Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَا تَسْأَلُوا – सवाल मत करो
- أَشْيَاء – चीज़ें (यहाँ उन मामलों की ओर इशारा है जिनके बारे में शरई हुक्म नहीं आया)
- إِن تُبْدَ لَكُمْ – अगर वे तुम पर प्रकट कर दी जाएँ
- تَسُؤْكُمْ – तो तुम्हें दुखी करें (क्योंकि उन पर अमल करना कठिन होगा)
- حِينَ يُنَزَّلُ الْقُرْآنُ – जब क़ुरआन उतर रहा हो (नबी ﷺ के ज़माने में)
- عَفَا اللَّهُ عَنْهَا – अल्लाह ने उन्हें माफ़ कर दिया (यानी उनके बारे में हुक्म नहीं लगाया)
- غَفُورٌ حَلِيمٌ – बहुत क्षमा करने वाला, बहुत सहनशील
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ ईमान वालो! अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाने वालो! उन चीज़ों के बारे में सवाल मत करो जिनका कोई हुक्म तुम पर लागू नहीं हुआ और जिनकी कोई ज़रूरत भी नहीं है। अगर वे चीज़ें तुम पर प्रकट कर दी जाएँ, तो वे तुम्हें दुखी कर देंगी, क्योंकि उन पर अमल करना तुम्हारे लिए कठिन और भारी होगा। और अगर तुम उन चीज़ों के बारे में उस समय सवाल करो जब क़ुरआन उतर रहा हो और वही का दौर चल रहा हो, तो वे तुम पर प्रकट कर दी जाएँगी, और फिर तुम पर उनका हुक्म लागू हो जाएगा, जिसे निभाना तुम्हारे लिए मुश्किल होगा। अल्लाह ने उन चीज़ों को माफ़ कर दिया है, यानी उनके बारे में कोई हुक्म नहीं लगाया, और तुम्हें उनकी पूछताछ से छूट दी है। इसलिए उनके बारे में सवाल मत करो। अल्लाह बहुत क्षमा करने वाला है, अपने बंदों के गुनाहों को माफ़ कर देता है जब वे तौबा करते हैं, और वह बहुत सहनशील है, वह जल्दी सज़ा नहीं देता, बल्कि तुम्हें मौका देता है और अपनी रहमत से तुम्हारे साथ नरमी बरतता है।
फ़ायदे (उपदेश):
- बेफ़ायदा सवालों से बचना – यह आयत हमें सिखाती है कि धर्म में ऐसे सवाल पूछने से बचना चाहिए जिनकी कोई ज़रूरत न हो और जिनसे मुश्किलें पैदा हो सकती हैं। इस्लाम आसानी और सहूलत का दीन है, सख्ती और तकलीफ़ का नहीं।
- अल्लाह की रहमत और मेहरबानी – अल्लाह ने अपने बंदों पर बहुत मेहरबानी की है कि उसने कई चीज़ों के बारे में हुक्म नहीं लगाया, ताकि बंदों पर बोझ न पड़े। यह उसकी रहमत की निशानी है।
- अल्लाह की क्षमा और सहनशीलता – अल्लाह ग़फ़ूर और हलीम है, यानी वह बंदों की गलतियों को माफ़ करता है और उन्हें सज़ा देने में जल्दी नहीं करता। यह हमें अल्लाह की तरफ़ रुजू करने और उससे तौबा करने की हिम्मत देता है।
- नबी ﷺ के दौर में सवालों की सावधानी – यह आयत हमें बताती है कि नबी ﷺ के ज़माने में सवाल करने से हुक्म नाज़िल हो सकता था, इसलिए सहाबा को सवालों में सावधानी बरतने का हुक्म दिया गया। यह हमें सिखाता है कि धर्म के मामलों में अदब और एहतियात बरतना चाहिए।
- इस्लाम में आसानी का सिद्धांत – यह आयत इस्लाम के उस बुनियादी सिद्धांत को सामने रखती है कि अल्लाह अपने बंदों पर आसानी चाहता है, सख्ती नहीं। इसलिए हमें धर्म में बेफ़ायदा गहराई और सख्ती से बचना चाहिए और अल्लाह की दी हुई आसानी को क़बूल करना चाहिए।
📜 आयत 99-103 — सूरा अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 101
सूरा अल-माइदा आयत 101 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ईमान वालों ऐसी चीज़ों के बारे में (रसूल से)…सूरा आयत 101/120 — सूरा अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-माइदा सुनें, सूरा अल-माइदा अनुवाद, सूरा अल-माइदा mp3, सूरा अल-माइदा pdf. आयत 99–103. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-माइदा
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


