काफ · 39/45
अनुवाद उच्चारण — सूरा काफ
فَاصْبِرْ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ قَبْلَ طُلُوعِ الشَّمْسِ وَقَبْلَ الْغُرُوبِ ۝٣٩
Fasbir `alaa maa yaqooloona wa sabbih bihamdi Rabbika qabla tuloo`ish shamsi wa qablal ghuroob
📖 हिंदी अर्थ
तो (ऐ रसूल) जो कुछ ये (काफ़िर) लोग किया करते हैं उस पर तुम सब्र करो और आफ़ताब के निकलने से पहले अपने परवरदिगार के हम्द की तस्बीह किया करो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَاصْبِرْ: धैर्य रखें, सहन करें।
  • يَقُولُونَ: वे (काफिर और मुशरिकीन) कहते हैं।
  • سَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ: अपने रब की प्रशंसा के साथ उसकी तस्बीह (पवित्रता का वर्णन) करें, यानी नमाज़ पढ़ें।
  • قَبْلَ طُلُوعِ الشَّمْسِ: सूर्योदय से पहले (फज्र की नमाज़)।
  • قَبْلَ الْغُرُوبِ: सूर्यास्त से पहले (अस्र की नमाज़)।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! जो बातें यहूदी और मुशरिकीन आपके बारे में कहते हैं—चाहे वे आपको जादूगर कहें, शायर कहें, या आपके पैग़ाम को झुठलाएँ—उन पर आप धैर्य रखें। यह धैर्य आपके लिए सबसे बड़ा हथियार है, क्योंकि अल्लाह तआला आपके साथ है और वह उन सबको देख रहा है। उनकी बातों से आपका दिल न घबराए, न उदास हो, क्योंकि सच्चाई आपके साथ है और अल्लाह की मदद आपके लिए यक़ीनी है।

फिर अल्लाह तआला आपको एक ऐसा नुस्ख़ा देता है जो हर मुश्किल में सुकून का ज़रिया बनता है—वह है नमाज़ और इबादत। आप अपने रब की तस्बीह करें, उसकी हम्द (प्रशंसा) के साथ, सूर्योदय से पहले यानी फज्र की नमाज़ पढ़ें, और सूर्यास्त से पहले यानी अस्र की नमाज़ अदा करें। ये नमाज़ें आपको ताक़त देती हैं, आपके दिल को सुकून देती हैं, और आपको याद दिलाती हैं कि इस दुनिया की बातें कितनी छोटी हैं जबकि आपके रब की याद कितनी बड़ी है।

यह आदेश सिर्फ़ नबी के लिए नहीं, बल्कि हर मोमिन के लिए है। जब भी आप पर मुश्किलें आएँ, जब भी लोगों की बातें आपको दुखी करें, तो नमाज़ की तरफ़ रुजू करें। फज्र की नमाज़ दिन की शुरुआत को रोशन करती है, और अस्र की नमाज़ दिन के आख़िर में आपको सुकून देती है। यही वह समय है जब अल्लाह के फ़रिश्ते बदलते हैं और आपकी इबादत को उठाकर अल्लाह के दरबार में पेश करते हैं।

इस आयत में एक और गहरा पैग़ाम है—धैर्य और नमाज़ एक साथ। जब आप धैर्य रखते हैं और नमाज़ पढ़ते हैं, तो आपकी मुश्किलें आसान हो जाती हैं। यही वह रास्ता है जो आपको जन्नत तक पहुँचाता है। अल्लाह तआला ने हमें यह सिखाया है कि हर मुश्किल में उसकी तरफ़ रुजू करें, उसकी हम्द करें, और उसकी इबादत में वक़्त गुज़ारें। यही वह चाबी है जो दिलों को खोलती है और रहमतों के दरवाज़े खोलती है।

तो ऐ मोमिन! जब भी ज़िंदगी की तकलीफ़ें आपको घेरें, तो याद रखें—सब्र और नमाज़ आपके साथी हैं। इन्हीं के ज़रिए आप अल्लाह की मदद पाएँगे, और यही आपको उस दिन की कामयाबी तक पहुँचाएगा जब कोई और मददगार नहीं होगा।



📜 आयत 37-41 — सूरा काफ

37إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَذِكْرَىٰ لِمَن كَانَ لَهُ قَلْبٌ أَوْ أَلْقَى السَّمْعَ وَهُوَ شَهِيدٌ
इसमें शक़ नहीं कि जो शख़्श (आगाह) दिल रखता है या कान लगाकर हुज़ूरे क़ल्ब से सुनता है उसके लिए इसमें (काफ़ी) नसीहत है
38وَلَقَدْ خَلَقْنَا السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا فِي سِتَّةِ أَيَّامٍ وَمَا مَسَّنَا مِن لُّغُوبٍ
और हमने ही यक़ीनन सारे आसमान और ज़मीन और जो कुछ उन दोनों के बीच में है छह: दिन में पैदा किए और थकान तो हमको छुकर भी नहीं गयी
39فَاصْبِرْ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ قَبْلَ طُلُوعِ الشَّمْسِ وَقَبْلَ الْغُرُوبِ
तो (ऐ रसूल) जो कुछ ये (काफ़िर) लोग किया करते हैं उस पर तुम सब्र करो और आफ़ताब के निकलने से पहले अपने परवरदिगार के हम्द की तस्बीह किया करो
40وَمِنَ اللَّيْلِ فَسَبِّحْهُ وَأَدْبَارَ السُّجُودِ
और थोड़ी देर रात को भी और नमाज़ के बाद भी उसकी तस्बीह करो
41وَاسْتَمِعْ يَوْمَ يُنَادِ الْمُنَادِ مِن مَّكَانٍ قَرِيبٍ
और कान लगा कर सुन रखो कि जिस दिन पुकारने वाला (इसराफ़ील) नज़दीक ही जगह से आवाज़ देगा
काफकुरान सूची
45आयत
मक्कीअवतरण स्थान
39आयत

अनुवाद — काफ 39

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Thursday, October 1, 2026

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