अज़-ज़ुखरुफ · 46/89
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुखरुफ
وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ بِآيَاتِنَا إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَمَلَئِهِ فَقَالَ إِنِّي رَسُولُ رَبِّ الْعَالَمِينَ ۝٤٦
Wa laqad arsalnaa Moosaa bi aayaatinaaa ilaa Fir`awna wa mala`ihee faqaala innee Rasoolu Rabbil `aalameen
📖 हिंदी अर्थ
और हम ही ने यक़ीनन मूसा को अपनी निशानियाँ देकर फिरऔन और उसके दरबारियों के पास (पैग़म्बर बनाकर) भेजा था तो मूसा ने कहा कि मैं सारे जहॉन के पालने वाले (ख़ुदा) का रसूल हूँ
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • आयातिना: हमारी निशानियाँ, चमत्कार और प्रमाण।
  • मलइही: उसके दरबार के सरदार, प्रमुख लोग और कुलीन व्यक्ति।
  • रब्बिल आलमीन: सारे संसारों का पालनहार।

तफसीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपने पैगंबर हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र किया है, जो उन्होंने फिरौन और उसके दरबार के सरदारों की ओर भेजा था। यह ज़िक्र इसलिए किया गया ताकि हमारे प्यारे नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को दिलासा दिया जाए और उन्हें बताया जाए कि जिस तरह मूसा (अलैहिस्सलाम) को फिरौन जैसे ज़ालिम और सरकश बादशाह के पास भेजा गया था, उसी तरह आपको भी कुरैश के मुशरिकों की ओर भेजा गया है। यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह अल्लाह का तरीका रहा है कि वह अपने पैगंबरों को ज़ालिम और सरकश क़ौमों की ओर भेजता रहा है।

अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को कई निशानियाँ और चमत्कार दिए थे, जैसे लाठी का साँप बन जाना, हाथ का चमकना, और अन्य नौ निशानियाँ। ये सब इसलिए थीं कि फिरौन और उसके दरबार के लोग समझ जाएँ कि मूसा (अलैहिस्सलाम) झूठे नहीं हैं, बल्कि सच्चे पैगंबर हैं। जब मूसा (अलैहिस्सलाम) फिरौन और उसके दरबार के सामने पहुँचे, तो उन्होंने साफ और दृढ़ शब्दों में कहा: "मैं सारे संसारों के पालनहार का रसूल हूँ।" यानी मैं किसी इंसान का या किसी बादशाह का भेजा हुआ नहीं हूँ, बल्कि मैं उस अल्लाह का भेजा हुआ हूँ जो पूरे जहान का मालिक और पालनहार है। यह एक बहुत बड़ा ऐलान था जो फिरौन के सामने किया गया, जो खुद को "रब्बुल आला" (सबसे बड़ा रब) कहता था।

जब मूसा (अलैहिस्सलाम) ने ये साफ-साफ निशानियाँ और चमत्कार पेश किए, तो फिरौन और उसके दरबार के लोग उन पर हँसने लगे। वे इन चीज़ों को जादू समझते थे और मज़ाक उड़ाते थे। यह उनकी नादानी और अहंकार की वजह से था, क्योंकि वे सच्चाई को कबूल नहीं करना चाहते थे।

दावती पहलू:

इस आयत से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। सबसे पहले, यह कि अल्लाह के रसूलों को जब भी भेजा गया, उन्होंने बिना किसी डर के सच्चाई बयान की। मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फिरौन जैसे ज़ालिम के सामने खड़े होकर बड़ी बहादुरी से कहा कि मैं रब्बिल आलमीन का रसूल हूँ। उन्होंने किसी की परवाह नहीं की, सिर्फ अल्लाह की रज़ा का ख्याल किया। दूसरे, यह कि सच्चाई को पेश करने पर लोगों का हँसना और मज़ाक उड़ाना कोई नई बात नहीं है। फिरौन और उसके दरबार ने भी मूसा (अलैहिस्सलाम) की निशानियों पर हँसे थे। इसलिए अगर आज हमें सच्चाई पर चलने की वजह से लोगों का मज़ाक उठाना पड़े, तो हमें निराश नहीं होना चाहिए। तीसरे, यह कि अल्लाह अपने पैगंबरों की मदद करता है और उन्हें कामयाबी देता है। मूसा (अलैहिस्सलाम) को फिरौन के मुकाबले में आखिरकार कामयाबी मिली, और फिरौन को उसके अहंकार की वजह से डुबो दिया गया। यह हमारे लिए एक बड़ी सीख है कि हमें सच्चाई पर डटे रहना चाहिए, चाहे हालात कैसे भी हों, क्योंकि अल्लाह हमेशा सच्चे लोगों के साथ होता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 44-48 — अज़-ज़ुखरुफ

44وَإِنَّهُ لَذِكْرٌ لَّكَ وَلِقَوْمِكَ ۖ وَسَوْفَ تُسْأَلُونَ
और ये (क़ुरान) तुम्हारे लिए और तुम्हारी क़ौम के लिए नसीहत है और अनक़रीब ही तुम लोगों से इसकी बाज़पुर्स की जाएगी
45وَاسْأَلْ مَنْ أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ مِن رُّسُلِنَا أَجَعَلْنَا مِن دُونِ الرَّحْمَٰنِ آلِهَةً يُعْبَدُونَ
और हमने तुमसे पहले अपने जितने पैग़म्बर भेजे हैं उन सब से दरियाफ्त कर देखो क्या हमने ख़ुदा कि सिवा और माबूद बनाएा थे कि उनकी इबादत की जाए
46وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ بِآيَاتِنَا إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَمَلَئِهِ فَقَالَ إِنِّي رَسُولُ رَبِّ الْعَالَمِينَ
और हम ही ने यक़ीनन मूसा को अपनी निशानियाँ देकर फिरऔन और उसके दरबारियों के पास (पैग़म्बर बनाकर) भेजा था तो मूसा ने कहा कि मैं सारे जहॉन के पालने वाले (ख़ुदा) का रसूल हूँ
47فَلَمَّا جَاءَهُم بِآيَاتِنَا إِذَا هُم مِّنْهَا يَضْحَكُونَ
तो जब मूसा उन लोगों के पास हमारे मौजिज़े लेकर आए तो वह लोग उन मौजिज़ों की हँसी उड़ाने लगे
48وَمَا نُرِيهِم مِّنْ آيَةٍ إِلَّا هِيَ أَكْبَرُ مِنْ أُخْتِهَا ۖ وَأَخَذْنَاهُم بِالْعَذَابِ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ
और हम जो मौजिज़ा उन को दिखाते थे वह दूसरे से बढ़ कर होता था और आख़िर हमने उनको अज़ाब में गिरफ्तार किया ताकि ये लोग बाज़ आएँ
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अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 46

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Tuesday, August 18, 2026

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