अज़-ज़ुखरुफ · 45/89
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
وَاسْأَلْ مَنْ أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ مِن رُّسُلِنَا أَجَعَلْنَا مِن دُونِ الرَّحْمَٰنِ آلِهَةً يُعْبَدُونَ ۝٤٥
Was`al man arsalnaa min qablika mir Rusulinaaa aja`alnaa min doonir Rahmaani aalihatany yu badoon
📖 हिंदी अर्थ
और हमने तुमसे पहले अपने जितने पैग़म्बर भेजे हैं उन सब से दरियाफ्त कर देखो क्या हमने ख़ुदा कि सिवा और माबूद बनाएा थे कि उनकी इबादत की जाए

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَاسْأَلْ: और पूछिए
  • مَنْ أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ مِن رُسُلِنَا: हमारे उन रसूलों (पैगंबरों) के अनुयायियों से जिन्हें हमने आपसे पहले भेजा
  • أَجَعَلْنَا: क्या हमने बनाया/ठहराया
  • مِن دُونِ الرَّحْمَٰنِ: रहमान (अल्लाह) के अलावा
  • آلِهَةً يُعْبَدُونَ: ऐसे पूज्य (माबूद) जिनकी पूजा की जाती हो

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप उन लोगों से पूछिए जो आपसे पहले भेजे गए रसूलों के अनुयायी और उनकी शरीअत (किताबों) के जानकार हैं — चाहे वे अहले-किताब हों या अन्य — कि क्या हमारे किसी रसूल ने कभी यह पैगाम दिया था कि रहमान (अल्लाह) के अलावा किसी और की पूजा की जाए? क्या किसी नबी ने लोगों को अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत की दावत दी थी?

इस सवाल का जवाब साफ़ है — हरगिज़ नहीं! हर रसूल ने यही पैगाम दिया कि अल्लाह की इबादत करो, उसका कोई शरीक नहीं। सभी पैगंबरों की दावत एक ही थी — तौहीद (एकेश्वरवाद) और अल्लाह के सिवा हर चीज़ की पूजा से रोकना। यह सवाल दरअसल मक्का के मुशरिकों को जवाब देने के लिए था, ताकि उन्हें बता दिया जाए कि उनका शिर्क (बहुदेववाद) किसी भी नबी की सुन्नत और किसी भी आसमानी किताब के खिलाफ़ है।

यह भी बताया गया है कि नबी ﷺ ने मेराज (इसरा) की रात जिन पैगंबरों से मुलाकात की थी, उन्हीं से यह सवाल पूछा गया — और उन सभी ने इस बात की गवाही दी कि वे सब अल्लाह की इबादत की दावत देने वाले थे, किसी और की नहीं।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि इस्लाम का मूल संदेश कोई नया नहीं है — यह वही पैगाम है जो आदम से लेकर ईसा तक हर नबी लेकर आया। यानी तौहीद (अल्लाह की एकता) ही वह सच्चाई है जिस पर पूरी मानवता का इतिहास इकट्ठा है। जो लोग आज अल्लाह के सिवा दूसरों की पूजा करते हैं, वे दरअसल हर नबी की दावत से मुँह मोड़ रहे हैं। यह आयत हमें इस बात की तसल्ली देती है कि हमारा दीन वही दीन है जो अल्लाह ने हमेशा से भेजा है — साफ़, सरल और फ़ितरत के मुताबिक़। आइए हम इसी पैगाम पर क़ायम रहें और अल्लाह की इबादत में किसी को शरीक न करें, क्योंकि यही वह रास्ता है जिस पर सभी नबी चले और यही वह रास्ता है जो हमें कामयाबी तक पहुँचाता है।



📜 आयत 43-47 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ

43فَاسْتَمْسِكْ بِالَّذِي أُوحِيَ إِلَيْكَ ۖ إِنَّكَ عَلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
तो तुम्हारे पास जो वही भेजी गयी है तुम उसे मज़बूत पकड़े रहो इसमें शक़ नहीं कि तुम सीधी राह पर हो
44وَإِنَّهُ لَذِكْرٌ لَّكَ وَلِقَوْمِكَ ۖ وَسَوْفَ تُسْأَلُونَ
और ये (क़ुरान) तुम्हारे लिए और तुम्हारी क़ौम के लिए नसीहत है और अनक़रीब ही तुम लोगों से इसकी बाज़पुर्स की जाएगी
45وَاسْأَلْ مَنْ أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ مِن رُّسُلِنَا أَجَعَلْنَا مِن دُونِ الرَّحْمَٰنِ آلِهَةً يُعْبَدُونَ
और हमने तुमसे पहले अपने जितने पैग़म्बर भेजे हैं उन सब से दरियाफ्त कर देखो क्या हमने ख़ुदा कि सिवा और माबूद बनाएा थे कि उनकी इबादत की जाए
46وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ بِآيَاتِنَا إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَمَلَئِهِ فَقَالَ إِنِّي رَسُولُ رَبِّ الْعَالَمِينَ
और हम ही ने यक़ीनन मूसा को अपनी निशानियाँ देकर फिरऔन और उसके दरबारियों के पास (पैग़म्बर बनाकर) भेजा था तो मूसा ने कहा कि मैं सारे जहॉन के पालने वाले (ख़ुदा) का रसूल हूँ
47فَلَمَّا جَاءَهُم بِآيَاتِنَا إِذَا هُم مِّنْهَا يَضْحَكُونَ
तो जब मूसा उन लोगों के पास हमारे मौजिज़े लेकर आए तो वह लोग उन मौजिज़ों की हँसी उड़ाने लगे
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीअवतरण स्थान
45आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 45

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Friday, October 2, 2026

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