Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- قَدْ سَأَلَهَا: बेशक उस (ऐसे ही सवाल) को पूछा था।
- قَوْمٌ مِّن قَبْلِكُمْ: तुमसे पहले के कुछ लोगों ने।
- ثُمَّ أَصْبَحُوا بِهَا كَافِرِينَ: फिर वे उसी (सवाल या उसके उत्तर में मिले हुक्म) के इनकार करने वाले बन गए।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में अपने नबी ﷺ और उम्मत को नसीहत कर रहे हैं कि ऐसे सवाल पूछने से बचो, जिनके बारे में हुक्म न आया हो, क्योंकि तुमसे पहले की क़ौमों ने भी ऐसे ही सवाल अपने नबियों से पूछे थे। जब उन्हें उन सवालों के जवाब में कोई हुक्म दिया गया, तो उन्होंने उसे मानने से इनकार कर दिया और उस पर अमल नहीं किया। नतीजा यह हुआ कि वे उसी चीज़ के काफ़िर बन गए, जिसके बारे में उन्होंने खुद पूछा था। मिसाल के तौर पर, समूद की क़ौम ने नबी सालिह से ऊँटनी का सवाल किया, और जब वह आई तो उन्होंने उसे काट डाला। इसी तरह हज़रत ईसा की उम्मत ने माँगी हुई दावत (माइदा) के बाद उसे झुठलाया और उसके हुक्म की नाफ़रमानी की। इसलिए मुसलमानों को चाहिए कि वे उन चीज़ों के बारे में सवाल न करें जिन्हें अल्लाह ने माफ़ कर दिया है या जिन पर सुकूत इख्तियार किया गया है, क्योंकि सवाल करने से हुक्म सख्त हो सकता है और फिर उस पर अमल न करना इनकार की शक्ल अख्तियार कर लेता है।
फ़ायदे (सबक):
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि दीन में उन चीज़ों के बारे में बेवजह सवाल नहीं करने चाहिए जिनका हुक्म अल्लाह ने नहीं बताया, क्योंकि इल्म बढ़ने के बजाय ज़िम्मेदारी बढ़ जाती है।
- यह हमें अपने नबी ﷺ की शिक्षाओं पर अमल करने की तरग़ीब देती है कि जो हुक्म मिले, उसे बिना किसी हिचकिचाहट के मानना चाहिए, वरना अंजाम बुरा होता है।
- यह आयत मुसलमानों को पहले की क़ौमों के अंजाम से डराती है और उन्हें सब्र, तस्लीम और रज़ा की तालीम देती है, ताकि वे उन्हीं रास्तों पर न चलें जिन पर चलकर पहले वाले हलाक हुए।
- इसमें अल्लाह की रहमत की झलक है कि उसने हमारे दीन को आसान बनाया है और अनावश्यक सवालों से बचने की हिदायत देकर हम पर बोझ कम किया है। यह हमें इस्लाम की आसानी और कामयाबी की राह दिखाता है।
📜 आयत 100-104 — सूरा अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 102
सूरा अल-माइदा आयत 102 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तुमसे पहले भी लोगों ने इस किस्म की बातें (अपने…सूरा आयत 102/120 — सूरा अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-माइदा सुनें, सूरा अल-माइदा अनुवाद, सूरा अल-माइदा mp3, सूरा अल-माइदा pdf. आयत 100–104. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-माइदा
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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