अल-माइदा · 100/120
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-माइदा
قُل لَّا يَسْتَوِي الْخَبِيثُ وَالطَّيِّبُ وَلَوْ أَعْجَبَكَ كَثْرَةُ الْخَبِيثِ ۚ فَاتَّقُوا اللَّهَ يَا أُولِي الْأَلْبَابِ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ ۝١٠٠
Qul laa yastawil khabeesu wattaiyibu wa law a`jabaka kasratul khabees; fattaqul laaha yaaa ulil albaabi la`allakum tuflihoon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) कह दो कि नापाक (हराम) और पाक (हलाल) बराबर नहीं हो सकता अगरचे नापाक की कसरत तुम्हें भला क्यों न मालूम हो तो ऐसे अक्लमन्दों अल्लाह से डरते रहो ताकि तुम कामयाब रहो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الْخَبِيثُ (ख़बीस): वह चीज़ जो नापाक, हराम या बुरी हो — चाहे वह धन हो, कर्म हो, या व्यक्ति।
  • الطَّيِّبُ (तैय्यिब): वह चीज़ जो पाक, हलाल और अच्छी हो।
  • أُولِي الْأَلْبَابِ (उलिल-अल्बाब): बुद्धिमान और समझदार लोग, जो सत्य को समझने और उस पर अमल करने की क्षमता रखते हैं।
  • تُفْلِحُونَ (तुफ़्लिहून): सफल होना, कामयाबी पाना — जिसमें दुनिया और आख़िरत की भलाई शामिल है।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप लोगों से कह दीजिए कि ख़बीस (नापाक) और तैय्यिब (पाक) कभी बराबर नहीं हो सकते — चाहे वह किसी भी चीज़ का मामला हो। काफ़िर और मोमिन बराबर नहीं, नाफ़रमान और फ़रमाँबरदार बराबर नहीं, जाहिल और आलिम बराबर नहीं, बिद'अती और सुन्नत पर चलने वाला बराबर नहीं, और हराम माल और हलाल माल बराबर नहीं। भले ही ख़बीस की तादाद बहुत ज़्यादा हो और वह आपको अच्छा लगे, लेकिन उसकी कसरत उसकी कोई अहमियत या फ़ज़ीलत साबित नहीं करती। कम मात्रा में पाक चीज़, ज़्यादा मात्रा में नापाक चीज़ से बेहतर है।

इसलिए ऐ अक़्लमंद लोगो! तुम अल्लाह से डरो — यानी उसके हुक्मों का पालन करो, हराम और बुरी चीज़ों से बचो, और पाक व अच्छी चीज़ों को अपनाओ। यही तरीक़ा है जिससे तुम सच्ची कामयाबी पा सकते हो — यानी अल्लाह की रज़ा और जन्नत की नेमतें।

फ़ायदे (सबक़):

  1. इस आयत से हमें यह सिख मिलती है कि इस्लाम में चीज़ों की असली क़ीमत उनकी तादाद से नहीं, बल्कि उनकी पाकीज़गी और अल्लाह की रज़ा से है। बुराई चाहे कितनी भी फैली हो, वह भलाई के मुक़ाबले में कभी बेहतर नहीं हो सकती।
  2. अल्लाह ने यहाँ ख़ास तौर पर अक़्लमंदों को ख़िताब किया है — यानी सच्ची अक़्ल यही है कि इंसान अच्छे और बुरे में फ़र्क़ करे और बुराई से बचकर भलाई को अपनाए।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि हलाल कमाई और पाक ज़िंदगी ही असली सफलता का ज़रिया है। चाहे दुनिया में हराम के ज़रिए कितना भी धन या शोहरत मिले, वह आख़िरत में नुक़सान का सबब बनेगा।
  4. यह भी सबक़ है कि इंसान को भीड़ की तरह नहीं चलना चाहिए। अगर ज़्यादातर लोग बुराई पर हों, तो भी हमें सच्चाई और अच्छाई का साथ देना चाहिए।
  5. अंत में अल्लाह ने "लअल्लकुम तुफ़्लिहून" (ताकि तुम कामयाब हो जाओ) कहकर यह बताया कि परहेज़गारी ही असली फलाह (सफलता) की कुंजी है — जो इस पर चलेगा, वही दुनिया और आख़िरत में कामयाब होगा।


📜 आयत 98-102 — सूरा अल-माइदा

98اعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ شَدِيدُ الْعِقَابِ وَأَنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
जान लो कि यक़ीनन ख़ुदा बड़ा अज़ाब वाला है और ये (भी) कि बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
99مَّا عَلَى الرَّسُولِ إِلَّا الْبَلَاغُ ۗ وَاللَّهُ يَعْلَمُ مَا تُبْدُونَ وَمَا تَكْتُمُونَ
(हमारे) रसूल पर पैग़ाम पहुँचा देने के सिवा (और) कुछ (फर्ज़) नहीं और जो कुछ तुम ज़ाहिर बा ज़ाहिर करते हो और जो कुछ तुम छुपा कर करते हो ख़ुदा सब जानता है
100قُل لَّا يَسْتَوِي الْخَبِيثُ وَالطَّيِّبُ وَلَوْ أَعْجَبَكَ كَثْرَةُ الْخَبِيثِ ۚ فَاتَّقُوا اللَّهَ يَا أُولِي الْأَلْبَابِ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ
(ऐ रसूल) कह दो कि नापाक (हराम) और पाक (हलाल) बराबर नहीं हो सकता अगरचे नापाक की कसरत तुम्हें भला क्यों न मालूम हो तो ऐसे अक्लमन्दों अल्लाह से डरते रहो ताकि तुम कामयाब रहो
101يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَسْأَلُوا عَنْ أَشْيَاءَ إِن تُبْدَ لَكُمْ تَسُؤْكُمْ وَإِن تَسْأَلُوا عَنْهَا حِينَ يُنَزَّلُ الْقُرْآنُ تُبْدَ لَكُمْ عَفَا اللَّهُ عَنْهَا ۗ وَاللَّهُ غَفُورٌ حَلِيمٌ
ऐ ईमान वालों ऐसी चीज़ों के बारे में (रसूल से) न पूछा करो कि अगर तुमको मालूम हो जाए तो तुम्हें बुरी मालूम हो और अगर उनके बारे में कुरान नाज़िल होने के वक्त पूछ बैठोगे तो तुम पर ज़ाहिर कर दी जाएगी (मगर तुमको बुरा लगेगा जो सवालात तुम कर चुके) ख़ुदा ने उनसे दरगुज़र की और ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला बुर्दबार है
102قَدْ سَأَلَهَا قَوْمٌ مِّن قَبْلِكُمْ ثُمَّ أَصْبَحُوا بِهَا كَافِرِينَ
तुमसे पहले भी लोगों ने इस किस्म की बातें (अपने वक्त क़े पैग़म्बरों से) पूछी थीं
अल-माइदाकुरान सूची
120आयत
मदनीअवतरण स्थान
100आयत

अनुवाद — अल-माइदा 100

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Thursday, October 1, 2026

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