अद-दुखान · 57/59
अनुवाद उच्चारण — अद-दुखान
فَضْلًا مِّن رَّبِّكَ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ ۝٥٧
Fadlam mir rabbik; zaalika huwal fawzul `azeem
📖 हिंदी अर्थ
(ये) तुम्हारे परवरदिगार का फज़ल है यही तो बड़ी कामयाबी है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَضْلًا: यह अल्लाह की ओर से विशेष कृपा और एहसान है, जो उसके बंदों पर उसका अनुग्रह है।
  • الْفَوْزُ الْعَظِيمُ: वह महान सफलता और कामयाबी जिससे बड़ी कोई सफलता नहीं हो सकती।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन मुत्तक़ियों (परहेज़गारों) के सम्मान में है जिन्होंने दुनिया में अल्लाह का डर रखा और उसकी आज्ञाओं का पालन किया। अल्लाह तआला उन्हें जन्नत में ऐसा सुख और आनंद प्रदान करेगा जिसमें मौत का कोई स्थान नहीं होगा—वे केवल एक बार मौत का स्वाद चखेंगे जो दुनिया में आई, और उसके बाद हमेशा की ज़िंदगी पाएँगे। साथ ही, अल्लाह उन्हें जहन्नम की आग से बचाएगा, और यह सब कुछ उसकी ओर से विशेष कृपा और एहसान के रूप में होगा, न कि केवल उनके कर्मों के बदले में—क्योंकि अल्लाह की रहमत और उदारता उसके बंदों पर असीम है।

यही वह चीज़ है जिसे अल्लाह ने "फ़ौज़-ए-अज़ीम" (महान सफलता) कहा है—यानी जन्नत में दाख़िल होना और जहन्नम से निजात पाना। यह वह कामयाबी है जिसके आगे दुनिया की हर सफलता बेमानी और फ़ानी है। दुनिया में इंसान जो भी हासिल करता है—धन, पद, शोहरत—वह सब कुछ पल भर का है, लेकिन यह सफलता हमेशा रहने वाली और हर दुख-दर्द से पाक है।

इस आयत में अल्लाह तआला अपने प्यारे नबी ﷺ को संबोधित करते हुए फ़रमाते हैं कि यह सब कुछ तेरे रब की ओर से उन बंदों पर एहसान है जिन्होंने तक़वा अपनाया। यह बात हमारे लिए बहुत खुशख़बरी है—अगर हम अल्लाह के डर के साथ ज़िंदगी गुज़ारें, उसकी राह में चलें, तो यही महान सफलता हमारा इंतज़ार कर रही है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का दरवाज़ा हमेशा खुला है। वह चाहता है कि हम उसकी ओर रुजू करें, उसकी रहमत के भूखे रहें। जो लोग दुनिया में अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल हैं, उन्हें इस आयत को पढ़कर सोचना चाहिए—क्या यह महान सफलता उन चंद दिनों की खुशियों के बदले नहीं मिल सकती जो फ़ानी हैं? अल्लाह ने अपने बंदों पर कृपा करने का वादा किया है, और वह अपने वादे में कभी ख़िलाफ़ नहीं करता। आओ, हम सब अपने रब की ओर लौटें, उसकी रहमत के तले आएँ, और उस महान सफलता को पाने की कोशिश करें जो हमेशा रहने वाली है। यही असली कामयाबी है—बाकी सब कुछ मिट्टी के खिलौने हैं।



📜 आयत 55-59 — अद-दुखान

55يَدْعُونَ فِيهَا بِكُلِّ فَاكِهَةٍ آمِنِينَ
वहाँ इत्मेनान से हर किस्म के मेवे मंगवा कर खायेंगे
56لَا يَذُوقُونَ فِيهَا الْمَوْتَ إِلَّا الْمَوْتَةَ الْأُولَىٰ ۖ وَوَقَاهُمْ عَذَابَ الْجَحِيمِ
वहाँ पहली दफ़ा की मौत के सिवा उनको मौत की तलख़ी चख़नी ही न पड़ेगी और ख़ुदा उनको दोज़ख़ के अज़ाब से महफूज़ रखेगा
57فَضْلًا مِّن رَّبِّكَ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ
(ये) तुम्हारे परवरदिगार का फज़ल है यही तो बड़ी कामयाबी है
58فَإِنَّمَا يَسَّرْنَاهُ بِلِسَانِكَ لَعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَ
तो हमने इस क़ुरान को तुम्हारी ज़बान में (इसलिए) आसान कर दिया है ताकि ये लोग नसीहत पकड़ें तो
59فَارْتَقِبْ إِنَّهُم مُّرْتَقِبُونَ
(नतीजे के) तुम भी मुन्तज़िर रहो ये लोग भी मुन्तज़िर हैं
अद-दुखानकुरान सूची
59आयत
मक्कीRevelation
57आयत

अनुवाद — अद-दुखान 57

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Tuesday, August 18, 2026

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