काफ · 31/45
अनुवाद उच्चारण — सूरा काफ
وَأُزْلِفَتِ الْجَنَّةُ لِلْمُتَّقِينَ غَيْرَ بَعِيدٍ ۝٣١
Wa uzlifatil jannatu lil muttaqeena ghaira ba`eed
📖 हिंदी अर्थ
और बेहिश्त परहेज़गारों के बिलकुल करीब कर दी जाएगी

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَأُزْلِفَتِ: अर्थात निकट कर दी गई, पास ला दी गई।
  • الْجَنَّةُ: जन्नत (स्वर्ग)।
  • لِلْمُتَّقِينَ: उन लोगों के लिए जो अल्लाह से डरते हैं और उसकी आज्ञाओं का पालन करते हैं।
  • غَيْرَ بَعِيدٍ: अर्थात वह स्थान जो दूर नहीं है, बल्कि बहुत पास है।

तफसीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उस महान दृश्य का वर्णन कर रहे हैं जो क़यामत के दिन मुत्तक़ियों (परहेज़गारों) के सामने होगा। जब हिसाब-किताब पूरा हो जाएगा और नेक लोगों को जन्नत की ओर ले जाया जाएगा, तो जन्नत को उनके बहुत करीब ला दिया जाएगा—इतना करीब कि वे उसे अपनी आँखों से देखेंगे और उसकी रौनक़, उसकी हरियाली, उसके महल और उसकी नेअमतों को सामने पाएँगे। यह उनके लिए खुशी और मसर्रत का सबसे बड़ा क्षण होगा।

यह "करीब" होना सिर्फ़ जगह का करीब नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की रहमत और मेहरबानी का इज़हार है कि वह अपने नेक बंदों को इस क़दर सम्मानित करेगा कि जन्नत उनके सामने पेश की जाएगी। यह उन लोगों के लिए इनाम है जिन्होंने दुनिया में अल्लाह के हुक्मों का पालन किया, उसकी मनाही से बचे रहे, और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक़ बनाया।

यहाँ "غَيْرَ بَعِيدٍ" (दूर नहीं) का ज़िक्र इसलिए किया गया ताकि मोमिनीन के दिलों को सुकून मिले कि जन्नत उनसे बिल्कुल पास है, और वे उसे देखकर अपनी आँखें ठंडी कर लेंगे। यह उनके लिए सबसे बड़ी तसल्ली और खुशखबरी है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला अपने नेक बंदों से कितना प्यार करता है और उन्हें कितना सम्मान देता है। जन्नत सिर्फ़ एक इनाम नहीं है, बल्कि अल्लाह की मुहब्बत का नतीजा है। जो लोग दुनिया में अल्लाह के करीब रहते हैं, अल्लाह भी उन्हें आख़िरत में अपनी रहमत के साथ अपने करीब ले आता है। यह आयत हमें तक़वा (परहेज़गारी) अपनाने की तरग़ीब देती है—कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह के हुक्मों पर चलें, उसकी नाराज़गी से बचें, और उसकी रज़ा के तलबगार रहें। जो आज अल्लाह की राह में अपनी ख्वाहिशों को क़ुर्बान करता है, वह कल इस जन्नत का मालिक होगा जो उसके सामने पेश की जाएगी। यह वादा सच्चा है और अल्लाह कभी अपना वादा नहीं तोड़ता।



📜 आयत 29-33 — सूरा काफ

29مَا يُبَدَّلُ الْقَوْلُ لَدَيَّ وَمَا أَنَا بِظَلَّامٍ لِّلْعَبِيدِ
मेरे यहाँ बात बदला नहीं करती और न मैं बन्दों पर (ज़र्रा बराबर) ज़ुल्म करने वाला हूँ
30يَوْمَ نَقُولُ لِجَهَنَّمَ هَلِ امْتَلَأْتِ وَتَقُولُ هَلْ مِن مَّزِيدٍ
उस दिन हम दोज़ख़ से पूछेंगे कि तू भर चुकी और वह कहेगी क्या कुछ और भी हैं
31وَأُزْلِفَتِ الْجَنَّةُ لِلْمُتَّقِينَ غَيْرَ بَعِيدٍ
और बेहिश्त परहेज़गारों के बिलकुल करीब कर दी जाएगी
32هَٰذَا مَا تُوعَدُونَ لِكُلِّ أَوَّابٍ حَفِيظٍ
यही तो वह बेहिश्त है जिसका तुममें से हर एक (ख़ुदा की तरफ़) रूजू करने वाले (हुदूद की) हिफाज़त करने वाले से वायदा किया जाता है
33مَّنْ خَشِيَ الرَّحْمَٰنَ بِالْغَيْبِ وَجَاءَ بِقَلْبٍ مُّنِيبٍ
तो जो शख़्श ख़ुदा से बे देखे डरता रहा और ख़ुदा की तरफ़ रूजू करने वाला दिल लेकर आया
काफकुरान सूची
45आयत
मक्कीअवतरण स्थान
31आयत

अनुवाद — काफ 31

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सूरा आयत 31/45 — सूरा काफ ق (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा काफ सुनें, सूरा काफ अनुवाद, सूरा काफ mp3, सूरा काफ pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.





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Friday, October 2, 2026

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