अल-फतह · 19/29
अनुवाद उच्चारण — अल-फतह
وَمَغَانِمَ كَثِيرَةً يَأْخُذُونَهَا ۗ وَكَانَ اللَّهُ عَزِيزًا حَكِيمًا ۝١٩
Wa maghaanima kaseera tany yaakhuzoonahaa; wa kaanal laahu `Azeezan Hakeemaa
📖 हिंदी अर्थ
और (इसके अलावा) बहुत सी ग़नीमतें (भी) जो उन्होने हासिल की (अता फरमाई) और ख़ुदा तो ग़ालिब (और) हिकमत वाला है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • مَغَانِمَ: युद्ध में प्राप्त होने वाला धन-सम्पत्ति, ग़नीमत।
  • يَأْخُذُونَهَا: वे उसे लेंगे।
  • عَزِيزًا: सर्वशक्तिमान, जिसे कोई पराजित न कर सके।
  • حَكِيمًا: अत्यंत तत्वदर्शी, जो हर कार्य में पूर्ण ज्ञान और युक्ति से करता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ और उनके साथियों (रज़ियल्लाहु अन्हुम) पर अपनी विशेष कृपा और अनुग्रह का उल्लेख कर रहे हैं। जब आप ﷺ ने हुदैबिया के स्थान पर वृक्ष के नीचे सहाबा से बै'अत (प्रतिज्ञा) ली — जिसे 'बै'अतुर रिज़्वान' कहा जाता है — तो अल्लाह ने उनके दिलों की सच्चाई, ईमान और वफ़ादारी को देखा और उन पर अपनी विशेष रहमत और सकीनत (मन की शांति) उतारी। उन्होंने जो कुछ उस समय त्यागा और सहन किया, अल्लाह ने उसका बदला उन्हें जल्द ही दिया — एक निकट विजय (ख़ैबर की फ़तह) के रूप में, और साथ ही ढेर सारी ग़नीमतें जो उन्होंने यहूदियों के धन से प्राप्त कीं। ख़ैबर अपनी भूमि और धन-सम्पत्ति के लिए प्रसिद्ध था, और अल्लाह ने वह सब अपने प्यारे नबी ﷺ और उनके साथियों को प्रदान किया।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने सच्चे बंदों को कभी निराश नहीं करता। जब बंदा अल्लाह की राह में कुछ क़ुर्बान करता है, तो अल्लाह उसे उससे कहीं बेहतर देता है। अल्लाह 'अज़ीज़' है — वह अपने दुश्मनों पर पूरी तरह ग़ालिब है, और 'हकीम' है — वह हर मामले में अपनी युक्ति और ज्ञान से काम करता है। उसका हर फ़ैसला बेहतरीन होता है, चाहे वह हमें देर से समझ आए या न आए।

इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि अल्लाह पर भरोसा रखें और उसके वादों पर यक़ीन करें। जब हम ईमान और सब्र के साथ अल्लाह की राह में डटे रहते हैं, तो अल्लाह हमें ऐसी सफलताएँ देता है जिनकी हमने कल्पना भी नहीं की होती। यही इस्लाम की शान है — कि अल्लाह अपने बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता, बल्कि उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देता है।



📜 आयत 17-21 — अल-फतह

17لَّيْسَ عَلَى الْأَعْمَىٰ حَرَجٌ وَلَا عَلَى الْأَعْرَجِ حَرَجٌ وَلَا عَلَى الْمَرِيضِ حَرَجٌ ۗ وَمَن يُطِعِ اللَّهَ وَرَسُولَهُ يُدْخِلْهُ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ ۖ وَمَن يَتَوَلَّ يُعَذِّبْهُ عَذَابًا أَلِيمًا
(जेहाद से पीछे रह जाने का) न तो अन्धे ही पर कुछ गुनाह है और न लँगड़े पर गुनाह है और न बीमार पर गुनाह है और जो शख़्श ख़ुदा और उसके रसूल का हुक्म मानेगा तो वह उसको (बेहिश्त के) उन सदाबहार बाग़ों में दाख़िल करेगा जिनके नीचे नहरें जारी होंगी और जो सरताबी करेगा वह उसको दर्दनाक अज़ाब की सज़ा देगा
18۞ لَّقَدْ رَضِيَ اللَّهُ عَنِ الْمُؤْمِنِينَ إِذْ يُبَايِعُونَكَ تَحْتَ الشَّجَرَةِ فَعَلِمَ مَا فِي قُلُوبِهِمْ فَأَنزَلَ السَّكِينَةَ عَلَيْهِمْ وَأَثَابَهُمْ فَتْحًا قَرِيبًا
जिस वक्त मोमिनीन तुमसे दरख्त के नीचे (लड़ने मरने) की बैयत कर रहे थे तो ख़ुदा उनसे इस (बात पर) ज़रूर ख़ुश हुआ ग़रज़ जो कुछ उनके दिलों में था ख़ुदा ने उसे देख लिया फिर उन पर तस्सली नाज़िल फरमाई और उन्हें उसके एवज़ में बहुत जल्द फ़तेह इनायत की
19وَمَغَانِمَ كَثِيرَةً يَأْخُذُونَهَا ۗ وَكَانَ اللَّهُ عَزِيزًا حَكِيمًا
और (इसके अलावा) बहुत सी ग़नीमतें (भी) जो उन्होने हासिल की (अता फरमाई) और ख़ुदा तो ग़ालिब (और) हिकमत वाला है
20وَعَدَكُمُ اللَّهُ مَغَانِمَ كَثِيرَةً تَأْخُذُونَهَا فَعَجَّلَ لَكُمْ هَٰذِهِ وَكَفَّ أَيْدِيَ النَّاسِ عَنكُمْ وَلِتَكُونَ آيَةً لِّلْمُؤْمِنِينَ وَيَهْدِيَكُمْ صِرَاطًا مُّسْتَقِيمًا
ख़ुदा ने तुमसे बहुत सी ग़नीमतों का वायदा फरमाया था कि तुम उन पर काबिज़ हो गए तो उसने तुम्हें ये (ख़ैबर की ग़नीमत) जल्दी से दिलवा दीं और (हुबैदिया से) लोगों की दराज़ी को तुमसे रोक दिया और ग़रज़ ये थी कि मोमिनीन के लिए (क़ुदरत) का नमूना हो और ख़ुदा तुमको सीधी राह पर ले चले
21وَأُخْرَىٰ لَمْ تَقْدِرُوا عَلَيْهَا قَدْ أَحَاطَ اللَّهُ بِهَا ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرًا
और दूसरी (ग़नीमतें भी दी) जिन पर तुम क़ुदरत नहीं रखते थे (और) ख़ुदा ही उन पर हावी था और ख़ुदा तो हर चीज़ पर क़ादिर है
अल-फतहकुरान सूची
29आयत
मदनीRevelation
19आयत

अनुवाद — अल-फतह 19

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सूरा आयत 19/29 — अल-फतह الفتح (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फतह सुनें, अल-फतह अनुवाद, अल-फतह mp3, अल-फतह pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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