ाब आद और समूद की क़ौमों पर आया था।"
यानी जिस तरह आद और समूद ने अपने नबियों (हूद और सालेह अलैहिमुस्सलाम) को झुठलाया और अल्लाह के हुक्म से सरकशी की, तो उन पर ऐसा अज़ाब आया जिसने उन्हें पूरी तरह तबाह कर दिया। उसी तरह अगर ये मक्का के काफ़िर अपनी ज़िद और इनकार पर क़ायम रहे, तो उन पर भी अल्लाह का वही अज़ाब नाज़िल हो सकता है। ये काफ़िर जब शाम (सीरिया) की तरफ़ सफ़र करते थे, तो रास्ते में आद और समूद के खंडहर देखते थे, जो उनके विनाश की सबसे बड़ी निशानी थे। फिर भी वे सबक़ नहीं लेते थे।
यहाँ "صَاعِقَة" से मुराद वह हलाक करने वाला आज़ाब है जो अचानक आकर किसी क़ौम को ख़त्म कर दे। यह आज़ाब सिर्फ़ बिजली की गरज तक सीमित नहीं, बल्कि हर उस आफत को शामिल करता है जो किसी क़ौम की जड़ें उखाड़ दे।
दावती पहलू (इस्लाम की ओर बुलाने वाला पहलू):
इस आयत में अल्लाह तआला का ख़ौफ़ दिलाया गया है, ताकि इंसान अपनी ज़िद और ग़ुरूर से बाज़ आए। यह एक रहमत है कि अल्लाह ने पहले ही आगाह कर दिया, ताकि लोग अज़ाब आने से पहले तौबा कर लें। अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) यही है कि वह जब किसी क़ौम को हलाक करता है, तो उसके पास पहले रसूल और किताब भेज चुका होता है। इसलिए हर इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह के दीन की तरफ़ लौट आए, क्योंकि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन उसकी रहमत भी बहुत वसीअ है। जो लोग क़ुरआन की हिदायत को क़बूल कर लें, उनके लिए अल्लाह ने जन्नत और खुशहाली तैयार की है, और जो मुँह मोड़ें, उनके लिए वही अंजाम है जो आद और समूद का हुआ। यह आयत हमें सिखाती है कि हम इतिहास से सबक़ लें और अल्लाह के अज़ाब से पहले अपनी ज़िंदगी को सुधार लें।
📜 आयत 11-15 — फुस्सिलत
अनुवाद — फुस्सिलत 13
सूरा फुस्सिलत आयत 13 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर अगर हम पर भी ये कुफ्फार मुँह फेरें तो…सूरा आयत 13/54 — फुस्सिलत فصلت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: फुस्सिलत सुनें, फुस्सिलत अनुवाद, फुस्सिलत mp3, फुस्सिलत pdf. आयत 11–15. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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