अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- الْخَبِيثُ (ख़बीस): वह चीज़ जो नापाक, हराम या बुरी हो — चाहे वह धन हो, कर्म हो, या व्यक्ति।
- الطَّيِّبُ (तैय्यिब): वह चीज़ जो पाक, हलाल और अच्छी हो।
- أُولِي الْأَلْبَابِ (उलिल-अल्बाब): बुद्धिमान और समझदार लोग, जो सत्य को समझने और उस पर अमल करने की क्षमता रखते हैं।
- تُفْلِحُونَ (तुफ़्लिहून): सफल होना, कामयाबी पाना — जिसमें दुनिया और आख़िरत की भलाई शामिल है।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप लोगों से कह दीजिए कि ख़बीस (नापाक) और तैय्यिब (पाक) कभी बराबर नहीं हो सकते — चाहे वह किसी भी चीज़ का मामला हो। काफ़िर और मोमिन बराबर नहीं, नाफ़रमान और फ़रमाँबरदार बराबर नहीं, जाहिल और आलिम बराबर नहीं, बिद'अती और सुन्नत पर चलने वाला बराबर नहीं, और हराम माल और हलाल माल बराबर नहीं। भले ही ख़बीस की तादाद बहुत ज़्यादा हो और वह आपको अच्छा लगे, लेकिन उसकी कसरत उसकी कोई अहमियत या फ़ज़ीलत साबित नहीं करती। कम मात्रा में पाक चीज़, ज़्यादा मात्रा में नापाक चीज़ से बेहतर है।
इसलिए ऐ अक़्लमंद लोगो! तुम अल्लाह से डरो — यानी उसके हुक्मों का पालन करो, हराम और बुरी चीज़ों से बचो, और पाक व अच्छी चीज़ों को अपनाओ। यही तरीक़ा है जिससे तुम सच्ची कामयाबी पा सकते हो — यानी अल्लाह की रज़ा और जन्नत की नेमतें।
फ़ायदे (सबक़):
- इस आयत से हमें यह सिख मिलती है कि इस्लाम में चीज़ों की असली क़ीमत उनकी तादाद से नहीं, बल्कि उनकी पाकीज़गी और अल्लाह की रज़ा से है। बुराई चाहे कितनी भी फैली हो, वह भलाई के मुक़ाबले में कभी बेहतर नहीं हो सकती।
- अल्लाह ने यहाँ ख़ास तौर पर अक़्लमंदों को ख़िताब किया है — यानी सच्ची अक़्ल यही है कि इंसान अच्छे और बुरे में फ़र्क़ करे और बुराई से बचकर भलाई को अपनाए।
- यह आयत हमें सिखाती है कि हलाल कमाई और पाक ज़िंदगी ही असली सफलता का ज़रिया है। चाहे दुनिया में हराम के ज़रिए कितना भी धन या शोहरत मिले, वह आख़िरत में नुक़सान का सबब बनेगा।
- यह भी सबक़ है कि इंसान को भीड़ की तरह नहीं चलना चाहिए। अगर ज़्यादातर लोग बुराई पर हों, तो भी हमें सच्चाई और अच्छाई का साथ देना चाहिए।
- अंत में अल्लाह ने "लअल्लकुम तुफ़्लिहून" (ताकि तुम कामयाब हो जाओ) कहकर यह बताया कि परहेज़गारी ही असली फलाह (सफलता) की कुंजी है — जो इस पर चलेगा, वही दुनिया और आख़िरत में कामयाब होगा।
📜 आयत 98-102 — अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 100
सूरा अल-माइदा आयत 100 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) कह दो कि नापाक (हराम) और पाक (हलाल)…सूरा आयत 100/120 — अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-माइदा सुनें, अल-माइदा अनुवाद, अल-माइदा mp3, अल-माइदा pdf. आयत 98–102. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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