मुहम्मद · 9/38
अनुवाद उच्चारण — सूरा मुहम्मद
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ كَرِهُوا مَا أَنزَلَ اللَّهُ فَأَحْبَطَ أَعْمَالَهُمْ ۝٩
Zaalika bi annahum karihoo maaa anzalal laahu faahbata a`maalahum
📖 हिंदी अर्थ
ये इसलिए कि ख़ुदा ने जो चीज़ नाज़िल फ़रमायी उसे उन्होने (नापसन्द किया) तो ख़ुदा ने उनकी कारस्तानियों को अकारत कर दिया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • करिहे (करिहू): नफ़रत की, बुरा माना
  • मा अन्ज़लल्लाह: जो अल्लाह ने उतारा (क़ुरआन और उसके अहकाम)
  • अह्बत: बरबाद कर दिया, नष्ट कर दिया, बेकार कर दिया

तफ़सीर:

यह आयत उन काफ़िरों के हालात बयान कर रही है जिन्होंने अल्लाह के दीन को ठुकराया और उसके रसूल ﷺ की नाफ़रमानी की। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह जो तबाही और बर्बादी उन पर आई, यह उनके अपने कर्मों का नतीजा है। उन्होंने उस चीज़ से नफ़रत की जो अल्लाह ने उतारी — यानी क़ुरआन और उसके अहकाम। उन्हें अल्लाह की तौहीद, उसके हुक्म और उसके रसूल की शिक्षाएँ नागवार गुज़रीं। उन्होंने सच्चाई को जानते हुए भी उसे कबूल नहीं किया, बल्कि उससे दिल में नफ़रत रखी।

जब इंसान की नीयत और दिल की हालत यह हो कि वह अल्लाह की भेजी हुई चीज़ से नफ़रत करे, तो उसके अच्छे से अच्छे काम भी अल्लाह के यहाँ कोई क़द्र नहीं रखते। इसलिए अल्लाह ने उनके आमाल को बरबाद कर दिया — यानी उनके नेक काम, उनकी ख़ैरात, उनके रिश्तेदारी के सिले — सब कुछ अल्लाह ने अकारथ कर दिया, क्योंकि यह सब कुछ शैतान की इताअत और अल्लाह की नाफ़रमानी पर आधारित था। जब बुनियाद ही ख़राब हो, तो इमारत कैसे क़ायम रह सकती है?

यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी सीख है। इंसान के आमाल की क़बूलियत का दारोमदार उसके ईमान और अल्लाह के दीन से मुहब्बत पर है। जिस दिल में क़ुरआन की मुहब्बत हो, अल्लाह के हुक्मों के आगे सर झुकाने की तौफ़ीक़ हो, उसके आमाल अल्लाह के यहाँ बुलंद दर्जा पाते हैं। और जो दिल क़ुरआन से नफ़रत करे, उसकी सारी कोशिशें और मेहनतें आख़िरत में धूल बनकर उड़ जाएँगी।

प्यारे भाइयो और बहनो! हमें अपने दिलों की जाँच करनी चाहिए — क्या हमारे दिलों में क़ुरआन की तिलावत से लज़्ज़त आती है? क्या हमें अल्लाह के हुक्मों पर अमल करने में ख़ुशी मिलती है? अगर हाँ, तो यह अल्लाह की बहुत बड़ी नेमत है। और अगर किसी वजह से दिल में क़ुरआन से उबाऊ या बेरुख़ी महसूस होती है, तो हमें अल्लाह से दुआ करनी चाहिए कि वह हमारे दिलों को क़ुरआन की मुहब्बत से भर दे। याद रखें, क़ुरआन वह रस्सी है जो हमें अल्लाह से जोड़ती है — जो इसे थामेगा वह कभी नहीं भटकेगा, और जो इसे छोड़ेगा वह दुनिया और आख़िरत दोनों में नाकाम होगा।



📜 आयत 7-11 — सूरा मुहम्मद

7يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِن تَنصُرُوا اللَّهَ يَنصُرْكُمْ وَيُثَبِّتْ أَقْدَامَكُمْ
ऐ ईमानदारों अगर तुम ख़ुदा (के दीन) की मदद करोगे तो वह भी तुम्हारी मदद करेगा और तुम्हें साबित क़दम रखेगा
8وَالَّذِينَ كَفَرُوا فَتَعْسًا لَّهُمْ وَأَضَلَّ أَعْمَالَهُمْ
और जो लोग काफ़िर हैं उनके लिए तो डगमगाहट है और ख़ुदा (उनके) आमाल बरबाद कर देगा
9ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ كَرِهُوا مَا أَنزَلَ اللَّهُ فَأَحْبَطَ أَعْمَالَهُمْ
ये इसलिए कि ख़ुदा ने जो चीज़ नाज़िल फ़रमायी उसे उन्होने (नापसन्द किया) तो ख़ुदा ने उनकी कारस्तानियों को अकारत कर दिया
10۞ أَفَلَمْ يَسِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَيَنظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ دَمَّرَ اللَّهُ عَلَيْهِمْ ۖ وَلِلْكَافِرِينَ أَمْثَالُهَا
तो क्या ये लोग रूए ज़मीन पर चले फिरे नहीं तो देखते जो लोग उनसे पहले थे उनका अन्जाम क्या (ख़राब) हुआ कि ख़ुदा ने उन पर तबाही डाल दी और इसी तरह (उन) काफिरों को भी (सज़ा मिलेगी)
11ذَٰلِكَ بِأَنَّ اللَّهَ مَوْلَى الَّذِينَ آمَنُوا وَأَنَّ الْكَافِرِينَ لَا مَوْلَىٰ لَهُمْ
ये इस वजह से कि ईमानदारों का ख़ुदा सरपरस्त है और काफिरों का हरगिज़ कोई सरपरस्त नहीं
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अनुवाद — मुहम्मद 9

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Monday, September 28, 2026

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