काफ · 40/45
अनुवाद उच्चारण — काफ
وَمِنَ اللَّيْلِ فَسَبِّحْهُ وَأَدْبَارَ السُّجُودِ ۝٤٠
Wa minal laili fasabbih hu wa adbaaras sujood
📖 हिंदी अर्थ
और थोड़ी देर रात को भी और नमाज़ के बाद भी उसकी तस्बीह करो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَمِنَ اللَّيْلِ: रात के कुछ हिस्से में।
  • فَسَبِّحْهُ: उसकी तस्बीह करो, यानी उसके लिए नमाज़ पढ़ो और उसकी पवित्रता का वर्णन करो।
  • وَأَدْبَارَ السُّجُودِ: सज्दों के बाद, यानी नमाज़ों के बाद।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को और उनके ज़रिए पूरी उम्मत को नसीहत कर रहे हैं कि जब दिन हो, तो सुबह की नमाज़ सूरज निकलने से पहले पढ़ो और अस्र की नमाज़ सूरज डूबने से पहले। ये दोनों नमाज़ें दिन के अहम हिस्सों में अल्लाह की याद और उसकी तस्बीह हैं।

फिर अल्लाह फ़रमाता है कि रात के कुछ हिस्से में भी उसकी तस्बीह करो, यानी मग़रिब और ईशा की नमाज़ें पढ़ो। रात का अंधेरा जब छा जाए, तो उस वक़्त अल्लाह की इबादत का अपना ही लुत्फ़ है, और ये दिल को सुकून देती है।

और "أَدْبَارَ السُّجُودِ" यानी हर नमाज़ के बाद अल्लाह की तस्बीह करो। इसमें मग़रिब के बाद की दो रकअतें (सुन्नत) भी शामिल हैं, और हर नमाज़ के बाद की तस्बीहात (सुब्हानल्लाह, अल्हम्दुलिल्लाह, अल्लाहु अकबर) भी। ये वो अज़कार हैं जो नमाज़ के बाद अल्लाह की याद में किए जाते हैं और जिनमें बरकत होती है।

इस आयत में अल्लाह हमें सिखा रहा है कि हमारी पूरी ज़िंदगी — चाहे दिन हो या रात — अल्लाह की याद और उसकी इबादत में गुज़रनी चाहिए। जब हम दिन की शुरुआत अल्लाह की याद से करते हैं और रात का अंत भी उसी की याद में करते हैं, तो हमारी ज़िंदगी बरकत वाली बन जाती है।

ये आयत हमें नमाज़ों की पाबंदी की तरग़ीब देती है। नमाज़ ही वो ज़रिया है जिससे बंदा अपने रब से जुड़ता है, अपने गुनाहों की माफ़ी माँगता है और सकून हासिल करता है। रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया कि नमाज़ आँखों की ठंडक है। जब भी दिल पर बोझ हो, तो नमाज़ में लग जाओ, अल्लाह की तस्बीह करो, और देखो कैसे आपका दिल हल्का हो जाता है।

अल्लाह हमें तौफ़ीक़ दे कि हम अपनी नमाज़ों की पाबंदी करें, ख़ासकर सुबह और अस्र की नमाज़ की, और हर नमाज़ के बाद उसकी तस्बीह और ज़िक्र करें। आमीन।



📜 आयत 38-42 — काफ

38وَلَقَدْ خَلَقْنَا السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا فِي سِتَّةِ أَيَّامٍ وَمَا مَسَّنَا مِن لُّغُوبٍ
और हमने ही यक़ीनन सारे आसमान और ज़मीन और जो कुछ उन दोनों के बीच में है छह: दिन में पैदा किए और थकान तो हमको छुकर भी नहीं गयी
39فَاصْبِرْ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ قَبْلَ طُلُوعِ الشَّمْسِ وَقَبْلَ الْغُرُوبِ
तो (ऐ रसूल) जो कुछ ये (काफ़िर) लोग किया करते हैं उस पर तुम सब्र करो और आफ़ताब के निकलने से पहले अपने परवरदिगार के हम्द की तस्बीह किया करो
40وَمِنَ اللَّيْلِ فَسَبِّحْهُ وَأَدْبَارَ السُّجُودِ
और थोड़ी देर रात को भी और नमाज़ के बाद भी उसकी तस्बीह करो
41وَاسْتَمِعْ يَوْمَ يُنَادِ الْمُنَادِ مِن مَّكَانٍ قَرِيبٍ
और कान लगा कर सुन रखो कि जिस दिन पुकारने वाला (इसराफ़ील) नज़दीक ही जगह से आवाज़ देगा
42يَوْمَ يَسْمَعُونَ الصَّيْحَةَ بِالْحَقِّ ۚ ذَٰلِكَ يَوْمُ الْخُرُوجِ
(कि उठो) जिस दिन लोग एक सख्त चीख़ को बाख़ूबी सुन लेगें वही दिन (लोगों) के कब्रों से निकलने का होगा
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अनुवाद — काफ 40

सूरा काफ आयत 40 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और थोड़ी देर रात को भी और नमाज़ के बाद…

सूरा आयत 40/45 — काफ ق (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: काफ सुनें, काफ अनुवाद, काफ mp3, काफ pdf. आयत 38–42. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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