काफ · 32/45
अनुवाद उच्चारण — सूरा काफ
هَٰذَا مَا تُوعَدُونَ لِكُلِّ أَوَّابٍ حَفِيظٍ ۝٣٢
Haaza maa too`adoona likulli awwaabin hafeez
📖 हिंदी अर्थ
यही तो वह बेहिश्त है जिसका तुममें से हर एक (ख़ुदा की तरफ़) रूजू करने वाले (हुदूद की) हिफाज़त करने वाले से वायदा किया जाता है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • अव्वाब (أَوَّاب): अल्लाह की ओर बार-बार रुजू करने वाला, पापों से तौबा करने वाला।
  • हफ़ीज़ (حَفِيظ): हिफ़ाज़त करने वाला, अल्लाह के हुक्मों की पाबंदी करने वाला और अपने गुनाहों को याद रखने वाला ताकि उनसे माफ़ी माँगे।

तफ़सीर:

जब मुत्तक़ी (परहेज़गार) लोग जन्नत में दाखिल होंगे और उसकी नेअमतों को अपनी आँखों से देखेंगे, तो उनसे कहा जाएगा: "यह वही चीज़ है जिसका तुमसे वादा किया गया था।" यह जन्नत और उसकी तमाम नेअमतें उस हर बंदे के लिए हैं जो अव्वाब है, यानी गुनाह करने के बाद बार-बार अल्लाह की तरफ लौटने वाला, तौबा करने वाला, और अपने रब की इबादत में लगा रहने वाला है। और वह हफ़ीज़ है, यानी अल्लाह के हुक्मों की हिफ़ाज़त करने वाला, फ़र्ज़ और नफ़्ल इबादतों की पाबंदी करने वाला, और अपने गुनाहों को याद रखने वाला ताकि उनसे तौबा करता रहे। ऐसा बंदा जो दुनिया में अल्लाह से डरता था और उससे मिलने के लिए तैयार रहता था, उसके लिए यह इनाम है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त कितना करीम और रहीम है। वह अपने बंदों से यह नहीं चाहता कि वे कभी गुनाह न करें, बल्कि वह चाहता है कि जब गुनाह हो जाए तो बंदा तौबा करके उसकी तरफ लौटे। अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा हमेशा खुला है। जो बंदा भी सच्चे दिल से तौबा करता है और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह के हुक्मों के मुताबिक ढालता है, उसके लिए जन्नत का यह वादा है। यह हमारे लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है कि हमारा रब हमें बुला रहा है — बस एक क़दम उसकी तरफ बढ़ाइए, वह दौड़कर आपकी तरफ आएगा। तो आइए, हम सब अपनी ज़िंदगी को अव्वाब और हफ़ीज़ बंदों की तरह बनाएँ — गुनाहों से तौबा करें, और अल्लाह के हुक्मों की हिफ़ाज़त करें, ताकि हम भी उस महान इनाम के हक़दार बनें।



📜 आयत 30-34 — सूरा काफ

30يَوْمَ نَقُولُ لِجَهَنَّمَ هَلِ امْتَلَأْتِ وَتَقُولُ هَلْ مِن مَّزِيدٍ
उस दिन हम दोज़ख़ से पूछेंगे कि तू भर चुकी और वह कहेगी क्या कुछ और भी हैं
31وَأُزْلِفَتِ الْجَنَّةُ لِلْمُتَّقِينَ غَيْرَ بَعِيدٍ
और बेहिश्त परहेज़गारों के बिलकुल करीब कर दी जाएगी
32هَٰذَا مَا تُوعَدُونَ لِكُلِّ أَوَّابٍ حَفِيظٍ
यही तो वह बेहिश्त है जिसका तुममें से हर एक (ख़ुदा की तरफ़) रूजू करने वाले (हुदूद की) हिफाज़त करने वाले से वायदा किया जाता है
33مَّنْ خَشِيَ الرَّحْمَٰنَ بِالْغَيْبِ وَجَاءَ بِقَلْبٍ مُّنِيبٍ
तो जो शख़्श ख़ुदा से बे देखे डरता रहा और ख़ुदा की तरफ़ रूजू करने वाला दिल लेकर आया
34ادْخُلُوهَا بِسَلَامٍ ۖ ذَٰلِكَ يَوْمُ الْخُلُودِ
(उसको हुक्म होगा कि) इसमें सही सलामत दाख़िल हो जाओ यहीं तो हमेशा रहने का दिन है
काफकुरान सूची
45आयत
मक्कीअवतरण स्थान
32आयत

अनुवाद — काफ 32

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Thursday, October 1, 2026

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