Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- आयातिना: हमारी निशानियाँ, चमत्कार और प्रमाण।
- मलइही: उसके दरबार के सरदार, प्रमुख लोग और कुलीन व्यक्ति।
- रब्बिल आलमीन: सारे संसारों का पालनहार।
तफसीर:
अल्लाह तआला ने इस आयत में अपने पैगंबर हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र किया है, जो उन्होंने फिरौन और उसके दरबार के सरदारों की ओर भेजा था। यह ज़िक्र इसलिए किया गया ताकि हमारे प्यारे नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को दिलासा दिया जाए और उन्हें बताया जाए कि जिस तरह मूसा (अलैहिस्सलाम) को फिरौन जैसे ज़ालिम और सरकश बादशाह के पास भेजा गया था, उसी तरह आपको भी कुरैश के मुशरिकों की ओर भेजा गया है। यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह अल्लाह का तरीका रहा है कि वह अपने पैगंबरों को ज़ालिम और सरकश क़ौमों की ओर भेजता रहा है।
अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को कई निशानियाँ और चमत्कार दिए थे, जैसे लाठी का साँप बन जाना, हाथ का चमकना, और अन्य नौ निशानियाँ। ये सब इसलिए थीं कि फिरौन और उसके दरबार के लोग समझ जाएँ कि मूसा (अलैहिस्सलाम) झूठे नहीं हैं, बल्कि सच्चे पैगंबर हैं। जब मूसा (अलैहिस्सलाम) फिरौन और उसके दरबार के सामने पहुँचे, तो उन्होंने साफ और दृढ़ शब्दों में कहा: "मैं सारे संसारों के पालनहार का रसूल हूँ।" यानी मैं किसी इंसान का या किसी बादशाह का भेजा हुआ नहीं हूँ, बल्कि मैं उस अल्लाह का भेजा हुआ हूँ जो पूरे जहान का मालिक और पालनहार है। यह एक बहुत बड़ा ऐलान था जो फिरौन के सामने किया गया, जो खुद को "रब्बुल आला" (सबसे बड़ा रब) कहता था।
जब मूसा (अलैहिस्सलाम) ने ये साफ-साफ निशानियाँ और चमत्कार पेश किए, तो फिरौन और उसके दरबार के लोग उन पर हँसने लगे। वे इन चीज़ों को जादू समझते थे और मज़ाक उड़ाते थे। यह उनकी नादानी और अहंकार की वजह से था, क्योंकि वे सच्चाई को कबूल नहीं करना चाहते थे।
दावती पहलू:
इस आयत से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। सबसे पहले, यह कि अल्लाह के रसूलों को जब भी भेजा गया, उन्होंने बिना किसी डर के सच्चाई बयान की। मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फिरौन जैसे ज़ालिम के सामने खड़े होकर बड़ी बहादुरी से कहा कि मैं रब्बिल आलमीन का रसूल हूँ। उन्होंने किसी की परवाह नहीं की, सिर्फ अल्लाह की रज़ा का ख्याल किया। दूसरे, यह कि सच्चाई को पेश करने पर लोगों का हँसना और मज़ाक उड़ाना कोई नई बात नहीं है। फिरौन और उसके दरबार ने भी मूसा (अलैहिस्सलाम) की निशानियों पर हँसे थे। इसलिए अगर आज हमें सच्चाई पर चलने की वजह से लोगों का मज़ाक उठाना पड़े, तो हमें निराश नहीं होना चाहिए। तीसरे, यह कि अल्लाह अपने पैगंबरों की मदद करता है और उन्हें कामयाबी देता है। मूसा (अलैहिस्सलाम) को फिरौन के मुकाबले में आखिरकार कामयाबी मिली, और फिरौन को उसके अहंकार की वजह से डुबो दिया गया। यह हमारे लिए एक बड़ी सीख है कि हमें सच्चाई पर डटे रहना चाहिए, चाहे हालात कैसे भी हों, क्योंकि अल्लाह हमेशा सच्चे लोगों के साथ होता है।
📜 आयत 44-48 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 46
सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 46 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हम ही ने यक़ीनन मूसा को अपनी निशानियाँ देकर…सूरा आयत 46/89 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अज़-ज़ुखरुफ सुनें, सूरा अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, सूरा अज़-ज़ुखरुफ mp3, सूरा अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 44–48. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अज़-ज़ुखरुफ
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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