अल-जासिया · 20/37
अनुवाद उच्चारण — अल-जासिया
هَٰذَا بَصَائِرُ لِلنَّاسِ وَهُدًى وَرَحْمَةٌ لِّقَوْمٍ يُوقِنُونَ ۝٢٠
Haazaa basaaa`iru linnaasi wa hudanw wa rahmatul liqawminy yooqinoon
📖 हिंदी अर्थ
ये (क़ुरान) लोगों (की) हिदायत के लिए दलीलो का मजमूआ है और बातें करने वाले लोगों के लिए (अज़सरतापा) हिदायत व रहमत है

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

यह क़ुरआन, जो हमने आप पर उतारा है, लोगों के लिए दिलों की आँखें खोलने वाला नूर है, जिससे वे सत्य को असत्य से अलग पहचान सकते हैं और सीधे रास्ते की ओर मार्गदर्शन पा सकते हैं। यह उन लोगों के लिए हिदायत और रहमत है जो यक़ीन रखते हैं कि यह अल्लाह की ओर से उतारा गया सच्चा कलाम है।

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह क़ुरआन लोगों के लिए बसीरत (दृष्टि) है, यानी यह उन्हें सच और झूठ में फ़र्क़ करने की क्षमता देता है। यह अंधेरों से निकालकर रोशनी की ओर ले जाता है। जो लोग इस पर विश्वास करते हैं और इसके निर्देशों पर चलते हैं, उनके लिए यह रहमत बन जाता है, क्योंकि यह उन्हें जहन्नम के अज़ाब से बचाकर जन्नत की तरफ ले जाता है।

यह क़ुरआन सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि उस पर अमल करने के लिए उतारा गया है। जो लोग यक़ीन के साथ इस पर अमल करते हैं, अल्लाह उन्हें सीधा रास्ता दिखाता है और उनके दिलों को सुकून अता करता है। यही वह लोग हैं जो दुनिया में भी कामयाब हैं और आख़िरत में भी। अल्लाह तआला ने इस क़ुरआन को हर उस इंसान के लिए रहमत बनाया है जो इसे अपनाए और इसकी तालीमात पर चले।



📜 आयत 18-22 — अल-जासिया

18ثُمَّ جَعَلْنَاكَ عَلَىٰ شَرِيعَةٍ مِّنَ الْأَمْرِ فَاتَّبِعْهَا وَلَا تَتَّبِعْ أَهْوَاءَ الَّذِينَ لَا يَعْلَمُونَ
फिर (ऐ रसूल) हमने तुमको दीन के खुले रास्ते पर क़ायम किया है तो इसी (रास्ते) पर चले जाओ और नादानों की ख्वाहिशो की पैरवी न करो
19إِنَّهُمْ لَن يُغْنُوا عَنكَ مِنَ اللَّهِ شَيْئًا ۚ وَإِنَّ الظَّالِمِينَ بَعْضُهُمْ أَوْلِيَاءُ بَعْضٍ ۖ وَاللَّهُ وَلِيُّ الْمُتَّقِينَ
ये लोग ख़ुदा के सामने तुम्हारे कुछ भी काम न आएँगे और ज़ालिम लोग एक दूसरे के मददगार हैं और ख़ुदा तो परहेज़गारों का मददगार है
20هَٰذَا بَصَائِرُ لِلنَّاسِ وَهُدًى وَرَحْمَةٌ لِّقَوْمٍ يُوقِنُونَ
ये (क़ुरान) लोगों (की) हिदायत के लिए दलीलो का मजमूआ है और बातें करने वाले लोगों के लिए (अज़सरतापा) हिदायत व रहमत है
21أَمْ حَسِبَ الَّذِينَ اجْتَرَحُوا السَّيِّئَاتِ أَن نَّجْعَلَهُمْ كَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ سَوَاءً مَّحْيَاهُمْ وَمَمَاتُهُمْ ۚ سَاءَ مَا يَحْكُمُونَ
जो लोग बुरा काम किया करते हैं क्या वह ये समझते हैं कि हम उनको उन लोगों के बराबर कर देंगे जो ईमान लाए और अच्छे अच्छे काम भी करते रहे और उन सब का जीना मरना एक सा होगा ये लोग (क्या) बुरे हुक्म लगाते हैं
22وَخَلَقَ اللَّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ بِالْحَقِّ وَلِتُجْزَىٰ كُلُّ نَفْسٍ بِمَا كَسَبَتْ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ
और ख़ुदा ने सारे आसमान व ज़मीन को हिकमत व मसलेहत से पैदा किया और ताकि हर शख़्श को उसके किये का बदला दिया जाए और उन पर (किसी तरह का) ज़ुल्म नहीं किया जाएगा
अल-जासियाकुरान सूची
37आयत
मक्कीRevelation
20आयत

अनुवाद — अल-जासिया 20

सूरा अल-जासिया आयत 20 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये (क़ुरान) लोगों (की) हिदायत के लिए दलीलो का मजमूआ…

सूरा आयत 20/37 — अल-जासिया الجاثية (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-जासिया सुनें, अल-जासिया अनुवाद, अल-जासिया mp3, अल-जासिया pdf. आयत 18–22. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए