Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الأَحْزَابُ: गिरोह, समूह, फ़िर्के।
- فَوَيْلٌ: विनाश है, हलाकत है, बड़ी बुराई है।
- يَوْمٍ أَلِيمٍ: दर्दनाक दिन, यानी क़ियामत का दिन।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) के मामले में अहले-किताब (यहूदियों और ईसाइयों) के आपसी मतभेदों की ओर इशारा करती है। जब हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी रिसालत (पैग़म्बरी) का ऐलान किया, तो बनी-इसराइल के लोग अलग-अलग गिरोहों में बंट गए। कुछ ने उन्हें अल्लाह का बंदा और रसूल मानकर ईमान लाया, जो सच्चा और सही रास्ता था। लेकिन अधिकतर लोगों ने गुमराही का रास्ता अपनाया और ईसा (अलैहिस्सलाम) के बारे में झूठे अक़ीदे (विश्वास) बना लिए — किसी ने उन्हें अल्लाह का बेटा कहा, किसी ने खुद अल्लाह ही मान लिया, और किसी ने यह कहा कि ईसा और उनकी माँ (मरियम) दोनों पूजा के लायक़ हैं। यहाँ तक कि कुछ ने "तीन ख़ुदाओं" (तत्ववाद) का अक़ीदा भी बना लिया। ये सारे विचार पूरी तरह गलत और अल्लाह की पाक ज़ात के खिलाफ हैं — अल्लाह इन सब बातों से बहुत ऊपर और पाक है।
यह आयत बताती है कि यह मतभेद बाहर से नहीं आया, बल्कि उन्हीं लोगों के बीच से पैदा हुआ। उन्होंने खुद अपने हाथों अपने दीन (धर्म) को तबाह कर लिया। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिन लोगों ने यह ज़ुल्म किया — यानी ईसा (अलैहिस्सलाम) के बारे में झूठी बातें कहीं और उन्हें अल्लाह का दर्जा दे दिया या उन्हें अल्लाह का बेटा कहा — उनके लिए विनाश और हलाकत है। उनका अंजाम क़ियामत के दिन बहुत दर्दनाक अज़ाब (यातना) होगा, जिससे बचना नामुमकिन होगा।
दावती पहलू:
यह आयत हमें एक बहुत बड़ी सीख देती है कि अल्लाह के बारे में और उसके पैग़म्बरों के बारे में सिर्फ़ वही बातें कहनी चाहिए जो अल्लाह ने खुद बताई हैं। हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) अल्लाह के नेक बंदे, महान रसूल और मरियम के बेटे थे — वे न तो अल्लाह हैं, न अल्लाह के बेटे, और न ही तीन ख़ुदाओं में से एक। इस्लाम हमें सिखाता है कि तौहीद (अल्लाह की एकता) ही सच्चा रास्ता है। जो लोग इस सच्चाई पर क़ायम रहेंगे, वे क़ियामत के दिन सुरक्षित रहेंगे और जिन्होंने झूठे अक़ीदे बनाए, उनका अंजाम बहुत बुरा होगा। आइए, हम अल्लाह के बारे में सिर्फ़ वही मानें जो क़ुरआन और सही सुन्नत में आया है, और अपने ईमान को हर तरह की गुमराही से बचाएँ। यही कामयाबी और नजात (मुक्ति) का रास्ता है।
📜 आयत 63-67 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 65
सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 65 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो इनमें से कई फिरक़े उनसे एख्तेलाफ करने लगे तो…सूरा आयत 65/89 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अज़-ज़ुखरुफ सुनें, सूरा अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, सूरा अज़-ज़ुखरुफ mp3, सूरा अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 63–67. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अज़-ज़ुखरुफ
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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