अद-दुखान · 31/59
अनुवाद उच्चारण — सूरा अद-दुखान
مِن فِرْعَوْنَ ۚ إِنَّهُ كَانَ عَالِيًا مِّنَ الْمُسْرِفِينَ ۝٣١
Min Fir`awn; innahoo kaana `aaliyam minal musrifeen
📖 हिंदी अर्थ
वह बेशक सरकश और हद से बाहर निकल गया था

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • फ़िरऔन: मिस्र का अत्याचारी शासक।
  • आलियन: अत्यधिक घमंडी, सिर उठाए हुए, अहंकारी।
  • मुसरिफ़ीन: हद से गुज़रने वाले, अत्याचारी, सीमा का उल्लंघन करने वाले।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने अपने बंदों (बनी इसराईल) पर की गई महान कृपा का ज़िक्र करते हुए बताया कि हमने उन्हें फ़िरऔन के अत्याचार और उसके ज़ुल्म से नजात दी। फ़िरऔन एक ऐसा शासक था जो अपनी सत्ता और ताकत के घमंड में चूर था। उसने अपने आप को इतना ऊँचा समझा कि उसने अल्लाह की इबादत से मुँह मोड़ लिया और अपनी प्रजा पर जबरदस्ती और अत्याचार किए। वह उन लोगों में से था जो हद से गुज़र गए — उसने अल्लाह की आयतों को झुठलाया, अपने को ईश्वर कहलाने का दावा किया, और अल्लाह के नेक बंदों को बेरहमी से सताया।

यह आयत हमें सिखाती है कि घमंड और अहंकार इंसान को अल्लाह की राह से भटका देता है। फ़िरऔन की तरह जो लोग अपनी ताकत और ऐशो-आराम पर इतराते हैं, वे अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल हो जाते हैं और अपने अंजाम को भूल जाते हैं। लेकिन अल्लाह की रहमत देखिए — वह अपने बंदों को ज़ालिमों के चंगुल से निकालता है और उन्हें आज़ादी देता है। यह हर उस इंसान के लिए एक पैग़ाम है जो किसी ज़ुल्म या मुसीबत में फँसा हो कि अल्लाह पर भरोसा रखो, वही सबसे बड़ा मददगार है। और जो लोग घमंड करते हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है — फ़िरऔन जैसा ताकतवर बादशाह भी अल्लाह के आज़ाब से न बच सका, और आज उसका नाम इतिहास में ज़ालिमों के रूप में याद किया जाता है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के सामने झुकें, उसकी इबादत करें, और घमंड से बचें — क्योंकि घमंड इंसान को इंसानियत से गिरा देता है और अल्लाह की नाराज़गी का कारण बनता है।



📜 आयत 29-33 — सूरा अद-दुखान

29فَمَا بَكَتْ عَلَيْهِمُ السَّمَاءُ وَالْأَرْضُ وَمَا كَانُوا مُنظَرِينَ
तो उन लोगों पर आसमान व ज़मीन को भी रोना न आया और न उन्हें मोहलत ही दी गयी
30وَلَقَدْ نَجَّيْنَا بَنِي إِسْرَائِيلَ مِنَ الْعَذَابِ الْمُهِينِ
और हमने बनी इसराईल को ज़िल्लत के अज़ाब से फिरऔन (के पन्जे) से नजात दी
31مِن فِرْعَوْنَ ۚ إِنَّهُ كَانَ عَالِيًا مِّنَ الْمُسْرِفِينَ
वह बेशक सरकश और हद से बाहर निकल गया था
32وَلَقَدِ اخْتَرْنَاهُمْ عَلَىٰ عِلْمٍ عَلَى الْعَالَمِينَ
और हमने बनी इसराईल को समझ बूझ कर सारे जहॉन से बरगुज़ीदा किया था
33وَآتَيْنَاهُم مِّنَ الْآيَاتِ مَا فِيهِ بَلَاءٌ مُّبِينٌ
और हमने उनको ऐसी निशानियाँ दी थीं जिनमें (उनकी) सरीही आज़माइश थी
अद-दुखानकुरान सूची
59आयत
मक्कीअवतरण स्थान
31आयत

अनुवाद — अद-दुखान 31

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Friday, October 2, 2026

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