अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- नुज़ुलन (نُزُلًا): अतिथि सत्कार के लिए तैयार किया गया भोजन और आवास, यानी स्वागत-सत्कार की चीज़।
- ग़फ़ूर (غَفُورٍ): अत्यंत क्षमाशील, जो अपने बंदों के पापों को ढकने और माफ करने वाला हो।
- रहीम (رَحِيمٍ): अत्यंत दयालु, जो अपने बंदों पर असीम दया और कृपा बरसाता है।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उस महान नेमत (अनुग्रह) का वर्णन कर रही है जो अल्लाह तआला ने अपने नेक बंदों के लिए जन्नत में तैयार की है। जब मोमिन बंदे जन्नत में दाखिल होंगे, तो फ़रिश्ते उनका स्वागत करेंगे और कहेंगे: "यह सब कुछ जो तुम्हें मिल रहा है—हर प्रकार के फल, पेय, सुंदर महल, और वह सब कुछ जो तुम्हारा दिल चाहे और जिससे तुम्हारी आँखें ठंडी हों—यह सब तुम्हारे लिए एक विशेष अतिथि-सत्कार (नुज़ुल) है।"
यह नुज़ुल (स्वागत-सत्कार) किसी साधारण मेज़बान की ओर से नहीं, बल्कि उस रब की ओर से है जो ग़फ़ूर है—अपने बंदों के गुनाहों को माफ करने वाला, और रहीम है—उन पर असीम दया करने वाला। यानी यह सब कुछ उसी की क्षमा और दया का परिणाम है। अगर वह क्षमाशील और दयालु न होता, तो कोई भी बंदा इस नेमत का हक़दार न बन पाता।
यहाँ अल्लाह तआला ने अपने दो खूबसूरत नामों का ज़िक्र किया है—"ग़फ़ूर" और "रहीम"—ताकि बंदे को यक़ीन हो कि जन्नत की नेमतें उसके अमल (कर्मों) की कमाई से नहीं, बल्कि अल्लाह की माफ़ी और रहमत से मिलती हैं। जो बंदा तौबा करके अल्लाह की ओर लौटता है, अल्लाह उसके सारे गुनाह माफ कर देता है और उसे अपनी रहमत से नवाज़ता है।
दावती पहलू:
यह आयत हर मुसलमान के दिल में उम्मीद की किरण जगाती है। अल्लाह तआला कितना कृपालु है कि उसने अपने बंदों के लिए ऐसी जगह तैयार की है जिसका कोई अंदाज़ा नहीं लगा सकता। वह चाहता है कि उसके बंदे उसकी रहमत से निराश न हों, चाहे उनसे कितने ही गुनाह क्यों न हुए हों। बस शर्त यह है कि बंदा सच्चे दिल से तौबा करे और अल्लाह की राह पर चले। अल्लाह की माफ़ी और दया इतनी विशाल है कि वह हर पाप को धो सकती है और बंदे को जन्नत के सबसे ऊँचे मुकाम तक पहुँचा सकती है।
तो आओ, हम सब अपने रब की इस असीम दया और क्षमा पर भरोसा रखें, उसकी इबादत में जुट जाएँ, और उस जन्नत के लिए दौड़ पड़ें जहाँ हर अरमान पूरा होगा और हर दुख-दर्द का नामो-निशान नहीं होगा। यही सच्ची कामयाबी है, और यही अल्लाह का सबसे बड़ा इनाम है।
📜 आयत 30-34 — फुस्सिलत
अनुवाद — फुस्सिलत 32
सूरा फुस्सिलत आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ये) बख्शने वाले मेहरबान (ख़ुदा) की तरफ़ से (तुम्हारी मेहमानी…सूरा आयत 32/54 — फुस्सिलत فصلت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: फुस्सिलत सुनें, फुस्सिलत अनुवाद, फुस्सिलत mp3, फुस्सिलत pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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