अज़-ज़ुखरुफ · 63/89
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
وَلَمَّا جَاءَ عِيسَىٰ بِالْبَيِّنَاتِ قَالَ قَدْ جِئْتُكُم بِالْحِكْمَةِ وَلِأُبَيِّنَ لَكُم بَعْضَ الَّذِي تَخْتَلِفُونَ فِيهِ ۖ فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ ۝٦٣
Wa lammaa jaaa`a `Eesaa bilbaiyinaati qaala qad ji`tukum bil Hikmati wa li-ubaiyina lakum ba`dal lazee takhtalifoona feehi fattaqul laaha wa atee`oon
📖 हिंदी अर्थ
और जब ईसा वाज़ेए व रौशन मौजिज़े लेकर आये तो (लोगों से) कहा मैं तुम्हारे पास दानाई (की किताब) लेकर आया हूँ ताकि बाज़ बातें जिन में तुम लोग एख्तेलाफ करते थे तुमको साफ-साफ बता दूँ तो तुम लोग ख़ुदा से डरो और मेरा कहा मानो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • बिल-बय्यिनात: स्पष्ट प्रमाण और चमत्कार।
  • बिल-हिक्मत: नबुव्वत (पैग़म्बरी) और ईश्वरीय ज्ञान।
  • तख़्तलिफ़ून: जिसमें तुम मतभेद करते हो।

तफ़सीर:

जब हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) बनी इसराइल के पास स्पष्ट प्रमाणों और चमत्कारों के साथ आए, तो उन्होंने अपनी क़ौम से कहा: "मैं तुम्हारे पास अल्लाह की ओर से हिक्मत (नबुव्वत और ईश्वरीय ज्ञान) लेकर आया हूँ, और मेरा एक उद्देश्य यह भी है कि मैं तुम्हें उन बातों में से कुछ बातें स्पष्ट कर दूँ जिनमें तुम मतभेद करते हो।" यानी धार्मिक मामलों में जो असहमतियाँ और उलझनें तुम्हारे बीच पैदा हो गई थीं, मैं उनमें से कुछ का समाधान और सही रास्ता बताने आया हूँ। इसलिए अल्लाह से डरो, उसके आदेशों का पालन करो और उसकी मनाही से बचो, और मेरी आज्ञा का पालन करो, क्योंकि मैं तुम्हें अल्लाह की तरफ़ बुलाता हूँ।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के पैग़म्बर हमेशा लोगों को एकता, सच्चाई और ईश्वरीय आज्ञाकारिता की ओर बुलाते रहे हैं। हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी उम्मत को तक़वा (अल्लाह का डर) और अपनी इताअत (आज्ञापालन) की नसीहत दी, क्योंकि यही दोनों चीज़ें इंसान की भलाई और सफलता की कुंजी हैं। आज भी हमारे लिए यही रास्ता सबसे बेहतरीन है — अल्लाह से डरना, उसके हुक्मों पर चलना और उसके रसूल की सुन्नत को अपनाना। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देता है।



📜 आयत 61-65 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ

61وَإِنَّهُ لَعِلْمٌ لِّلسَّاعَةِ فَلَا تَمْتَرُنَّ بِهَا وَاتَّبِعُونِ ۚ هَٰذَا صِرَاطٌ مُّسْتَقِيمٌ
और वह तो यक़ीनन क़यामत की एक रौशन दलील है तुम लोग इसमें हरगिज़ यक़ न करो और मेरी पैरवी करो यही सीधा रास्ता है
62وَلَا يَصُدَّنَّكُمُ الشَّيْطَانُ ۖ إِنَّهُ لَكُمْ عَدُوٌّ مُّبِينٌ
और (कहीं) शैतान तुम लोगों को (इससे) रोक न दे वही यक़ीनन तुम्हारा खुल्लम खुल्ला दुश्मन है
63وَلَمَّا جَاءَ عِيسَىٰ بِالْبَيِّنَاتِ قَالَ قَدْ جِئْتُكُم بِالْحِكْمَةِ وَلِأُبَيِّنَ لَكُم بَعْضَ الَّذِي تَخْتَلِفُونَ فِيهِ ۖ فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ
और जब ईसा वाज़ेए व रौशन मौजिज़े लेकर आये तो (लोगों से) कहा मैं तुम्हारे पास दानाई (की किताब) लेकर आया हूँ ताकि बाज़ बातें जिन में तुम लोग एख्तेलाफ करते थे तुमको साफ-साफ बता दूँ तो तुम लोग ख़ुदा से डरो और मेरा कहा मानो
64إِنَّ اللَّهَ هُوَ رَبِّي وَرَبُّكُمْ فَاعْبُدُوهُ ۚ هَٰذَا صِرَاطٌ مُّسْتَقِيمٌ
बेशक ख़ुदा ही मेरा और तुम्हार परवरदिगार है तो उसी की इबादत करो यही सीधा रास्ता है
65فَاخْتَلَفَ الْأَحْزَابُ مِن بَيْنِهِمْ ۖ فَوَيْلٌ لِّلَّذِينَ ظَلَمُوا مِنْ عَذَابِ يَوْمٍ أَلِيمٍ
तो इनमें से कई फिरक़े उनसे एख्तेलाफ करने लगे तो जिन लोगों ने ज़ुल्म किया उन पर दर्दनांक दिन के अज़ब से अफ़सोस है
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीअवतरण स्थान
63आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 63

सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 63 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब ईसा वाज़ेए व रौशन मौजिज़े लेकर आये तो…

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Friday, October 2, 2026

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