अद-दुखान · 58/59
अनुवाद उच्चारण — अद-दुखान
فَإِنَّمَا يَسَّرْنَاهُ بِلِسَانِكَ لَعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَ ۝٥٨
Fa innamaa yassarnaahu bilisaanika la`allahum yatazakkaroon
📖 हिंदी अर्थ
तो हमने इस क़ुरान को तुम्हारी ज़बान में (इसलिए) आसान कर दिया है ताकि ये लोग नसीहत पकड़ें तो

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَسَّرْنَاهُ: हमने इसे आसान कर दिया — यहाँ "इसे" से अभिप्राय क़ुरआन है।
  • بِلِسَانِكَ: तुम्हारी ज़बान (भाषा) में — यानी अरबी भाषा में।
  • يَتَذَكَّرُونَ: वे नसीहत हासिल करें, सीखें और समझें।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में अपने नबी ﷺ पर बड़ा एहसान जताते हुए फ़रमाते हैं कि हमने इस क़ुरआन को तुम्हारी ज़बान (अरबी भाषा) में उतारकर बेहद आसान कर दिया है — इसके लफ़्ज़ भी आसान हैं और इसके मायने भी साफ़ और समझने योग्य हैं। अल्लाह ने यह क़ुरआन किसी दुश्वार और पेचीदा ज़बान में नाज़िल नहीं किया, बल्कि उसी ज़बान में नाज़िल किया जो तुम्हारी क़ौम (अरब) बोलती थी, ताकि वे इसे आसानी से समझ सकें, इस पर ग़ौर-फ़िक्र कर सकें, और इसकी नसीहतों से सबक़ हासिल करके अपनी ग़लतियों से बाज़ आएँ।

यह अल्लाह की रहमत और मेहरबानी है कि उसने अपनी किताब को इंसानों की समझ के अनुकूल बनाया, उसमें कोई अजनबी या मुश्किल भाषा नहीं रखी, बल्कि वही ज़बान चुनी जो लोग बोलते थे, ताकि हर कोई — चाहे वह आम आदमी हो या ख़ास — उससे फ़ायदा उठा सके। अल्लाह का मक़सद यह नहीं कि क़ुरआन सिर्फ़ पढ़ा जाए और छोड़ दिया जाए, बल्कि उसका असली मक़सद यह है कि लोग इसकी आयतों पर ग़ौर करें, इसकी हिदायतों को अपनी ज़िंदगी में अपनाएँ, और इसके ज़रिए अपने दिलों को पाक करें।

यह आयत हमें बताती है कि क़ुरआन को समझना हर मुसलमान का हक़ है, और अल्लाह ने इसे आसान बनाकर यह ज़िम्मेदारी हम पर डाली है कि हम इसे पढ़ें, समझें, और उस पर अमल करें। जो लोग क़ुरआन से दूर रहते हैं, वह अपनी भलाई से ख़ुद को महरूम रखते हैं। अल्लाह ने यह किताब इसलिए नाज़िल की ताकि हम जागें, सोए न रहें, और अपनी आख़िरत की तैयारी करें। यह किताब हमारे लिए रहमत, शिफ़ा और नूर है — बशर्ते हम इसे सिर्फ़ पढ़ने तक न रोकें, बल्कि इस पर अमल करें और इसे अपनी ज़िंदगी का नक़्शा बनाएँ। अल्लाह तआला हम सबको क़ुरआन को समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 56-59 — अद-दुखान

56لَا يَذُوقُونَ فِيهَا الْمَوْتَ إِلَّا الْمَوْتَةَ الْأُولَىٰ ۖ وَوَقَاهُمْ عَذَابَ الْجَحِيمِ
वहाँ पहली दफ़ा की मौत के सिवा उनको मौत की तलख़ी चख़नी ही न पड़ेगी और ख़ुदा उनको दोज़ख़ के अज़ाब से महफूज़ रखेगा
57فَضْلًا مِّن رَّبِّكَ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ
(ये) तुम्हारे परवरदिगार का फज़ल है यही तो बड़ी कामयाबी है
58فَإِنَّمَا يَسَّرْنَاهُ بِلِسَانِكَ لَعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَ
तो हमने इस क़ुरान को तुम्हारी ज़बान में (इसलिए) आसान कर दिया है ताकि ये लोग नसीहत पकड़ें तो
59فَارْتَقِبْ إِنَّهُم مُّرْتَقِبُونَ
(नतीजे के) तुम भी मुन्तज़िर रहो ये लोग भी मुन्तज़िर हैं
अद-दुखानकुरान सूची
59आयत
मक्कीRevelation
58आयत

अनुवाद — अद-दुखान 58

सूरा अद-दुखान आयत 58 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो हमने इस क़ुरान को तुम्हारी ज़बान में (इसलिए) आसान…

सूरा आयत 58/59 — अद-दुखान الدخان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अद-दुखान सुनें, अद-दुखान अनुवाद, अद-दुखान mp3, अद-दुखान pdf. आयत 56–59. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए