Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- करिहे (करिहू): नफ़रत की, बुरा माना
- मा अन्ज़लल्लाह: जो अल्लाह ने उतारा (क़ुरआन और उसके अहकाम)
- अह्बत: बरबाद कर दिया, नष्ट कर दिया, बेकार कर दिया
तफ़सीर:
यह आयत उन काफ़िरों के हालात बयान कर रही है जिन्होंने अल्लाह के दीन को ठुकराया और उसके रसूल ﷺ की नाफ़रमानी की। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह जो तबाही और बर्बादी उन पर आई, यह उनके अपने कर्मों का नतीजा है। उन्होंने उस चीज़ से नफ़रत की जो अल्लाह ने उतारी — यानी क़ुरआन और उसके अहकाम। उन्हें अल्लाह की तौहीद, उसके हुक्म और उसके रसूल की शिक्षाएँ नागवार गुज़रीं। उन्होंने सच्चाई को जानते हुए भी उसे कबूल नहीं किया, बल्कि उससे दिल में नफ़रत रखी।
जब इंसान की नीयत और दिल की हालत यह हो कि वह अल्लाह की भेजी हुई चीज़ से नफ़रत करे, तो उसके अच्छे से अच्छे काम भी अल्लाह के यहाँ कोई क़द्र नहीं रखते। इसलिए अल्लाह ने उनके आमाल को बरबाद कर दिया — यानी उनके नेक काम, उनकी ख़ैरात, उनके रिश्तेदारी के सिले — सब कुछ अल्लाह ने अकारथ कर दिया, क्योंकि यह सब कुछ शैतान की इताअत और अल्लाह की नाफ़रमानी पर आधारित था। जब बुनियाद ही ख़राब हो, तो इमारत कैसे क़ायम रह सकती है?
यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी सीख है। इंसान के आमाल की क़बूलियत का दारोमदार उसके ईमान और अल्लाह के दीन से मुहब्बत पर है। जिस दिल में क़ुरआन की मुहब्बत हो, अल्लाह के हुक्मों के आगे सर झुकाने की तौफ़ीक़ हो, उसके आमाल अल्लाह के यहाँ बुलंद दर्जा पाते हैं। और जो दिल क़ुरआन से नफ़रत करे, उसकी सारी कोशिशें और मेहनतें आख़िरत में धूल बनकर उड़ जाएँगी।
प्यारे भाइयो और बहनो! हमें अपने दिलों की जाँच करनी चाहिए — क्या हमारे दिलों में क़ुरआन की तिलावत से लज़्ज़त आती है? क्या हमें अल्लाह के हुक्मों पर अमल करने में ख़ुशी मिलती है? अगर हाँ, तो यह अल्लाह की बहुत बड़ी नेमत है। और अगर किसी वजह से दिल में क़ुरआन से उबाऊ या बेरुख़ी महसूस होती है, तो हमें अल्लाह से दुआ करनी चाहिए कि वह हमारे दिलों को क़ुरआन की मुहब्बत से भर दे। याद रखें, क़ुरआन वह रस्सी है जो हमें अल्लाह से जोड़ती है — जो इसे थामेगा वह कभी नहीं भटकेगा, और जो इसे छोड़ेगा वह दुनिया और आख़िरत दोनों में नाकाम होगा।
📜 आयत 7-11 — सूरा मुहम्मद
अनुवाद — मुहम्मद 9
सूरा मुहम्मद आयत 9 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये इसलिए कि ख़ुदा ने जो चीज़ नाज़िल फ़रमायी उसे…सूरा आयत 9/38 — सूरा मुहम्मद محمد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा मुहम्मद सुनें, सूरा मुहम्मद अनुवाद, सूरा मुहम्मद mp3, सूरा मुहम्मद pdf. आयत 7–11. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


