अज़-ज़ुखरुफ · 64/89
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
إِنَّ اللَّهَ هُوَ رَبِّي وَرَبُّكُمْ فَاعْبُدُوهُ ۚ هَٰذَا صِرَاطٌ مُّسْتَقِيمٌ ۝٦٤
Innal laaha Huwa Rabbee wa Rabbukum fa`budooh; haaza Siraatum Mustaqeem
📖 हिंदी अर्थ
बेशक ख़ुदा ही मेरा और तुम्हार परवरदिगार है तो उसी की इबादत करो यही सीधा रास्ता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • رَبِّي: मेरा पालनहार और स्वामी
  • رَبُّكُمْ: तुम्हारा पालनहार और स्वामी
  • فَاعْبُدُوهُ: तो तुम उसी की इबादत (उपासना) करो
  • صِرَاطٌ مُّسْتَقِيمٌ: सीधा और सही मार्ग

तफ़सीर (व्याख्या):

यह वचन हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) का है, जो उन्होंने अपनी क़ौम से कहा था। वे लोगों को स्पष्ट रूप से बता रहे थे कि मैं कोई पूजनीय या ईश्वर का पुत्र नहीं हूँ, बल्कि मैं अल्लाह का एक साधारण बंदा और उसका रसूल हूँ। मेरा और तुम्हारा पालनहार एक ही है—वह अल्लाह है, जिसने आसमान और ज़मीन पैदा की, जो सबका रिज़्क़ देता है और जिसकी तरफ़ सबको लौटना है।

हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) ने यह बात इसलिए कही ताकि लोग शिर्क (अल्लाह के साथ किसी को साझी ठहराने) से बचें और केवल अल्लाह की इबादत करें। उन्होंने साफ़ कहा कि अल्लाह ही मेरा रब है और वही तुम्हारा रब है, इसलिए तुम सब उसी की इबादत करो, उसके साथ किसी को शरीक न करो। यही तौहीद (एकेश्वरवाद) का पैग़ाम है, जो हर नबी लेकर आया।

फिर उन्होंने कहा: "यह सीधा मार्ग है"—यानी यही वह रास्ता है जो अल्लाह तक पहुँचाता है, इसमें कोई टेढ़ापन नहीं, कोई उलझन नहीं। यह वही दीन है जो अल्लाह ने अपने सभी नबियों के ज़रिए भेजा। जो इस रास्ते पर चलेगा, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होगा, और जो इससे हटेगा, वह गुमराही में पड़ेगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम का पैग़ाम कोई नया नहीं है, बल्कि यही वह पैग़ाम है जो हर नबी ने दिया। हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) से लेकर हमारे नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तक, सभी ने एक ही बात कही—अल्लाह की इबादत करो और उसके साथ किसी को शरीक न करो। यही वह सीधा रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाता है।

आज भी हमारी कामयाबी इसी में है कि हम अपने जीवन को अल्लाह की इबादत के लिए समर्पित करें, उसके हुक्मों पर चलें और उसकी रहमत के तलबगार रहें। यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह हमसे कितना करीब है—वह हमारा रब है, हमारा पालनहार है, हमारी हर ज़रूरत को पूरा करने वाला है। हमें बस उसी की तरफ़ रुजू करना है और उसी से मदद माँगनी है। यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है, और यही वह रास्ता है जो हमें इस दुनिया की बेहतरी और आख़िरत की नजात दिलाएगा।



📜 आयत 62-66 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ

62وَلَا يَصُدَّنَّكُمُ الشَّيْطَانُ ۖ إِنَّهُ لَكُمْ عَدُوٌّ مُّبِينٌ
और (कहीं) शैतान तुम लोगों को (इससे) रोक न दे वही यक़ीनन तुम्हारा खुल्लम खुल्ला दुश्मन है
63وَلَمَّا جَاءَ عِيسَىٰ بِالْبَيِّنَاتِ قَالَ قَدْ جِئْتُكُم بِالْحِكْمَةِ وَلِأُبَيِّنَ لَكُم بَعْضَ الَّذِي تَخْتَلِفُونَ فِيهِ ۖ فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ
और जब ईसा वाज़ेए व रौशन मौजिज़े लेकर आये तो (लोगों से) कहा मैं तुम्हारे पास दानाई (की किताब) लेकर आया हूँ ताकि बाज़ बातें जिन में तुम लोग एख्तेलाफ करते थे तुमको साफ-साफ बता दूँ तो तुम लोग ख़ुदा से डरो और मेरा कहा मानो
64إِنَّ اللَّهَ هُوَ رَبِّي وَرَبُّكُمْ فَاعْبُدُوهُ ۚ هَٰذَا صِرَاطٌ مُّسْتَقِيمٌ
बेशक ख़ुदा ही मेरा और तुम्हार परवरदिगार है तो उसी की इबादत करो यही सीधा रास्ता है
65فَاخْتَلَفَ الْأَحْزَابُ مِن بَيْنِهِمْ ۖ فَوَيْلٌ لِّلَّذِينَ ظَلَمُوا مِنْ عَذَابِ يَوْمٍ أَلِيمٍ
तो इनमें से कई फिरक़े उनसे एख्तेलाफ करने लगे तो जिन लोगों ने ज़ुल्म किया उन पर दर्दनांक दिन के अज़ब से अफ़सोस है
66هَلْ يَنظُرُونَ إِلَّا السَّاعَةَ أَن تَأْتِيَهُم بَغْتَةً وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ
क्या ये लोग बस क़यामत के ही मुन्ज़िर बैठे हैं कि अचानक ही उन पर आ जाए और उन को ख़बर तक न हो
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीअवतरण स्थान
64आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 64

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Friday, October 2, 2026

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