Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مِن بَيْنِ أَيْدِيهِمْ وَمِنْ خَلْفِهِمْ: उनके सामने से और उनके पीछे से, यानी हर तरफ से।
- أَلَّا تَعْبُدُوا إِلَّا اللَّهَ: यह कि अल्लाह के अलावा किसी और की इबादत न करो।
- لَوْ شَاءَ رَبُّنَا: अगर हमारा रब चाहता।
- كَافِرُونَ: इनकार करने वाले, न मानने वाले।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत हमें आद और समूद की उन क़ौमों की दास्तान सुना रही है, जिन्होंने अपने रसूलों को झुठलाया और अल्लाह की रहमत से महरूम हो गए। जब उनके पास अल्लाह के रसूल आए, तो वे अकेले नहीं आए बल्कि लगातार एक के बाद एक आते रहे, हर तरफ से, हर दिशा से, ताकि उन तक अल्लाह का पैग़ाम पूरी तरह पहुँच जाए। सभी रसूलों का एक ही पैग़ाम था—"अल्लाह के अलावा किसी की इबादत मत करो, केवल उसी की बंदगी करो।" यही तौहीद का पैग़ाम है, जो हर नबी का मूल संदेश रहा है।
लेकिन उन क़ौमों के काफिरों ने अहंकार और घमंड में आकर जवाब दिया: "अगर हमारा रब चाहता कि हम उसकी इबादत करें और उसका कोई शरीक न बनाएं, तो वह हमारे पास फ़रिश्तों को भेजता, न कि तुम जैसे इंसानों को।" उन्होंने रसूलों के इंसान होने को बहाना बनाकर सच्चाई को ठुकरा दिया और कहा: "हम तो उस चीज़ को मानने से इनकार करते हैं जो तुम लेकर आए हो।"
यह उनकी ज़िद और हठधर्मिता थी। उन्होंने यह नहीं सोचा कि अल्लाह ने हमेशा इंसानों में से ही रसूल चुने हैं, क्योंकि इंसान ही इंसानों की भाषा समझ सकता है और उनके बीच रहकर उन्हें राह दिखा सकता है। फ़रिश्ते इंसानों के बीच रहकर उनकी ज़िंदगी का हिस्सा नहीं बन सकते। अल्लाह की हिकमत यही है कि वह इंसानों में से ही रसूल भेजता है, ताकि लोग उनसे सीधे सीख सकें और उनके जीवन को देखकर राह पा सकें।
इस आयत से हमें सबक मिलता है कि अल्लाह की हिदायत को कबूल करने में देर नहीं करनी चाहिए। जब सच्चाई हमारे सामने आ जाए, तो हमें उसे मान लेना चाहिए, चाहे वह किसी भी इंसान के ज़रिए आए। बहाने बनाना और अहंकार करना इंसान को अल्लाह की रहमत से दूर कर देता है। अल्लाह ने हम पर बड़ा एहसान किया है कि उसने हमें कुरान और रसूल ﷺ का पैग़ाम दिया। हमें चाहिए कि इस नेमत की कद्र करें और खुले दिल से अल्लाह की इबादत करें, क्योंकि यही हमारी कामयाबी का रास्ता है। जो लोग अल्लाह की हिदायत को ठुकराते हैं, वे अंत में पछतावे के अलावा कुछ हासिल नहीं करते।
📜 आयत 12-16 — सूरा फुस्सिलत
अनुवाद — फुस्सिलत 14
सूरा फुस्सिलत आयत 14 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जब उनके पास उनके आगे से और पीछे से पैग़म्बर…सूरा आयत 14/54 — सूरा फुस्सिलत فصلت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा फुस्सिलत सुनें, सूरा फुस्सिलत अनुवाद, सूरा फुस्सिलत mp3, सूरा फुस्सिलत pdf. आयत 12–16. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा फुस्सिलत
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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