फुस्सिलत · 32/54
अनुवाद उच्चारण — सूरा फुस्सिलत
نُزُلًا مِّنْ غَفُورٍ رَّحِيمٍ ۝٣٢
Nuzulam min Ghafoorir Raheem
📖 हिंदी अर्थ
(ये) बख्शने वाले मेहरबान (ख़ुदा) की तरफ़ से (तुम्हारी मेहमानी है)

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • नुज़ुलन (نُزُلًا): अतिथि सत्कार के लिए तैयार किया गया भोजन और आवास, यानी स्वागत-सत्कार की चीज़।
  • ग़फ़ूर (غَفُورٍ): अत्यंत क्षमाशील, जो अपने बंदों के पापों को ढकने और माफ करने वाला हो।
  • रहीम (رَحِيمٍ): अत्यंत दयालु, जो अपने बंदों पर असीम दया और कृपा बरसाता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस महान नेमत (अनुग्रह) का वर्णन कर रही है जो अल्लाह तआला ने अपने नेक बंदों के लिए जन्नत में तैयार की है। जब मोमिन बंदे जन्नत में दाखिल होंगे, तो फ़रिश्ते उनका स्वागत करेंगे और कहेंगे: "यह सब कुछ जो तुम्हें मिल रहा है—हर प्रकार के फल, पेय, सुंदर महल, और वह सब कुछ जो तुम्हारा दिल चाहे और जिससे तुम्हारी आँखें ठंडी हों—यह सब तुम्हारे लिए एक विशेष अतिथि-सत्कार (नुज़ुल) है।"

यह नुज़ुल (स्वागत-सत्कार) किसी साधारण मेज़बान की ओर से नहीं, बल्कि उस रब की ओर से है जो ग़फ़ूर है—अपने बंदों के गुनाहों को माफ करने वाला, और रहीम है—उन पर असीम दया करने वाला। यानी यह सब कुछ उसी की क्षमा और दया का परिणाम है। अगर वह क्षमाशील और दयालु न होता, तो कोई भी बंदा इस नेमत का हक़दार न बन पाता।

यहाँ अल्लाह तआला ने अपने दो खूबसूरत नामों का ज़िक्र किया है—"ग़फ़ूर" और "रहीम"—ताकि बंदे को यक़ीन हो कि जन्नत की नेमतें उसके अमल (कर्मों) की कमाई से नहीं, बल्कि अल्लाह की माफ़ी और रहमत से मिलती हैं। जो बंदा तौबा करके अल्लाह की ओर लौटता है, अल्लाह उसके सारे गुनाह माफ कर देता है और उसे अपनी रहमत से नवाज़ता है।

दावती पहलू:

यह आयत हर मुसलमान के दिल में उम्मीद की किरण जगाती है। अल्लाह तआला कितना कृपालु है कि उसने अपने बंदों के लिए ऐसी जगह तैयार की है जिसका कोई अंदाज़ा नहीं लगा सकता। वह चाहता है कि उसके बंदे उसकी रहमत से निराश न हों, चाहे उनसे कितने ही गुनाह क्यों न हुए हों। बस शर्त यह है कि बंदा सच्चे दिल से तौबा करे और अल्लाह की राह पर चले। अल्लाह की माफ़ी और दया इतनी विशाल है कि वह हर पाप को धो सकती है और बंदे को जन्नत के सबसे ऊँचे मुकाम तक पहुँचा सकती है।

तो आओ, हम सब अपने रब की इस असीम दया और क्षमा पर भरोसा रखें, उसकी इबादत में जुट जाएँ, और उस जन्नत के लिए दौड़ पड़ें जहाँ हर अरमान पूरा होगा और हर दुख-दर्द का नामो-निशान नहीं होगा। यही सच्ची कामयाबी है, और यही अल्लाह का सबसे बड़ा इनाम है।



📜 आयत 30-34 — सूरा फुस्सिलत

30إِنَّ الَّذِينَ قَالُوا رَبُّنَا اللَّهُ ثُمَّ اسْتَقَامُوا تَتَنَزَّلُ عَلَيْهِمُ الْمَلَائِكَةُ أَلَّا تَخَافُوا وَلَا تَحْزَنُوا وَأَبْشِرُوا بِالْجَنَّةِ الَّتِي كُنتُمْ تُوعَدُونَ
और जिन लोगों ने (सच्चे दिल से) कहा कि हमारा परवरदिगार तो (बस) ख़ुदा है, फिर वह उसी पर भी क़ायम भी रहे उन पर मौत के वक्त (रहमत के) फ़रिश्ते नाज़िल होंगे (और कहेंगे) कि कुछ ख़ौफ न करो और न ग़म खाओ और जिस बेहिश्त का तुमसे वायदा किया गया था उसकी ख़ुशियां मनाओ
31نَحْنُ أَوْلِيَاؤُكُمْ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَفِي الْآخِرَةِ ۖ وَلَكُمْ فِيهَا مَا تَشْتَهِي أَنفُسُكُمْ وَلَكُمْ فِيهَا مَا تَدَّعُونَ
हम दुनिया की ज़िन्दगी में तुम्हारे दोस्त थे और आखेरत में भी तुम्हारे (रफ़ीक़) हैं और जिस चीज़ का भी तुम्हार जी चाहे बेहिश्त में तुम्हारे वास्ते मौजूद है और जो चीज़ तलब करोगे वहाँ तुम्हारे लिए (हाज़िर) होगी
32نُزُلًا مِّنْ غَفُورٍ رَّحِيمٍ
(ये) बख्शने वाले मेहरबान (ख़ुदा) की तरफ़ से (तुम्हारी मेहमानी है)
33وَمَنْ أَحْسَنُ قَوْلًا مِّمَّن دَعَا إِلَى اللَّهِ وَعَمِلَ صَالِحًا وَقَالَ إِنَّنِي مِنَ الْمُسْلِمِينَ
और इस से बेहतर किसकी बात हो सकती है जो (लोगों को) ख़ुदा की तरफ बुलाए और अच्छे अच्छे काम करे और कहे कि मैं भी यक़ीनन (ख़ुदा के) फरमाबरदार बन्दों में हूं
34وَلَا تَسْتَوِي الْحَسَنَةُ وَلَا السَّيِّئَةُ ۚ ادْفَعْ بِالَّتِي هِيَ أَحْسَنُ فَإِذَا الَّذِي بَيْنَكَ وَبَيْنَهُ عَدَاوَةٌ كَأَنَّهُ وَلِيٌّ حَمِيمٌ
और भलाई बुराई (कभी) बराबर नहीं हो सकती तो (सख्त कलामी का) ऐसे तरीके से जवाब दो जो निहायत अच्छा हो (ऐसा करोगे) तो (तुम देखोगे) जिस में और तुममें दुशमनी थी गोया वह तुम्हारा दिल सोज़ दोस्त है
फुस्सिलतकुरान सूची
54आयत
मक्कीअवतरण स्थान
32आयत

अनुवाद — फुस्सिलत 32

सूरा फुस्सिलत आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ये) बख्शने वाले मेहरबान (ख़ुदा) की तरफ़ से (तुम्हारी मेहमानी…

सूरा आयत 32/54 — सूरा फुस्सिलत فصلت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा फुस्सिलत सुनें, सूरा फुस्सिलत अनुवाद, सूरा फुस्सिलत mp3, सूरा फुस्सिलत pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Wednesday, September 30, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए