Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- اجْتَرَحُوا – कमाए, अर्जित किए
- السَّيِّئَاتِ – बुरे कर्म, पाप
- سَوَاءً – बराबर, समान
- مَّحْيَاهُمْ – उनका जीवन
- مَمَاتُهُمْ – उनकी मृत्यु
- سَاءَ مَا يَحْكُمُونَ – बहुत बुरा है जो वे फ़ैसला करते हैं
तफ़सीर:
क्या वे लोग, जिन्होंने अपने हाथों से बुराइयाँ कमाईं, अल्लाह के रसूलों को झुठलाया, अपने रब के हुक्मों की अवहेलना की और उसके सिवा दूसरों की इबादत की, यह समझ बैठे हैं कि हम उन्हें उन लोगों के बराबर कर देंगे जो ईमान लाए, अच्छे कर्म किए और सिर्फ़ अल्लाह की इबादत में अपना जीवन बिताया? क्या वे सोचते हैं कि दुनिया और आख़िरत में उनका हाल एक जैसा होगा?
यह सोचना कितनी बड़ी भूल है! अल्लाह तआला ने दुनिया में काफ़िर और मोमिन को जीवन के साधन दिए, दोनों खाते-पीते हैं, दोनों को सेहत और बीमारी आती है, लेकिन यह समानता सिर्फ़ दुनिया तक है। आख़िरत में दोनों का हाल हरगिज़ एक जैसा नहीं होगा। मोमिन की मौत ईमान पर होती है और उसे जन्नत मिलती है, जबकि काफ़िर की मौत कुफ्र पर होती है और उसका अंजाम जहन्नम है। जैसे उनके जीवन और मृत्यु में ज़मीन-आसमान का फ़र्क़ है, वैसे ही उनके अंजाम में भी बहुत बड़ा फ़र्क़ होगा।
यह कैसा बुरा फ़ैसला है जो ये लोग करते हैं! वे पापियों और नेक लोगों को एक दर्जे पर रखते हैं, जबकि अल्लाह की रहमत और अद्ल इससे कहीं बेहतर है। अल्लाह ने अपने बंदों पर ज़ुल्म नहीं किया, बल्कि हर एक को उसके कर्मों का पूरा-पूरा बदला देगा।
इस आयत में हमारे लिए बड़ी नसीहत है कि हम अपने जीवन को संवारें, अच्छे कर्म करें और अल्लाह की राह पर चलें। जो लोग बुराइयों में लिप्त हैं, वे यह न समझें कि उनका अंजाम नेक लोगों जैसा होगा। अल्लाह का इन्साफ़ बिल्कुल सटीक है – वह हर अच्छे और बुरे कर्म का हिसाब लेगा। हमें चाहिए कि हम अपने जीवन को अल्लाह की इबादत और अच्छे कर्मों से रोशन करें, ताकि हमारा जीवन और मृत्यु दोनों अल्लाह की रहमत से भरे हों।
📜 आयत 19-23 — सूरा अल-जासिया
अनुवाद — अल-जासिया 21
सूरा अल-जासिया आयत 21 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो लोग बुरा काम किया करते हैं क्या वह ये…सूरा आयत 21/37 — सूरा अल-जासिया الجاثية (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-जासिया सुनें, सूरा अल-जासिया अनुवाद, सूरा अल-जासिया mp3, सूरा अल-जासिया pdf. आयत 19–23. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-जासिया
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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